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भारत की उर्वरक कंपनियों ने पोटाश आपूर्ति के लिए कनाडा की कैनपोटेक्स के साथ समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये

नई दिल्ली: किसानों को लंबे समय तक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्‍वपूर्ण कदम उठाते हुये, भारत की उर्वरक कंपनियों –कोरोमंडल इंटरनेशनल, चम्बल फर्टीलाइजर और इंडियन पोटाश लिमिटेड– ने कनाडा की कैनपोटेक्स के साथ एक समझौता-ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये हैं। यह समझौता-ज्ञापन आज रसायन और उर्वरक मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया को प्रस्तुत किया गया। कनाडा के कैनपोटेक्स को दुनिया भर में पोटाश की आपूर्ति करने वाली सबसे बड़ी कंपनियों में गिना जाता है। यह कंपनी हर वर्ष लगभग 130 एलएमटी पोटाश का निर्यात करती है।

रसायन और उर्वरक मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने भारतीय किसानों को एमओपी (म्यूरियेट ऑफ पोटाश) की आपूर्ति करने के लिये कंपनियों के बीच दीर्घकालिक समझौते पर हस्ताक्षर करने के कदम का स्वागत किया। इसे अभूतपूर्व कदम बताते हुये डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा, “समझौता-ज्ञापन से आपूर्ति और कीमत के उतार-चढ़ाव में कमी आयेगी तथा भारत को पोटाशयुक्त उर्वरक की लंबे समय तक निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी। भारत सरकार संसाधन समृद्ध देशों के साथ दीर्घकालिक साझेदारियों के जरिये आपूर्ति श्रृंखला स्थापित करने के लिये स्वदेशी उर्वरक कंपनियों को प्रोत्साहित करती रही है। कच्चे माल और उर्वरक खनिजों के लिये आयात पर भारत की निर्भरता को देखते हुये, ये साझेदारियां समय बीतने के साथ उर्वरकों तथा कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित कर देंगी। इसके अलावा बाजार के उतार-चढ़ाव वाले माहौल में कीमतों को स्थिर रखेंगी।”

डॉ. मांडविया ने कहा, “समझौता-ज्ञापन के तहत कनाडा की कंपनी कैनपोटेक्स भारतीय उर्वरक कंपनियों को तीन वर्षों की अवधि के लिये हर वर्ष 15 एलएमटी तक के पोटाश की आपूर्ति करेगी। आशा की जाती है कि इस आपूर्ति-साझेदारी से देश में उर्वरक की उपलब्धता में सुधार आयेगा और आपूर्ति व कीमत के उतार-चढ़ाव को कम किया जा सकेगा।”

आने वाले फसली मौसम के मद्देनजर समझौता-ज्ञापन के महत्‍व को रेखांकित करते हुये डॉ. मां‍डविया ने कहा, “समझौता-ज्ञापन किसान समुदाय के कुशलक्षेम का पालन करेगा और देश में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में योगदान करेगा।” उन्होंने कहा कि यह समझौता-ज्ञापन “दोनों देशों के बीच आपसी रिश्तों को मजबूत करने और द्विपक्षीय सम्बंधों को आगे बढ़ाने का” काम करेगा।

डॉ. मां‍डविया ने कहा कि भारत सरकार रूस, इजराइल और अन्य देशों के साथ पोटाश तथा अन्य उर्वरकों के लिये दीर्घकालीन समझौता-ज्ञापनों पर काम कर रही है। आयात पर निर्भरता कम करने के इरादे से, उर्वरक विभाग ने पीडीएम (शीरे से निकाले जाने वाला पोटाश) को पोषक तत्‍व आधारित सब्सिडी योजना (एनबीएस) में शामिल किया है, ताकि पोटाश के स्वदेशी स्रोतों को समर्थन दिया जा सके। इसी तरह अल्कोहल उत्पादन के दौरान बचने वाले तरल अवशिष्ट (स्पेन्ट वॉश) से पोटाश निकालने के लिये उर्वरक उद्योगों के लिये भी समान पहलें की गई हैं।

पोटाश, पोटेशियम का स्रोत है और उसे एमओपी के रूप में सीधा उपयोग किया जाता है। इसके अलावा एनपीके उर्वरकों में भी इसका ‘एन’ और ‘पी’ पोषक तत्‍वों के संयोजन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। भारत अपनी पोटाश की शत-प्रतिशत आवश्यकता आयातों से पूरा करता है। देश हर वर्ष लगभग 40 एलएमटी, एमओपी का आयात करता है।

कैनपोटेक्स उर्वरक क्षेत्र के मोजैक और न्यूट्रियन जैसे दिग्गजों के बीच एक संयुक्त उपक्रम है। यह कनाडा के ससकैचवन क्षेत्र में उत्पादित पोटाश का विपणन करता है। इसे दुनिया में पोटाश की आपूर्ति करने वाले सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में गिना जाता है। यह 40 से अधिक देशों को लगभग 130 एलएमटी हर वर्ष निर्यात करता है। यह भारत को भी आपूर्ति करने वाली कंपनियों में शामिल है।

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