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राष्ट्रीय जल मिशन ने जल उपयोग दक्षता में सुधार के लिए इंडियन प्लंबिंग एसोसिएशन के साथ समझौता किया

जल संचयन संरचनाओं, कम प्रवाह वाले फिक्स्चर और सेनेटरी वेयर, ग्रे एवं ब्लैक वॉटर ट्रीटमेंट तथा निर्मित संरचानाओं के जल ऑडिट के प्रति जागरूकता बढ़ाने और बारिश को बढ़ावा देकर वॉटर पॉजिटिव इंडिया के लिए जल उपयोग दक्षता ब्यूरो (बीडब्ल्यूयूई), राष्ट्रीय जल मिशन (एनडब्ल्यूएम), जल शक्ति मंत्रालय और भारतीय पाइपलाइन एसोसिएशन (आईपीए) के बीच आज एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। समझौता ज्ञापन पर राष्ट्रीय जल मिशन, जल शक्ति मंत्रालय की ओर से अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक अर्चना वर्मा और ओखला, नई दिल्ली स्थित भारतीय पाइपलाइन एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरमीत सिंह अरोड़ा ने हस्ताक्षर किए।

इस अवसर पर बोलते हुए, अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक, राष्ट्रीय जल मिशन, अर्चना वर्मा ने कहा कि आज जल उपयोग दक्षता ब्यूरो के लिए ऐतिहासिक दिन है क्योंकि आईपीए सक्रिय रूप से ऐसे फिक्स्चर को बढ़ावा दे रहा है जो पानी के प्रति संवेदनशील हैं और कम पानी की खपत करते हैं और समझौता ज्ञापन जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के अपने उद्देश्य को बढ़ावा देने में मदद करेगा।

इंडियन प्लंबिंग एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरमीत अरोड़ा ने कहा कि उनका संगठन घरेलू क्षेत्र में जल उपयोग दक्षता को 50-60 प्रतिशत तक बढ़ाने (पानी के उपयोग को 135 एलपीसीडी से घटाकर 60 एलपीसीडी) करने के लिए पूरा सहयोग देगा। उन्होंने नेट ज़ीरो वॉटर बिल्डिंग के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए निर्मित वातावरण (आवासीय भवन, होटल आदि) के लिए जल ऑडिट पर भी जोर दिया।

राष्ट्रीय जल मिशन के लक्ष्य-4 में जल उपयोग दक्षता को 20 प्रतिशत तक बढ़ाने की परिकल्पना की गई है। जल शक्ति मंत्रालय के राष्ट्रीय जल मिशन के लक्ष्य-4 को पूरा करने की दिशा में एमओयू पर हस्ताक्षर एक महत्वपूर्ण कदम है। एमओयू के प्रावधान 24 अध्यायों (विभिन्न शहरों में) और देश भर में फैले भारतीय प्लंबिंग एसोसिएशन के 6500 से अधिक सदस्यों के माध्यम से जल शक्ति मंत्रालय के राष्ट्रीय जल मिशन के उद्देश्य के कार्यान्वयन और प्रचार की ओर उन्मुख हैं। एमओयू के अनुसार, एनडब्ल्यूएम और आईपीए सार्वजनिक शिक्षा, जागरूकता और आउटरीच कार्यक्रम और जल प्रबंधन प्रदान करने और बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करेंगे।

निर्मित संरचनाओं में ग्रे-वॉटर इस्तेमाल ( 5-आर: रेड्यूज, रीसाइक्ल, रीयूज, रीप्लेनिश और रिस्पेक्ट) समेत सर्कुलर इकॉनमी पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। एमओयू में आगे परिकल्पना की गई है कि एनडब्ल्यूएम और आईपीए वर्षा जल संचयन और पानी के स्त्रोतों के पुनर्भरण के प्रति जागरूकता पैदा करने और बढ़ावा देने के लिए मिलकर काम करेंगे। इसके अलावा, एनडब्ल्यूएम और आईपीए मुख्य रूप से शहरी परिदृश्य में उपयोग किए गए पानी के पुनरुद्धार को बढ़ावा देने के लिए भी मिलकर काम करेंगे।

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