देश के विभिन्न भागों में पारसी समुदाय आज नव वर्ष मना रहा है। लोग आज सुबह से ही परिजन और मित्रों से साथ उपासना स्थलों पर जा रहे हैं और बीते वर्ष को भावभीनी विदाई देने के साथ नए वर्ष – नवरूज़ का स्वागत कर रहे हैं। इस अवसर पर सुरूचिपूर्ण ढंग से घरों की सजावट की गई है।
यह त्यौहार पारसी सांस्कृतिक प्रभाव वाले कई देशों जैसे भारत, ईरान, इराक, अफगानिस्तान और मध्य एशिया के कुछ हिस्सों में मनाया जाता है। भारत में पारसी समुदाय शेष विश्व के लगभग 200 दिन बाद नवरोज़ मनाता है क्योंकि यह शहंशाही कैलेंडर का पालन करता है।
ऐसा माना जाता है कि नवरोज़ 3000 साल पुराना त्योहार है और यह दुनिया के सबसे पुराने धर्मों में से एक पारसी धर्म से उभरा है। पारसियों का मानना है कि यह आध्यात्मिक नवीनीकरण और शारीरिक कायाकल्प का समय है। नवरोज़ पौराणिक कथाओं के फ़ारसी राजा जमशेद के जीवन से भी संबंधित है।
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