केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने आज नई दिल्ली में विश्व सतत विकास शिखर सम्मेलन में गुयाना के उपराष्ट्रपति डॉ. भरत जगदेव तथा जलवायु परिवर्तन से संबंधित विशेष दूत एवं कॉप28 के अध्यक्ष डॉ. सुल्तान अल जाबेर की उपस्थिति में “राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण और संचालन के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन से किए गए बचाव के आकलन” से संबंधित रिपोर्ट जारी की। यह अध्ययन कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन की उस सीमा का आकलन करता है जिससे राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के दौरान प्रति किलोमीटर के आधार पर बचा जा सकता है।
भारत में दुनिया का दूसरा सबसे लंबा सड़क नेटवर्क है। विभिन्न प्रकार की सड़कों में से, अब तक 1,44,634 किलोमीटर की लंबाई वाले राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) ने भारत के तीव्र आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वर्ष 2014 से लेकर जनवरी 2023 के बीच, राजमार्गों की मौजूदा लंबाई का आधे से अधिक हिस्सा (~77,265 किलोमीटर) जोड़ा गया है। राजमार्गों के निर्माण की यह तीव्र गति दूर-दराज के कस्बों और गांवों की स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं को राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत करने में सक्षम है। सड़कों के निर्माण और रखरखाव को कार्बन डाइऑक्साइड का एक स्रोत माना जाता है, जोकि सड़कों पर ईंधन से चलने वाले वाहनों से उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड के अतिरिक्त होता है। वर्ष 2016 में, भारत में जीवाश्म ईंधन से चलने वाले वाहनों के परिचालन से लगभग 243 मिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जित हुई, जोकि कुल राष्ट्रीय कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन का 10.8 प्रतिशत है।
हालांकि, भीड़भाड़ वाले और अक्सर घुमावदार मार्गों की जगह नए एवं उन्नत अत्याधुनिक राजमार्ग, उन पर चलने वाले वाहनों में ईंधन की दहन प्रक्रिया को कम करके कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन से बचने में मदद कर सकते हैं। एवेन्यू वृक्षारोपण तथा प्रतिपूरक वनीकरण (सीए) अतिरिक्त रूप से कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को पृथक कर सकता है और इस प्रकार संपूर्ण राजमार्ग संचालन से उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा में कमी लाने में मदद कर सकता है। यह सारांश रिपोर्ट कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन की उस सीमा का आकलन करने की एक पद्धति प्रस्तुत करती है जिससे राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के दौरान प्रति किलोमीटर के आधार पर बचा जा सकता है। इसके अलावा, इसमें राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण पूर्व और वास्तविक संचालन एवं रखरखाव से संबंधित डेटा को निर्मित राष्ट्रीय राजमार्गों के प्रति किलोमीटर आधार पर कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन से बचाव की मात्रा को निर्धारित करने के लिए लागू किया गया है।
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