शहरी नदियों के सतत पुनरुद्धार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने रिवर सिटी एलायंस (आरसीए) के लिए एक वार्षिक योजना को मंजूरी दी है, जिसमें पूरे साल चलने वाली पहलों के लिए एक रोडमैप तैयार किया गया है। इस योजना में क्षमता निर्माण कार्यक्रमों, ज्ञान आदान-प्रदान मंचों, तकनीकी उपकरणों के विकास, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और विषयगत केस स्टडी की एक श्रृंखला शामिल है, जो देश के शहरों में नदी-संवेदनशील शहरी नियोजन को एकीकृत करने पर केंद्रित है।
वर्ष 2021 में शुरू किया गया, रिवर सिटी एलायंस जल शक्ति मंत्रालय और आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय की एक अग्रणी पहल है। रिवर सिटी एलायंस 145 शहरों की वर्तमान सदस्यता के साथ, शहरी नदी प्रबंधन के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण को बढ़ावा देता है, संस्थागत क्षमता को मजबूत करता है, नदी घाटियों के भीतर इंटर सिटी सहयोग को बढ़ावा देता है और शहरी नदी प्रबंधन योजनाओं (यूआरएमपी) के निर्माण का समर्थन करता है। इस वर्ष की स्वीकृत योजना रणनीतिक हस्तक्षेपों के साथ योजनाओं के लक्ष्यों को क्रियान्वित करने के लिए तैयार की गई है।
इस वर्ष राज्यों में रिवर सेन्सिटिव मास्टर प्लानिंग (आरएसएमपी) प्रशिक्षण कार्यक्रमों के आयोजन के माध्यम से नदी संबंधी विचारों को बढ़ावा देने पर ध्यान केन्द्रित किया जाएगा। शहरी नदी प्रबंधन योजनाओं (यूआरएमपी) के निर्माण का समर्थन करने के लिए, एनएमसीजी तमिलनाडु में आरसीए शहरों के लिए विशेष रूप से ऑनबोर्डिंग कार्यक्रमों सहित प्रशिक्षण सत्र आयोजित करेगा, साथ ही अन्य राज्यों के लिए भी आगे के सत्रों की योजना बनाई गई है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन अफेयर्स (एनआईयूए) और राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन ने नदियों के शहरी प्रबंधन में पर्यावरणीय, आर्थिक और सामाजिक आयामों पर विचार करने के लिए वर्ष 2020 में अर्बन रिवर मास्टर प्लान की शुरुआत की थी। कानपुर, अयोध्या, छत्रपति संभाजी नगर, मुरादाबाद और बरेली ने अपने अर्बन रिवर मास्टर प्लान विकसित कर लिए हैं, जो अन्य शहरी केंद्रों के लिए मानक स्थापित कर रहे हैं। छत्रपति संभाजी नगर के खाम नदी पुनरुद्धार मिशन को विश्व संसाधन संस्थान के रॉस सेंटर पुरस्कार फॉर सिटीज द्वारा वैश्विक रूप से मान्यता दी गई थी, जो इस पहल की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित करता है।
आगामी वर्ष में 25 और अर्बन रिवर मास्टर प्लान का विकास किया जाएगा जो अगले दो से तीन वर्षों में पूरे देश में 60 ऐसी योजनाएं बनाने के लिए एक बड़े मिशन के पहले चरण का हिस्सा होगा। विश्व बैंक द्वारा समर्थित, यह पहल रिवर सेन्सिटिव शहरी शासन को मजबूत करने की दिशा में एक साहसिक कदम है। योजना निर्माण और कार्यान्वयन को मार्गदर्शन देने के लिए उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में संचालन समितियों का गठन किया जा चुका है।
माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप, एनएमसीजी राष्ट्रीय राजधानी के लिए यूआरएमपी के विकास की भी दिशा तय कर रहा है। इस पहल का उद्देश्य दिल्ली में नदियों को केवल जल स्रोत के रूप में नहीं बल्कि महत्वपूर्ण इकोसिस्टम के रूप में पुनर्परिभाषित करना है, जिससे राष्ट्रीय पर्यावरण प्राथमिकताओं के अनुरूप टिकाऊ और समावेशी शहरी नदी प्रबंधन का मार्ग प्रशस्त होगा। दिल्ली में यूआरएमपी अन्य महानगरों के लिए एक मॉडल के रूप में काम करेगा, जो लचीले और नदी-संवेदनशील शहरी विकास के दृष्टिकोण को बढ़ावा देगा।
एनएमसीजी नदी बेसिन से जुड़ी शहरी सोच को बढ़ावा देने के प्रयास में बेसिन, जिला और शहर-स्तरीय नदी प्रबंधन योजनाओं के बीच प्रभावी समन्वय के लिए परामर्श जारी करेगा। इसके पूरक के रूप में, सदस्य शहरों के लिए ज्ञान अंतराल की पहचान करने के लिए एक फीडबैक तंत्र के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के ज्ञान आधारित उत्पाद विकसित किए जाएंगे। विषयगत विशेषज्ञ समूहों के गठन के माध्यम से तकनीकी सहायता को मजबूत किया जाएगा, जो पर्यावरण के अनुकूल रिवरफ्रंट विकास पहलों का मार्गदर्शन भी करेंगे।
ज्ञान के आदान-प्रदान को सुगम बनाने और सर्वोत्तम विधियों को बढ़ावा देने के लिए, बेसिन-स्तरीय आरसीए बैठक डीएचएआरए और उदयपुर तथा हैदराबाद के दौरे शामिल हैं। रिवर सेन्सिटिव अर्बन प्लानिंग में शासन क्षमता को बढ़ाना एक और प्राथमिकता है, जिसके अंतर्गत सदस्य शहरों के शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) में औपचारिक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।
इसके अतिरिक्त, आरसीए हर सोमवार को साप्ताहिक अध्ययन के माध्यम से सफल ऑन-ग्राउंड विधियों का दस्तावेजीकरण करने पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिसमें शहरी नदी पुनरुद्धार प्रयासों को प्रदर्शित किया जाएगा। नागरिकों के बीच नदी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जन जागरूकता अभियान और संवेदनशीलता कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे। नदी से संबंधित परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाने में शहरों का समर्थन करने के लिए वित्तीय सलाहकार सेवाएं प्रदान की जाएंगी। इसके अलावा, राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) शहरी नदी प्रबंधन पर प्रदर्शन और सुधारों का मार्गदर्शन करने के लिए यूआरएमपी ढांचे के माध्यम से सदस्य शहरों को मानक प्रदान करेगा।
पहले से ही पूरी हो चुकी पहलों के अतिरिक्त एक नई, व्यापक आरसीए वेबसाइट का विकास और फरवरी 2025 में दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक फोरम में भाग लेना बढ़ती राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी को दर्शाता है।
आरसीए के अंतर्गत वर्ष 2025 की योजना को एनएमसीजी द्वारा मंजूरी देना पूरे देश में रिवर सेन्सिटिव अर्बन प्लानिंग को संस्थागत बनाने में एक महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है। क्षमता निर्माण कार्यक्रमों, तकनीकी हस्तक्षेपों, सहयोगी मंचों तथा शहर-स्तरीय सहायता प्रणालियों के एक मजबूत कैलेंडर के साथ, आने वाला वर्ष परिवर्तन का आश्वासन है। ये प्रयास न केवल देश की शहरी नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं, बल्कि देश भर में लचीले, समावेशी और जल-सुरक्षित शहरी इकोसिस्टम की नींव को भी मजबूत करते हैं।
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