भारी उद्योग मंत्रालय को भारत में इलेक्ट्रिक यात्री कारों के विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजना (एसपीएमईपीसीआई) के अंतर्गत आवेदन प्रक्रिया के पोर्टल शुरू करने की घोषणा करते हुए खुशी हो रही है।
इस योजना को 15 मार्च 2024 की अधिसूचना से अधिसूचित किया गया था और विस्तृत योजना दिशानिर्देश बाद में अधिसूचना संख्या एस.ओ. 2450 (ई) दिनांक 02.06.2025 को जारी किए गए थे। अधिसूचना और दिशा-निर्देश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट: https://heavyindustries.gov.in/scheme-promote-manufacturing-electric-passenger-cars-india-0 पर उपलब्ध हैं।
इस संदर्भ में योजना के अंतर्गत पात्र आवेदकों से आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं और आवेदक spmepci.heavyindustries.gov.in पर आवेदन मॉड्यूल के माध्यम से आवेदन कर सकते हैं। आवेदन पोर्टल 24 जून 2025 को सुबह 10.30 बजे से आवेदनों के लिए खुलेगा और 21 अक्टूबर 2025 को शाम 6:00 बजे तक खुला रहेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) पर विशेष ध्यान देने के साथ यात्री कारों के घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए एक दूरदर्शी योजना को मंजूरी दी है। इसे भारत को ऑटोमोटिव विनिर्माण और नवाचार के लिए एक प्रमुख वैश्विक गंतव्य के रूप में मजबूती से स्थापित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने पोर्टल के शुभारंभ के दौरान कहा की “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में यह पहल स्वच्छ, आत्मनिर्भर और भविष्य के लिए तैयार गतिशीलता की दिशा में भारत की यात्रा में एक निर्णायक क्षण है। एसपीएमईपीसीआई योजना के अंतर्गत इस पोर्टल को शुरू करने से वैश्विक इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं के लिए भारत के तेजी से विकसित हो रहे ऑटोमोटिव परिदृश्य में निवेश करने के नए रास्ते खुलेंगे। यह योजना न केवल 2070 तक नेट जीरो हासिल करने की हमारी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता का समर्थन करती है, बल्कि एक स्थायी, नवाचार-संचालित अर्थव्यवस्था बनाने के हमारे संकल्प को भी मजबूत करती है। यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के स्तंभों को मजबूत करती है और भारत को अगली पीढ़ी के ऑटोमोटिव विनिर्माण और प्रौद्योगिकी नेतृत्व के लिए एक विश्वसनीय वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करती है।”
यह योजना वैश्विक ईवी निर्माताओं से निवेश आकर्षित करने और भारत को ई-वाहनों के विनिर्माण गंतव्य के रूप में बढ़ावा देने में मदद करेगी। यह योजना भारत को ईवी के विनिर्माण के लिए वैश्विक मानचित्र पर लाने, रोजगार सृजित करने और “मेक इन इंडिया” के लक्ष्य को प्राप्त करने में भी मदद करेगी।
वैश्विक निर्माताओं को इस योजना के अंतर्गत निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए स्वीकृत आवेदकों को आवेदन स्वीकृति तिथि से 5 वर्ष की अवधि के लिए 15 प्रतिशत की कम सीमा शुल्क पर न्यूनतम 35,000 अमेरिकी डॉलर के सीआईएफ मूल्य के साथ ई-4डब्ल्यू की पूरी तरह से निर्मित इकाइयों (सीबीयू) का आयात करने की अनुमति दी जाएगी।
अनुमोदित आवेदकों को योजना के प्रावधानों के अनुरूप न्यूनतम 4,150 करोड़ रुपये का निवेश करना होगा।
यह योजना भारत को इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए रणनीतिक रूप से तैयार की गई है। 4,150 करोड़ रुपये की न्यूनतम निवेश सीमा के साथ, यह देश में दीर्घकालिक विनिर्माण स्थापित करने के लिए अग्रणी वैश्विक और घरेलू खिलाड़ियों के लिए एक सक्षम नीति वातावरण प्रदान करता है। कैलिब्रेटेड कस्टम ड्यूटी रियायतों और स्पष्ट रूप से परिभाषित घरेलू मूल्य संवर्धन (डीवीए) के माध्यम से यह योजना अत्याधुनिक ईवी प्रौद्योगिकियों को पेश करने और स्वदेशी क्षमताओं को पोषित करने के बीच संतुलन बनाती है।
घरेलू मूल्य संवर्धन लक्ष्यों को अनिवार्य करके, यह योजना ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहलों को और बढ़ावा देगी, साथ ही वैश्विक और घरेलू दोनों कंपनियों को भारत की हरित गतिशीलता क्रांति में सक्रिय भागीदार बनने के लिए सशक्त बनाएगी।
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