अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान (एआईआईए) ने आज अपना छठवां स्थापना दिवस मनाया। इस महत्वपूर्ण अवसर का मुख्य आकर्षण केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल द्वारा नए नामित “वैद्य बृहस्पति देव त्रिगुणा सभागार” में स्वर्गीय पद्म विभूषण वैद्य बृहस्पति देव त्रिगुणा की प्रतिमा का अनावरण था।
वैद्य बृहस्पति देव त्रिगुणा आयुर्वेद के संसार में एक महान व्यक्ति थे। आयुर्वेद द्वारा रोगोपचार और प्रचार के लिए उन्होंने अपना जीवन समर्पित कर दिया था। इसके लिए उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक प्रतिष्ठित पद्म विभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि भारत को समग्र स्वास्थ्य देखभाल दृष्टिकोण के साथ वैश्विक नेतृत्व अपने हाथ में लेने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के निवेशक आयुष क्षेत्र में निवेश करने के लिए उत्साहित हैं और हमें उस अवसर का लाभ उठाने के लिए काम करना चाहिए।
सर्बानंद सोनोवाल ने बताया कि आवासन और शहरी विकास मंत्रालय ने अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान के विस्तार के लिए 12 एकड़ भूमि आबंटित की है। यह समर्थन एआईआईए द्वारा समग्र स्वास्थ्य देखभाल के लिए सेवाओं को उन्नत बनाने के लिए किए गए प्रयासों को प्रोत्साहित करेगा।
इस अवसर पर, एआईआईए और हिंदुस्तान सॉल्ट, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट जैसे विभिन्न प्रसिद्ध संस्थानों के बीच छह समझौता-ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए। संस्थान को उन्नत अनुसंधान के लिए एक नई मॉलिक्यूलर बायोलॉजी प्रयोगशाला, पांडुलिपि इकाई और उत्कृष्टता लक्ष्य केंद्र प्राप्त हुआ है। यह एआईआईए की अनुसंधान प्रगति में सफलता का एक नया मार्ग प्रशस्त करेगा।
आयुष राज्य मंत्री मुंजपारा महेंद्रभाई कालूभाई ने कहा कि पिछले छह वर्षों में अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान उत्कृष्टता, नवाचार और हमारी पुरानी परंपराओं और आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल की मांगों के बीच एक सेतु के रूप में विकसित हुआ है। इसने लगातार आयुर्वेदिक अनुसंधान, शिक्षण और अभ्यास की सीमाओं को आगे बढ़ाया है। इसी संदर्भ में संस्थान द्वारा मोलेक्यूलर बायोलॉजी प्रयोगशाला और कौशल प्रयोगशालाओं के रूप में नए विस्तार किए गए हैं।
इस अवसर पर एआईआईए की निदेशक प्रोफेसर तनुजा नेसारी ने कहा कि हम सभी ने मिलकर इस संस्थान का निर्माण किया है और हमें अपनी अब तक की यात्रा पर बेहद गर्व है। उन्होंने कहा, “छठवां स्थापना दिवस मनाना आधुनिक अनुसंधान और नवाचारों को अपनाते हुए चिकित्सा के पारंपरिक विज्ञान को संरक्षित करने और बढ़ावा देने में हमारी प्रतिबद्धताओं का प्रतीक है।”
एआईआईए की स्थापना 17 अक्टूबर, 2017 को प्राचीन भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद के ज्ञान और अभ्यास के प्रचार और उन्नति के लिए की गई थी। पिछले छह वर्षों में, संस्थान ने इस क्षेत्र में शानदार प्रगति की है। वह न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर आयुर्वेदिक शिक्षा और अनुसंधान के लिए एक केंद्र बन गया है।
हाल ही में, संस्थान को एनएएसी द्वारा ए++ ग्रेड वाली मान्यता प्राप्त है। यह इस दर्जे को प्राप्त करने वाला आयुष मंत्रालय के अधीन पहला संस्थान है। इस अवसर पर सर्बानंद सोनोवाल ने संस्थान की निदेशक प्रोफेसर (डॉ) तनुजा नेसारी को एनएएसी का ए++ प्रमाण पत्र सौंपा। संस्थान ने हिंदुस्तान साल्ट्स लिमिटेड, राष्ट्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण संस्थान और अन्य विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ छह समझौता-ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर कोविड डायरी सहित विभिन्न तकनीकी दस्तावेज जारी किए गए।
हार्टफुलनेस इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष, जिन्हें स्नेह से दाजी कहा जाता है, उन्होंने वर्चुअल माध्यम से मुख्य वक्तव्य दिया, जिसमें उन्होंने आयुर्वेद के क्षेत्र में ध्यान के महत्व और इसकी प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने हैदराबाद के कान्हा शांतिवनम में एआईआईए के साथ आयुर्वेद केंद्र खोलने की इच्छा व्यक्त की।
इस अवसर पर, एआईआईए ने कार्य संस्कृति में नए आयाम लाने और व्यवस्थित प्रमाण सृजित करने की दृष्टि से छह संस्थानों के साथ समझौता-ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। एआईआईए ने इस अवसर पर दो वरिष्ठतम शिक्षकों को भी सम्मानित किया।
राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के प्रबंध मंडल के अध्यक्ष पद्म भूषण वैद्य देवेंद्र त्रिगुणा, आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा और आयुष मंत्रालय के संयुक्त सचिव बीके सिंह इस कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि थे।
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