विश्व बैंक के साथ साझेदारी में पशुपालन विभाग, 19 और 20 जून, 2024 को भोपाल, मध्य प्रदेश में एवियन इन्फ्लूएंजा प्रकोप और प्रतिक्रिया सिमुलेशन अभ्यास का आयोजन कर रहा है। यह कार्यशाला ऐसे महत्वपूर्ण समय पर आयोजित की जा रही है, जब हम केरल में एवियन इन्फ्लूएंजा के असामान्य प्रकोप का सामना कर रहे हैं और मवेशियों सहित गैर-पोल्ट्री प्रजातियों में इसके फैलाव की वैश्विक प्रवृत्ति देख रहे हैं। कार्यक्रम का उद्घाटन पशुपालन आयुक्त, डीएएचडी, डॉ. अभिजीत मित्रा ने मध्य प्रदेश सरकार के पशुपालन विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा, विश्व बैंक के वरिष्ठ कृषि अर्थशास्त्री, डॉ. हिकुएपी (एपि) काटजीयोंगुआ और मध्य प्रदेश सरकार के प्रधान मुख्य वन्यजीव वार्डन, डॉ. अतुल श्रीवास्तव की उपस्थिति में किया।
दो दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य एवियन इन्फ्लूएंजा के प्रकोप के लिए तैयारी और जवाबी क्षमताओं को बढ़ाना है। इस सिमुलेशन अभ्यास में विभिन्न क्षेत्रों से 40 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। मानव स्वास्थ्य का प्रतिनिधित्व राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, पशुपालन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व पशुपालन और डेयरी विभाग, भारत सरकार और राज्य एएचडी, वन्यजीव का प्रतिनिधित्व चिड़ियाघर और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ, और प्रयोगशाला विशेषज्ञ आईसीएआर-एनआईएचएसएडी, आरडीडीएल सीडीडीएल और केरल, ओडिशा और मध्य प्रदेश के राज्य पशु चिकित्सा प्रयोगशाला और डब्ल्यूएचओ तथा ओएफएफलयू जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन इस भयानक बीमारी से निपटने में एक सहयोगी ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण की ओर एक महत्वपूर्ण कदम दर्शाते हैं। कार्यक्रम को विश्व बैंक के विशेषज्ञ डॉ. लिडेविज विर्समा और सीएसआईआरओ-ऑस्ट्रेलियाई रोग तैयारी केंद्र से एवियन इन्फ्लूएंजा पर डब्ल्यूओएएच विशेषज्ञ डॉ फ्रैंक वोंग द्वारा सुगम बनाया गया है।
सिमुलेशन अभ्यास प्रभावी प्रकोप का पता लगाने, त्वरित प्रतिक्रिया रणनीतियों और एवियन इन्फ्लूएंजा के प्रसार को प्रबंधित करने और रोकने के लिए अंतर-एजेंसी समन्वय पर केंद्रित है। सिमुलेशन अभ्यास में वास्तविक जीवन में प्रकोप की स्थितियों की नकल करने के लिए डिज़ाइन किए गए इंटरैक्टिव परिदृश्यों की एक श्रृंखला है, जो प्रतिभागियों को संकट प्रबंधन में व्यावहारिक अनुभव प्रदान करती है। मुख्य विषयों में निगरानी और निरीक्षण प्रणाली, आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रोटोकॉल और सार्वजनिक संचार की रणनीतियाँ शामिल हैं।
चूंकि दुनिया जूनोटिक बीमारियों की बढ़ती संख्या से जूझ रही है, इसलिए ऐसी कोशिशें स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण हैं। पशुपालन विभाग और विश्व बैंक एवियन इन्फ्लूएंजा के प्रभाव को कम करने और मानव और पशु दोनों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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