प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत आने वाले वर्षों में दुनिया का विकास इंजन बनेगा और जल्द ही पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन जाएगा। दक्षिण अफ्रीका के जोहान्सबर्ग में ब्रिक्स बिजनेस फोरम लीडर्स डायलॉग में प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में आर्थिक उथल-पुथल के बावजूद भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
प्रधानमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में किए गए सुधारों के बारे में कहा कि भारत सरकार के मिशन मोड में किए गए सुधारों के कारण व्यापार आसान करने में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि जीएसटी और दिवाला और ऋण अक्षमता कानून लागू होने से निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्रों को पहले प्रतिबंधित माना जाता था लेकिन उन्हें अब निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार विशेष रूप से सार्वजनिक सेवा वितरण और सुशासन पर ध्यान केंद्रित कर रही है। उन्होंने कहा कि अब तक लाभार्थियों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण-डीबीटी के माध्यम से तीन सौ 60 अरब डॉलर से अधिक की धनराशि अंतरित की जा चुकी है। प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि डीबीटी योजना से सेवा वितरण में पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार कम हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी ने डिजिटल लेनदेन के बारे में कहा कि आज भारत में यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस- यूपीआई का इस्तेमाल रेहड़ी-पटरी वालों से लेकर बड़े-बड़े शॉपिंग मॉल तक हर स्तर पर हो रहा है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के सभी देशों में भारत सबसे ज्यादा डिजिटल लेनदेन वाला देश है और संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर और फ्रांस जैसे देश भी इस मंच से जुड़ रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के बुनियादी ढांचे में बड़े पैमाने पर किए जा रहे निवेश देश के परिदृश्य को बदल रहे हैं और इस साल के बजट में हमने बुनियादी ढांचे के लिए लगभग एक सौ 20 अरब अमेरिकी डॉलर आवंटित किए हैं।
उन्होंने कहा कि इस निवेश के माध्यम से हम भविष्य के नए भारत के लिए एक मजबूत नींव रख रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी, दूरसंचार, फिनटेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में हम “मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड” की परिकल्पना को बढ़ावा दे रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कोविड ने उदार और समावेशी आपूर्ति श्रृंखलाओं के महत्व को उजागर किया है और इसके लिए आपसी विश्वास और पारदर्शिता के महत्व पर जोर दिया है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि ब्रिक्स देश मिलकर वैश्विक कल्याण विशेष रूप से ग्लोबल साउथ में महत्वपूर्ण योगदान कर सकते हैं। प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स देशों के उद्योगपतियों को भारत की विकास यात्रा में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।
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