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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा – 21 वीं सदी के भारत का सबसे बड़ा लक्ष्य आधुनिक और आत्मनिर्भर बनना है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि राष्ट्र का प्रमुख उद्देश्य स्वनयं को आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया की निगाहें हम पर हैं, कोविड के कारण बनी परिस्थितियों में नई विश्व व्यवस्था उभर रही है और भारत को अपने आप को तेजी से आगे बढाना है। लाल बहादुर शास्त्री प्रशासन अकादमी में 96वें अनिवार्य प्रारंभिक पाठ्यक्रम के समापन समारोह को वीडियो कॉन्फ्रेंस से संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षु अधिकारियों को 21वीं सदी के भारत के लक्ष्यों को ध्यान में रखना है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रशिक्षु अधिकारियों का यह बैच विशेष है क्योंकि देश की स्वतंत्रता के 75 वें वर्ष में इस बैच का काम शुरू हो रहा है और वे अगले 25 वर्षों में राष्ट्र की प्रगति के लिए जिम्मेदार होंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरदार पटेल की सेवा और कर्तव्यप के प्रति निष्ठां प्रशिक्षण का सबसे अहम हिस्सा है। नौकरी में रहते हुए सेवाभाव और कर्तव्यनिष्ठा का सिद्धांत होना चाहिए। और अगर वे इन दो सिद्धांतों का पालन करते हैं, तो काम बोझ नहीं लगेगा। राष्ट्रअपिता महात्मा गांधी का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यदि आपका एक भी निर्णय समाज के अंतिम व्यक्ति की बेहतरी में मदद करता है, तो निर्णय लेने में संकोच नहीं करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि उन्हें रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म को अगले स्तर पर ले जाना है। ‘सबका प्रयास’ बहुत महत्वपूर्ण है और यह हमेशा सकारात्मक परिणाम देता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि समस्याओं के समाधान के लिए चुनौतियों की पहचान करना बहुत जरूरी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने प्रशिक्षु अधिकारियों को पाठ्यक्रम पूरा करने पर बधाई दी। प्रधानमंत्री ने देशवासियों को होली के पर्व पर शुभकामनाएं दीं।

अनिवार्य प्रारंभिक पाठ्यक्रम, लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में ऐसा पहला पाठ्यक्रम है, जो मिशन कर्मयोगी के सिद्धांतों पर आधारित है। बैच में 16 प्रशासनिक सेवाओं के 488 प्रशिक्षु अधिकारी और तीन प्रशिक्षु रॉयल भूटान प्रशासनिक, पुलिस और वन सेवा से हैं।

युवा बैच की साहसिक और नवीन भावना का लाभ उठाने के लिए, मिशन कर्मयोगी के सिद्धांतों द्वारा निर्देशित नई शिक्षाशास्त्र को तैयार किया गया था। सबका प्रयास की भावना में पद्म पुरस्कार विजेताओं के साथ बातचीत और ग्रामीण भारत के व्यापक अनुभव के लिए गांव के दौरे जैसी पहल के जरिये प्रशिक्षु अधिकारी को एक लोक सेवक में बदलने पर जोर दिया गया था। प्रशिक्षु अधिकारियों ने इन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के सामने आने वाली चुनौतियों को समझने के लिए दूर-दराज या सीमावर्ती क्षेत्रों के गांवों का भी दौरा किया। स्वास्थ्य परीक्षणों के अलावा, परीक्षा के बोझ से दबे एक छात्र के स्वस्थ युवा सिविल सेवक के रूप में बदलने में सहायता के लिए फिटनेस परीक्षण भी किए गए। सभी चार सौ 88 प्रशिक्षु अधिकारियों को क्राव मागा और अन्य विभिन्न खेलों में प्रथम स्तर का प्रशिक्षण दिया गया।

प्रधानमंत्री ने नए खेल परिसर का उद्घाटन और नया हैप्पी वैली कॉम्प्लेक्स भी राष्ट्रि को समर्पित किया।

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