केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि रसायन और पेट्रो-रसायन उद्योग भारत की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इनकी भविष्य में भी विकास के प्रमुख संचालक बने रहने की उम्मीद है। तीसरा वैश्विक रसायन पेट्रो-रसायन विनिर्माण हब (GCPMH 2023) शिखर सम्मेलन नई दिल्ली में आयोजित किया गया है। इस सम्मेलन में ‘एफटीए – दुनिया को एक सूत्र में जोड़ना – वसुधैव कुटुंबकम – एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने भारत की अर्थव्यवस्था, नवाचार इकोसिस्टम और रोजगार सृजन के क्षेत्र में रसायन और पेट्रो-रसायन उद्योग के योगदान की सराहना की।
मंत्री ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) निर्यात बढ़ाने और सामूहिक रूप से कई क्षेत्रों के विकास को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि जीसीपीएमएच 2023 शिखर सम्मेलन उन तौर-तरीकों का पता लगाने के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है जिनके माध्यम से एफटीए रसायन और पेट्रो-रसायन उद्योग में व्यापार, निवेश और सहयोग की सुविधा प्रदान कर सकते हैं।
पीयूष गोयल ने उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों को एक मंच प्रदान करने के लिए जीसीपीएमएच 2023 की सराहना की ताकि इस महत्वपूर्ण क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और स्थायित्व बढ़ाने के लिए एफटीए के लाभों पर चर्चा और विचारों का आदान-प्रदान हो सके। उन्होंने कहा कि एफटीए भारत के रसायन और पेट्रो-रसायन उद्योगों में विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद कर सकते हैं। मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि इससे रोजगार के नए अवसरों का सृजन होगा और नई अवसंरचना के विकास से उद्योग जगत की दुनिया से जुड़ने की क्षमता और मजबूत होगी।
पीयूष गोयल ने विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में हमारे लक्ष्य में सतत विकास के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी बताया कि भावी पीढ़ी के लिए सतत भारत का निर्माण वर्तमान पीढ़ी के लिए कितना महत्वपूर्ण है। मंत्री ने स्थायी तौर-तरीकों को बढ़ावा देने और स्थायी समाधान खोजने की प्रतिबद्धता के लिए सभी हितधारकों के प्रयासों और समर्पण की सराहना की।
उन्होंने कहा कि सर्वोत्तम तौर-तरीकों को साझा करना और आपसी सहयोग को बढ़ावा देना निश्चित रूप से रासायनिक और पेट्रो-रसायन उद्योगों के लिए सतत और समृद्ध भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगा। पीयूष गोयल ने वर्तमान पीढ़ी से आने वाली पीढ़ियों के प्रति कर्तव्य की भावना और प्रतिबद्धता के साथ काम करने का आग्रह किया। उन्होंने महात्मा गांधी को उद्धृत करते हुए कहा, “हम सभी को पृथ्वी विरासत में मिली है और हम अगली पीढ़ी के लिए केवल ट्रस्टी हैं।”
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