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लखनऊ-IIIT के दीक्षांत-समारोह को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने किया संबोधित, कहा- 2047 तक भारत को विकसित बनाना युवाओं का कर्तव्य

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की आज भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT), लखनऊ के दूसरे दीक्षांत समारोह में गरिमामयी उपस्थिति रही और उन्‍होंने इसे संबोधित किया। इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि आज भारत में 5 डी – डिमांड, डेमोग्राफी, डेमोक्रेसी, डिज़ायर और ड्रीम हैं। ये 5डी हमारी विकास यात्रा में बहुत लाभकारी सिद्ध होंगी। हमारी अर्थव्यवस्था, जो एक दशक पहले 11वें स्थान पर थी, आज 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है और यह वर्ष 2030 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के मार्ग पर अग्रसर है। भारत एक प्रगतिशील और लोकतांत्रिक राष्ट्र है। हमारा यह सपना है कि भारत वर्ष 2047 तक एक विकसित देश बने। उन्होंने कहा कि यह आईआईआईटी, लखनऊ के सभी छात्रों की जिम्मेदारी है कि वे न केवल इस विजन में भागीदार ही न बनें, बल्कि इसे पूरा करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान भी दें।

राष्ट्रपति ने कहा कि परिवर्तन प्रकृति का नियम है। हम चौथी औद्योगिक क्रांति की शुरुआत देख रहे हैं। मानव जीवन को आसान बनाने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक महत्वपूर्ण उपकरण सिद्ध हो रही है। अपने व्यापक अनुप्रयोगों के साथ, एआई और मशीन लर्निंग हमारे जीवन के लगभग सभी पहलुओं को छू रहे हैं। स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, कृषि, स्मार्ट सिटी, बुनियादी ढांचे, स्मार्ट गतिशीलता और परिवहन जैसे सभी क्षेत्रों में, एआई और मशीन लर्निंग बड़े पैमाने पर हमारी दक्षता और कार्य क्षमता में सुधार के कई अवसर प्रस्‍तुत कर रहे हैं। उन्हें यह जानकर बहुत खुशी हुई कि भारत न केवल चौथी औद्योगिक क्रांति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और ब्लॉकचेन जैसी नई प्रौद्योगिकियों के वैश्विक केंद्र के रूप में भी उभर रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि एआई और अन्य समकालीन प्रौद्योगिकी विकास असीमित और अभूतपूर्व विकासात्मक और परिवर्तनकारी संभावनाएं प्रस्‍तुत कर रहे हैं। लेकिन, यह आवश्‍यक है कि पहले एआई के इस्तेमाल से पैदा होने वाली नैतिक दुविधाओं का समाधान किया जाए। चाहे वो स्वचालन के कारण उत्पन्न हुई रोजगार की समस्या हो, या आर्थिक असमानता की बढ़ती हुई खाई हो या एआई से उत्पन्न मानवीय पूर्वाग्रह हो, हमें इन सभी समस्याओं का रचनात्मक समाधान करना होगा। उन्होंने कहा कि हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि हम ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ के साथ-साथ ‘इमोशनल इंटेलिजेंस’ को भी महत्व दें। हमें यह स्‍मरण रखना होगा कि एआई एक साध्य नहीं बल्कि एक साधन होना चाहिए जिसका उद्देश्य मानव जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमारे हर निर्णय से सबसे निचले पायदान पर बैठे व्यक्ति को भी लाभ मिलना चाहिए।

राष्ट्रपति को यह जानकर प्रसन्नता हुई कि आईआईआईटी लखनऊ को राष्ट्रीय महत्व के संस्थान का दर्जा दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह दर्जा इस संस्था की योग्‍यता, क्षमता और दक्षता का सूचक है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस दर्जे के साथ देश और समाज उनसे यह अपेक्षा भी करता है कि वे न केवल शिक्षा के क्षेत्र में ही उच्चतम मानकों पर खरे उतरेंगे बल्कि उत्कृष्टता के ऐसे आयाम भी स्थापित करेंगे जो अपने आप में ही मानक होंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि क्षेत्रीय भाषाओं में ज्ञान प्राप्त करने का विचार एक सकारात्मक कदम है। यह कदम भाषाई सीमाओं के कारण ज्ञानवर्धन के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करने के बारे में एक बड़ा कदम साबित होगा। उन्होंने कहा कि इन्क्यूबेशन सेंटर सी.आर.ई.ए.टी.ई की स्थापना. अनुसंधान एवं विकास को क्रियाशील एवं वास्‍तविक रूप देकर समाज के लिए सुलभ बनाने की दिशा में एक सराहनीय कदम है। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इसके अनुप्रयोगों पर केंद्रित पाठ्यक्रम छात्रों को नए तकनीकी परिदृश्य को नेविगेट करने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करता है। उन्हें यह जानकर प्रसन्‍नता हुई कि आईआईआईटी लखनऊ समाज और उद्योग के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने और समय के साथ-साथ उत्पन्न होने वाली मांगों के लिए छात्रों को तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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