नीति आयोग और विश्व संसाधन संस्थान (डब्ल्यूआरआई), भारत ने जीआईजेड इंडिया, के सहयोग से एनडीसी-ट्रांसपोर्ट इनिशिएटिव फॉर एशिया (एनडीसी-टीआईए) परियोजना के हिस्से के रूप में ‘परिवहन को कार्बन मुक्त करने के लिए वित्तपोषण’ पर एक वर्चुअल परामर्श कार्यशाला का आयोजन किया।
भारत सरकार सतत गतिशीलता को अपनाने पर विशेष ध्यान देते हुए परिवहन को कार्बन मुक्त करने की दिशा में सक्रिय रूप से काम कर रही है।
इस कार्यशाला का उद्देश्य कार्य करने योग्य रणनीतियों की पहचान करना और परिवहन को कार्बन मुक्त करने के लिए नवाचारी वित्तपोषण नीतियों को मजबूत बनाने के लिए सामूहिक रूप से काम करने के लिए वित्तीय संस्थानों और परिवहन संगठनों को एक मंच पर लाना है।
इस कार्यशाला में विभिन्न मंत्रालयों के गणमान्य व्यक्तियों, एनडीसी-टीआईए परियोजना भागीदारों, भारतीय बैंकों, अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और निजी क्षेत्र की कंपनियों के प्रतिनिधियों, परिवहन और वित्तपोषण क्षेत्रों के हितधारकों और विशेषज्ञों ने भाग लिया।
नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने मुख्य भाषण और जर्मनी के आर्थिक और वैश्विक मामलों के विभाग के प्रमुख और मंत्री डॉ. स्टीफन कोच ने विशेष संबोधन दिया।
अपने मुख्य भाषण में, नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने कहा कि हमें भारत में स्वच्छ गतिशीलता को और प्रोत्साहित करने के लिए अधिक वित्तीय साधनों की आवश्यकता है क्योंकि हमें राज्यों, घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों, निर्माताओं और ऑपरेटरों को एक ही मंच पर लाना है। हमें ऐसे वित्तपोषण के साथ आगे आना चाहिए जो व्यापक रूप से लागू हों, स्वीकार्य हों और मुख्य रूप से टिकाऊ हों। हमें निजी क्षेत्र के निवेश का लाभ और ई-बसों के लिए, जो हमारे शहरों में सार्वजनिक परिवहन का मूल है, वित्तपोषण को जुटाकर साझा गतिशीलता को बढ़ावा देना चाहिए। हमारा व्यापक उद्देश्य अपने नागरिकों की जरूरतों और आकांक्षाओं को संतुलित करने, कनेक्टिविटी सुधार कर जीवन यापन और उत्पादकता को बेहतर बनाने, लॉजिस्टिक लागत को कम करने और एक ऐसे दृष्टिकोण को अपनाकर स्वच्छ गतिशीलता में तेजी लानी चाहिए जो न केवल पर्यावरण की दृष्टिकोण से, बल्कि जलवायु-केन्द्रित और टिकाऊ भी हो और वित्तीय दृष्टिकोण से भी उपयुक्त हो। हरित वित्तपोषण हमें विद्युत वाहनों के लिए कम ब्याज लागत वाले वित्तपोषण में भी सक्षम बनाएगा।
डॉ. स्टीफन कोच ने कहा कि भारत को परिवहन के विद्युतीकरण के लिए एक मजबूत रोडमैप की आवश्यकता है। बहु-हितधारक सहयोग के माध्यम से पूंजी को जुटाना संभव है। एनडीसी-टीआईए पहल ‘‘परिवहन को कार्बन मुक्त बनाने के वित्तपोषण’’ सहित विभिन्न विषयों पर सहकर्मी से सहकर्मी के सीखने और सूचना के आदान-प्रदान के विभिन्न विषयों में सहायता प्रदान करने के लिए भागीदारों की व्यापक श्रेणी को एक मंच पर लाती है।
डब्ल्यूआरआई इंडिया के सीईओ डॉ. ओपी अग्रवाल ने कहा कि परिवहन भारत का तीसरा सबसे बड़ा ग्रीनहाउस-गैस उत्सर्जक क्षेत्र है, जिसका हमारी ऊर्जा संबंधित कार्बन डाइ-ऑक्साइड उत्सर्जन में 14 प्रतिशत योगदान है। यह देश का सबसे तेजी से बढ़ता हुआ क्षेत्र भी है इसलिए कम कार्बन वाले भविष्य की ओर बढ़ने के लिए परिवहन क्षेत्र को त्वरित रूप से कार्बन मुक्त बनाना बहुत आवश्यक होगा।
डब्ल्यूआरआई, भारत के कार्यकारी निदेशक (एकीकृत परिवहन) श्री अमित भट्ट ने कहा कि वित्तपोषण की उपलब्धता की कमी परिवहन क्षेत्र को कार्बन मुक्त करने की दिशा में सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है। रणनीतिक निवेश और नवाचारी वित्तीय समाधान शत-प्रतिशत शून्य-उत्सर्जन मोटर वाहनों के त्वरित पारगमन की शुरुआत कर सकते हैं जो सीओपी26 घोषणा का एक आवश्यक घटक है।
एनडीसी-टीआईए सात संगठनों का संयुक्त कार्यक्रम है जिसमें भारत, चीन और वियतनाम अपने-अपने देशों में परिवहन को कार्बन मुक्त करने के व्यापक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए शामिल हैं। यह परियोजना अंतर्राष्ट्रीय जलवायु पहल (आईकेआई) का एक हिस्सा है। पर्यावरण, प्रकृति संरक्षण और परमाणु सुरक्षा के लिए संघीय मंत्रालय (बीएमयू) जर्मन बुंडेस्टाग द्वारा अपनाए गए निर्णय के आधार पर इस पहल का समर्थन करता है। नीति आयोग इस परियोजना के भारतीय घटक के लिए कार्यान्वयन भागीदार है।
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