भारत ने संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क को बताया है कि भारत ने वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान जलवायु अनुकूलन पर अपने सकल घरेलू उत्पाद का साढ़े पांच प्रतिशत से अधिक अर्थात लगभग 13 लाख 35 करोड़ रूपये खर्च किये हैं। भारत ने यह जानकारी भी दी है कि इस प्रयोजन से अगले सात वर्षों में लगभग 57 लाख करोड़ रूपये खर्च किये जायेंगे ताकि जलवायु परिवर्तन की स्थिति को और अधिक प्रतिकूल होने से रोका जा सके।
जलवायु अनुकूलन प्रयास, जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए किये जाते हैं। इसका उद्देश्य ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाना है। इसके लिए किये जा रहे प्रयासों में समुद्र के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए दीवाल खड़ी करना, तापमान से अप्रभावित रहने वाली फसलें विकसित करना, तापमान को नियंत्रित करने की योजना बनाना और आपदाओं से मुकाबला कर सकने वाले बुनियादी ढांचे तैयार करना शामिल हैं।
वैश्विक जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क के अंतर्गत हर देश अपने यहां हो रहे ग्रीन गैस उत्सर्जन का वार्षिक आकलन कर संयुक्त राष्ट्र को जानकारी उपलब्ध कराता है। कल इसी क्रम में भारत ने क्योटो-प्रोटोकोल के तहत अपनी रिपोर्ट सौंपी।
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