मादक द्रव्य के उपयोग का विकार एक ऐसा मुद्दा है, जो देश के सामाजिक ताने-बाने पर प्रतिकूल प्रभाव डालने की क्षमता रखता है। किसी भी पदार्थ पर निर्भरता न केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, बल्कि उनके परिवारों और पूरे समाज को भी प्रभावित करती है। विभिन्न मनो-सक्रिय पदार्थों के नियमित सेवन से व्यक्ति की निर्भरता बढ़ती है।
राष्ट्रीय औषधि निर्भरता उपचार केंद्र (एनडीडीटीसी), एम्स, नई दिल्ली के माध्यम से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा भारत में मादक द्रव्यों के उपयोग की सीमा और पैटर्न पर पहले व्यापक राष्ट्रीय सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार, शराब भारतीयों द्वारा उपयोग किया जाने वाला सबसे आम मनो-सक्रिय पदार्थ है। इसके बाद कैनबिस और ओपियोइड्स हैं।
नशीली दवाओं की मांग के खतरे को रोकने के लिए, भारत सरकार का सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, मादक पदार्थों की मांग में कमी के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना (एनएपीडीडीआर) लागू कर रहा है, जो एक व्यापक योजना है। इसके तहत, राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों को केंद्र द्वारा निवारक शिक्षा और जागरूकता सृजन, क्षमता निर्माण, कौशल विकास, व्यावसायिक प्रशिक्षण और पूर्व-नशीले पदार्थों के आदी लोगों की आजीविका सहायता आदि के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
वर्ष 2020 से, मंत्रालय उच्च शिक्षा संस्थानों, विश्वविद्यालय परिसरों, स्कूलों पर विशेष ध्यान देने के साथ युवाओं में मादक पदार्थों के सेवन के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूकता पैदा करने और समुदाय तक पहुंच बनाने एवं अभियान में सामुदायिक भागीदारी हासिल करने के उद्देश्य से देश के सभी जिलों में महत्वाकांक्षी नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) लागू कर रहा है।
एनएमबीए की उपलब्धियां:
अब तक जमीनी स्तर पर की गई विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से 10.72 करोड़ से अधिक लोगों से संपर्क किया गया है।
एनएमबीए जिलों में अभियान गतिविधियों का नेतृत्व करने के लिए 8,000 मास्टर स्वयंसेवकों का चयन और प्रशिक्षण किया गया है।
3.38 करोड़ से अधिक युवाओं ने अभियान की गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लिया है और नशीले पदार्थों के उपयोग के खिलाफ संदेश फैलाया है।
लगभग 4,000 से अधिक युवामंडल, एनवाईकेएस और एनएसएस स्वयंसेवक, युवा क्लब भी इस अभियान से जुड़े हुए हैं।
आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, महिला मंडलों और महिला स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से बड़े समुदाय तक पहुंचने में 2.27 करोड़ से अधिक महिलाओं का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा है।
फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम पर हैंडल बनाकर और उन पर दैनिक अपडेट साझा करके अभियान के संदेश को ऑनलाइन फैलाने के लिए प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया का प्रभावी ढंग से उपयोग किया गया है।
जिलों और मास्टर स्वयंसेवकों द्वारा वास्तविक समय के आधार पर जमीन पर होने वाली गतिविधियों के डेटा को कैप्चर करने के लिए एक एंड्रॉइड आधारित मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किया गया है। इस ऐप को गूगल प्ले स्टोर पर डाला गया है।
जनता की पहुंच को सहज बनाने के लिए सभी नशामुक्ति सुविधाओं को जियो-टैग किया गया है।
एनएमबीए के तहत धार्मिक/आध्यात्मिक संगठनों का संस्थान इस अभियान के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों को चलाने और उनके बैनर तले एनएमबीए के संदेश को फैलाने के लिए बनाया गया है। इस दिशा में एक कदम बढ़ाते हुए, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने युवाओं, महिलाओं, छात्रों और समुदाय के बीच एनएमबीए का संदेश फैलाने के लिए श्री रामचंद्र मिशन के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह आज डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर, 15 जनपथ, नई दिल्ली में डॉ. वीरेंद्र कुमार, मंत्री (एचएमएसजेई), रामदास अठावले, माननीय राज्य मंत्री (एचएमएसजेई), श्री रामचंद्र मिशन के अध्यक्ष कमलेश डी पटेल (दाजी), विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और श्री रामचंद्र मिशन के 30 से अधिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में श्री रामचंद्र मिशन के कमलेश डी. पटेल (दाजी) वीडियो कांफ्रेंसिंग द्वारा आभासी माध्यम से उपस्थित रहे।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री (एचएमएसजेई) ने देश में नशा मुक्त भारत अभियान (एनएमबीए) के माध्यम से किए गए प्रयासों के बारे में बात की, जिसने इस अभियान को एक जन आंदोलन बनाने में मदद की है। केंद्रीय मंत्री ने सभा को रक्षा मंत्री की उपस्थिति में नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खिलाफ राष्ट्रीय प्रतिज्ञा, एनसीसी इंटरेक्शन जैसे विशेष कार्यक्रमों के बारे में जानकारी दी, जो नशीली दवाओं के उपयोग के खिलाफ अभियान में हितधारकों को शामिल करने के लिए नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं। इस अभियान में आध्यात्मिक संगठनों की भागीदारी के महत्व पर जोर देते हुए, केंद्रीय मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि श्री रामचंद्र मिशन के साथ यह सहयोग व्यक्तियों के जीवन को रौशन करने और उन्हें नशे की राह पर जाने से रोकने, एवं मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक रूप से मजबूत समाज बनाने में काफी मदद करेगा।
श्री रामचंद्र मिशन के अध्यक्ष कमलेश डी. पटेल (दाजी) ने नशीली दवाओं के खिलाफ इतना बड़ा अभियान शुरू करने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को बधाई दी। इस क्षेत्र में काम करने के अपने अनुभवों के माध्यम से, उन्होंने एक अनुकूल पारिवारिक और सामाजिक वातावरण के महत्व पर जोर दिया जो मादक पदार्थों के उपयोग को रोकने के साथ-साथ उस पर काबू पाने में भी मदद करेगा। अपने 5000 केंद्रों और श्री रामचंद्र मिशन से जुड़े 16 करोड़ से अधिक लोगों के माध्यम से, दाजी ने नशा मुक्त भारत अभियान में भागीदारी और नशा मुक्त भारत बनाने में योगदान की पुष्टि की।
इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के साथ, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को विश्वास है कि नशा मुक्त भारत अभियान के कार्यान्वयन से भारत को मादक पदार्थों के प्रति संवेदनशील बनाने के उद्देश्य को प्राप्त करने की दिशा में बढ़ावा मिलेगा।
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