राज्यसभा सदस्यों ने 1931 में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले महान स्वाधीनता सेनानी सरदार भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को आज भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
सदन की बैठक शुरू होने पर सभापति एम. वेंकैया नायडू ने कहा कि इन तीनों बलिदानियों ने अत्यंत शौर्य, अदम्य साहस और मातृभूमि के प्रति अटूट देशभक्ति का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि सिर्फ बीस वर्ष की आसपास की उम्र के इन स्वाधीनता सेनानियों ने क्रूर औपनिवेशिक शासन के खिलाफ कड़ा संघर्ष करते हुए अपना जीवन बलिदान किया।
सभापति नायडू ने कहा कि इन सेनानियों ने न केवल देश को उपनिवेशवाद से मुक्ति दिलाने के लिए संघर्ष किया, बल्कि एक ऐसे आदर्श समाज की भी कल्पना की जो सम्प्रदायवाद, घृणा, आर्थिक असमानता और पिछड़े विचारों से मुक्त हों। उपराष्ट्रपति ने कहा कि इन शहीदों की बहादुरी और देशभक्ति की कहानी ने अनेक लोगों को प्रेरित किया है और आने वाली पीढियों को भी प्रेरित करती रहेगी। उन्होंने कहा कि आजादी का अमृत महोत्सव स्वाधीनता सेनानियों को श्रद्धांजलि देने और उनके प्रति कृतज्ञता प्रकट करने की दिशा में प्रशंसनीय कदम है। सभापति नायडू ने सदस्यों से कहा कि वे स्वाधीनता सेनानियों के अमूल्य योगदान की जानकारी लोगों को देकर सहयोग, एकता और भाईचारे की विरासत को आगे बढाएं। राज्यसभा के सदस्यों ने इन शूरवीर शहीदों के सम्मान में मौन रखा।
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