भारतीय सेना ने गुजरात में गांधीनगर के भास्कराचार्य राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुप्रयोग और भू-सूचना संस्थान (बीआईएसएजी-एन) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता ज्ञापन भौगोलिक सूचना प्रणाली- जीआईएस और सूचना प्रौद्योगिकी- आईटी आधारित उद्यम संसाधन योजना सॉफ्टवेयर, प्रशिक्षण सामग्री, ऑडियो-विजुअल सामग्री का प्रसारण, अनुसंधान एवं ज्ञान भागीदारी, तकनीकी सहायता में विकास तथा एक समग्र साझेदारी के तहत विकसित संसाधनों के उन्नयन के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में ज्ञान और सहयोग के आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान करेगा। यह उन परियोजनाओं के लिए सहायक है, जिन्हें समग्र भागीदारी के अंतर्गत सेना प्रबंधन अध्ययन बोर्ड (एएमएसबी) की पूर्व स्वीकृति प्राप्त है या जो स्थितियों व मामलों के आधार पर अनुमोदित हैं। यह समझौता ज्ञापन भारतीय सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमताओं में वृद्धि करने के लिए प्रशिक्षण में सहायता पहुंचाने और अभिनव समाधान विकसित करने हेतु बीआईएसएजी-एन के सापेक्ष अनुकूल परिस्थिति में अवसरों का लाभ उठाने में मदद करेगा।
बीआईएसएजी-एन भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत कार्यरत एक स्वायत्त वैज्ञानिक संस्था है, जो उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में ज्ञान के आदान-प्रदान और सहयोग के माध्यम के रूप में कार्य करेगा।
थल सेना प्रमुख- सीओएएस जनरल एमएम नरवणे ने वर्चुअल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करना भारतीय सेना की शिक्षाविदों के साथ संपर्क बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। सेना प्रमुख ने कहा कि ‘आत्मनिर्भरता’ हमारे विरोधियों से तकनीकी क्षेत्र में आगे बने रहने की कुंजी है, जिसके लिए बीआईएसएजी-एन के साथ मानचित्र को पढ़ने व समझने, सूचना प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण और भू-स्थानिक सूचना प्रणाली के लिए लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम परियोजनाएं उत्कृष्ट शुरुआत हैं, जिसमें संयुक्त सहयोग पहले से ही एक आशाजनक शुरुआत को दिखा रहा है।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता सेना प्रशिक्षण कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल राज शुक्ला ने की। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह शिक्षा जगत और भारतीय सेना के बीच संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने ‘नागरिक-सैन्य संबंधों’ पर विशेष जोर दिया तथा आपसी सहयोग से संबंधित बहुआयामी पहलुओं की व्याख्या की। ये समझौता ज्ञापन देश की रक्षा एवं क्षमता वृद्धि को मजबूत करने के क्षेत्र में शिक्षाविदों को उन्मुख करने के लिए उत्प्रेरक तथा प्रवर्तक के रूप में कार्य करेंगे।
बीआईएसएजी-एन के महानिदेशक टी.पी. सिंह ने इस बात का जिक्र किया कि इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने से बीआईएसएजी-एन भौगोलिक सूचना प्रणाली- जीआईएस और सूचना प्रौद्योगिकी- आईटी आधारित सॉफ्टवेयर के विकास के लिए उभरती प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में ज्ञान के आदान-प्रदान तथा सहयोग के माध्यम के रूप में कार्य करेगा। जिसमें प्रशिक्षण सामग्री, श्रव्य-दृश्य प्रशिक्षण सामग्री का प्रसारण, सूचना प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में भारतीय सेना द्वारा आवश्यक विशिष्ट परियोजनाओं का विकास करना शामिल है। कार्यक्रम के दौरान बीआईएसएजी-एन ने एआरटीआरएसी और उससे संबद्ध संस्थानों के लिए विकसित लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) को समर्पित किया।
यह ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन भारतीय सेना और बीआईएसएजी-एन के बीच प्रशिक्षण, अनुसंधान एवं क्षमता विकास से संबंधित कार्यक्रमों की रणनीति बनाने तथा उन्हें लागू करने की दिशा में संस्थागत सहयोग को सुगम व मजबूत करेगा।
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