प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि प्रसिद्ध कृषि विज्ञानी प्रोफेसर एम.एस स्वामीनाथन के असाधारण कार्यों की बदौलत ही भारत आज खाद्यान्न की कमी वाले देश से ऊपर उठकर खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर राष्ट्र बन सका है। अपने ब्लॉग ‘नरेन्द्र मोदी डॉट इन’ में उन्होंने स्वामीनाथन को याद करते हुए कहा कि राष्ट्र ने एक ऐसे दूरदर्शी व्यक्तित्व को खो दिया है जिनका योगदान हमेशा स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 1960 के शुरु में, जब भारत में खाद्यान्न के संकट से जूझ रहा था, तब स्वामीनाथन की प्रतिबद्धता और दूरदर्शिता से देश में कृषि के क्षेत्र में खुशहाली का एक नए दौर शुरू हुआ। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि विशेषकर गेहूँ के क्षेत्र में प्रोफेसर स्वामीनाथन के कार्य से गेहूँ उत्पादन में काफी वृद्धि हुई। प्रोफेसर स्वामीनाथन को इसी उपलब्धि के कारण हरित क्रांति का जनक कहा जाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि हरित क्रान्ति के पांच दशक बाद,अब भारतीय कृषि काफी आधुनिक और प्रगतिशील है, लेकिन प्रोफेसर स्वामीनाथन ने जो आधारशिला रखी थी, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पूरी दुनिया आज जिस मिलेट्स या श्रीअन्न की चर्चा कर रही है, प्रोफेसर स्वामीनाथन ने उस पर 1990 के दशक में ही चर्चा की शुरुआत कर दी थी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि प्रोफेसर स्वामीनाथन ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के संबंध में भी अपने बहुमूल्य विचार दिए थे। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोग प्रोफेसर स्वामीनाथन को एक कृषि विज्ञानी कहते हैं, लेकिन वस्तुतः, वे किसानों के वैज्ञानिक थे।
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