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ब्राजील की अध्यक्षता के तहत दो दिवसीय दूसरी रोजगार कार्य समूह (EWG) की बैठक आज ब्रासीलिया में शुरू हुई

ब्राजील की अध्यक्षता के तहत दो दिवसीय दूसरी रोजगार कार्य समूह (ईडब्ल्यूजी) की बैठक आज ब्रासीलिया में शुरू हुई। जी20 ईडब्ल्यूजी का काम सभी के लिए मजबूत, टिकाऊ, संतुलित और भरपूर नौकरियों से युक्त विकास के लिए श्रम, रोजगार और सामाजिक मुद्दों का समाधान करना है। भारत जी20 ट्रोइका का सदस्य है, जिसका प्रतिनिधित्व श्रम और रोजगार सचिव सुमिता डावरा कर रही हैं और ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ भारत दूसरी ईडब्ल्यूजी बैठक की सह-अध्यक्षता कर रहा है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय में संयुक्त सचिव रूपेश कुमार ठाकुर और उप निदेशक राकेश गौड़ भी शामिल हैं।

उद्घाटन सत्र की शुरुआत ब्राजील के श्रम और रोजगार राज्य मंत्री लुइज मारिन्हो के भाषण से हुई। इसके बाद, अपनी शुरुआती टिप्पणी में, सुमिता डावरा ने कहा कि ब्रासीलिया में दूसरे ईडब्ल्यूजी के प्राथमिकता वाले क्षेत्र भारत की अध्यक्षता सहित पिछली जी20 अध्यक्षता के प्राथमिकता वाले क्षेत्रों और परिणामों के साथ संरेखित हैं। इस अवसर पर उन्होंने कामकाजी दुनिया में स्थायी सकारात्मक बदलाव लाने के लिए बहु-वर्षीय एजेंडे में निरंतरता बने रहने की सराहना की। इस स्थिति को न केवल कायम रखा गया है, बल्कि भारत की अध्यक्षता के दौरान ईडब्ल्यूजी द्वारा शुरू किए गए कार्यों को भी आगे बढ़ावा दिया गया है।

समावेशन, नवाचार और विकास को बढ़ावा देने के लिए दूसरी ईडब्ल्यूजी बैठक का जोर मुख्य रूप से (i) गुणवत्तापूर्ण रोजगार सृजित करना और उपयुक्त श्रम को बढ़ावा देना; (ii) डिजिटल और ऊर्जा परिवर्तनों के बीच एक उचित बदलाव सुनिश्चित करना; (iii) सभी के लिए जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रौद्योगिकियों का दोहन करना; (iv) रोजगार की दुनिया में लैंगिक समानता और विविधता को बढ़ावा देने पर है।

बैठक के पहले दिन, कार्यस्थल पर लैंगिक समानता और विविधता को बढ़ावा देने के एक समग्र विषय पर विचार-विमर्श किया गया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने नस्ल, लिंग, जातीयता या सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से इतर सभी के लिए समान प्रतिनिधित्व और सशक्तिकरण सुनिश्चित करके समावेशी वातावरण बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस संदर्भ में, भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने (i) कार्यस्थल और उससे बाहर लैंगिक समानता; (ii) प्रवासी श्रमिकों के लिए उठाए गए कदमों; (iii) वरिष्ठ नागरिकों के पुन: रोजगार को बढ़ावा देना, (iv) दिव्यांगों और कमजोर वर्ग के लोगों की कार्यबल में भागीदारी को बढ़ावा देने में भारत द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण कदमों पर प्रकाश डाला। दूसरे ईडब्ल्यूजी के पहले दिन प्रदर्शित की गई इनमें से कुछ उपलब्धियां इस प्रकार हैं:

महिला श्रम बल भागीदारी को बढ़ाने के लिए, भारत ने व्यावसायिक सुरक्षा स्वास्थ्य और कार्य स्थिति संहिता (ऑक्यूपेशनल सेफ्टी हैल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड), 2020 लागू किया है जो महिलाओं को रात के समय उनकी सहमति से सभी प्रतिष्ठानों में सभी प्रकार के कार्यों के लिए नियोजित करने का अधिकार देता है। यह प्रावधान भूमिगत खदानों में पहले ही लागू किया जा चुका है।

2017 में, सरकार ने मातृत्व लाभ अधिनियम 1961 में संशोधन किया, जिसके तहत 10 या अधिक श्रमिकों को रोजगार देने वाले प्रतिष्ठानों में काम करने वाली सभी महिलाओं के लिए ‘वेतन सुरक्षा के साथ मातृत्व अवकाश’ को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया। इससे कामकाजी माताओं के बीच मातृत्व वेतन का अंतर कम होने की उम्मीद है।

प्रवासी श्रमिकों की सहायता के लिए, भारत की अनूठी नीति ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’ प्रवासियों को देश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली नेटवर्क में कहीं से भी अपनी पात्रता वाले खाद्यान्न तक पहुंचने की अनुमति देती है। हमने राज्यों में पोर्टेबिलिटी सुनिश्चित करते हुए सामाजिक सुरक्षा और कल्याण लाभ प्रदान करने के लिए कई योजनाएं भी लागू की हैं। ये योजनाएं ऐसे श्रमिकों को किफायती आवास, कौशल विकास के माध्यम से बढ़ी हुई रोजगार क्षमता और वृद्धावस्था पेंशन प्रदान करती हैं।

ई-श्रम पोर्टल कार्यबल में समावेशन को बढ़ावा देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है, जिसे असंगठित श्रमिकों, विशेष रूप से प्रवासी और निर्माण श्रमिकों का एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाने के लिए लॉन्च किया गया है। ई-श्रम कार्ड प्रदान करने वाली यह पहल विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत लाभों तक पहुंच को सक्षम बनाती है। पोर्टल एक असंगठित क्षेत्र के श्रमिक को 30 व्यापक व्यवसाय क्षेत्रों में 400 तरह के रोजगार के तहत स्व-घोषणा के आधार पर पोर्टल पर खुद को पंजीकृत करने की अनुमति देता है। इस पोर्टल पर अब तक 29 करोड़ से अधिक असंगठित श्रमिक पंजीकृत हो चुके हैं।

भारत ने श्रम बाजार में उम्रदराज लोगों की भागीदारी को बढ़ावा देने ; व्यावसायिक प्रशिक्षण, कौशल विकास और जॉब प्लेसमेंट सेवाओं सहित विकलांग व्यक्तियों के पुनर्वास; और पारंपरिक रूप से हाशिए पर रहने वाले और कमजोर समूहों के लिए भी कई कदम उठाए हैं।

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