ताइवान के द्वीपीय क्षेत्र के आसपास तनाव गहरा गया है। चीन और अमरीका ने किसी भी परिणाम के लिए एक-दूसरे को चेतावनी देते हुए जिम्मेदार ठहराया है। चीन लोकतांत्रिक रूप से शासित ताइवान को अपना इलाका बताता है। ऐसे में तनाव की वजह है अमरीका संसद की स्पीकर नैन्सी पेलोसी की संभावित ताइवान यात्रा।
मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि पेलोसी मंगलवार की रात ताइवान में उतर सकती हैं, हालांकि उनकी ताइवान यात्रा की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। उन्होंने सोमवार को अपने एशिया दौरे की शुरुआत सिंगापुर के पहले पड़ाव से की थी। उनके इस यात्रा कार्यक्रम में मलेशिया, दक्षिण कोरिया और जापान भी शामिल हैं, लेकिन संभावित ताइवान यात्रा की अटकलों ने चीन को नाराज कर दिया है। चीन ने इस तरह की उच्च-स्तरीय यात्रा को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार दिया है।
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता और सहायक विदेश मंत्री हुआ चुनयिंग ने मंगलवार को पेइचिंग में दिये एक बयान में चीन के पक्ष को दोहराया। उन्होंने कहा कि अमरीका निश्चित रूप से चीन की संप्रभुता और सुरक्षा हितों को कम करने की कीमत चुकाएगा और जिम्मेदार ठहराया जाएगा। पेलोसी के संभावित ताइवान दौरे की रिपोर्ट सामने आने के बाद से चीनी प्रवक्ता सैन्य कार्रवाई की चेतावनी जारी कर रहे हैं।
हुआ चुनयिंग ने यह भी कहा कि चीन के स्टेट काउंसलर और विदेश मंत्री वांग यी की नोम पेन्ह में पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में अमरीका विदेश मंत्री ब्लिंकन के साथ मिलने की कोई योजना नहीं है। ये विदेश मंत्री स्तरीय सम्मेलन 3 से 5 अगस्त तक चलेगा। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमरीका राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पिछले बृहस्पतिवार को फोन पर बात की थी। पेइचिंग के बयान में कहा गया कि अमरीका के राष्ट्रपति को ताइवान पर “आग से नहीं खेलने” की चेतावनी दी गई, जबकि अमरीका अधिकारियों ने कहा कि बाइडेन ने चीन के राष्ट्रपति से कहा कि पेलोसी को “ताइवान जाने का अधिकार” है और उनकी यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, चीन अमरीका और ताइवान की ओर से सैन्य तैनाती क्षेत्र में लगातार बढ़ रही है, जिससे तनाव और गलतफहमी के चलते स्थिति गंभीर बनी हुई है। ताइवान के वायु रक्षा क्षेत्र में चीनी फाइटर जेट्स ने उड़ान भरी। चीन की सेना ने 2 अगस्त से 6 अगस्त तक दक्षिण चीन सागर और बोहाई सागर के कुछ इलाकों में सैन्य अभ्यास की भी घोषणा की है, जिसमें इस दौरान प्रवेश प्रतिबंधित है। चीन के सरकारी टेलीविजन के अंग्रेजी चैनल पर चर्चा में भाग ले रहे एक चीनी विशेषज्ञ ने कहा कि यह संकट चीन के लिए ताइवान के हवाई और जलक्षेत्र में प्रवेश करने का एक अवसर बन सकता है।
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