दो दिवसीय तटीय रक्षा अभ्यास सी विजिल-22 15 से 16 नवंबर तक आयोजित किया गया। अभ्यास ‘सी विजिल’ की अवधारणा और भौगोलिक विस्तार में देश के पूरे समुद्र तट और ईईजेड में शांति से लेकर युद्ध-काल तक के आकस्मिक ख़तरे शामिल थे। इसके अलावा अभ्यास के दौरान तटीय सुरक्षा तंत्र में किसी भी तरह के उल्लंघन के मामले में तट पर किए जाने वाले शमन उपायों का सत्यापन भी किया गया।
इस अभ्यास में नौ तटीय राज्यों और चार केंद्र शासित प्रदेशों की 17 से अधिक ऐसी सरकारी एजेंसियों की भागीदारी शामिल थी जो तटीय रक्षा तंत्र और तटीय सुरक्षा संबंधी ढांचे में शामिल हैं। सी विजिल अभ्यास के इस संस्करण में सभी समुद्री सुरक्षा एजेंसियों से सबसे बड़ी भागीदारी देखी गई। इस अभ्यास में भारतीय नौसेना (आईएन), तटरक्षक (कोस्टगार्ड), राज्यों की समुद्री/ तटीय पुलिस, सीमा शुल्क, वन विभाग, बंदरगाह प्राधिकरणों और निजी ऑपरेटरों की 500 से अधिक सरफेस संपत्तियों ने भाग लिया । पूरी तटरेखा को भारतीय नौसेना और कोस्टगार्ड के जहाजों एवं विमानों द्वारा निगरानी में रखा गया था । अपतटीय प्लेटफार्मों पर काम करने वाले विशेष अभियान कर्मियों को सुदृढ़ करने के लिए हेलीकाप्टरों को काम में लगाया गया।
चूंकि बंदरगाह समुद्र से होने वाले व्यापार का मुख्य केंद्र होते हैं, इसलिए अभ्यास के दौरान बंदरगाहों के सुरक्षा तंत्र का सत्यापन भी किया गया एवं आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी बंदरगाहों की संकट प्रबंधन योजनाओं का उनकी प्रभावशीलता के लिए मूल्यांकन किया गया था । समुद्री आतंकवाद जैसे कृत्यों से निपटने के लिए राज्य पुलिस की टीमों, भारतीय नौसेना के मैरीन कमांडोज़ एवं राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के कमांडोज़ का इस्तेमाल भी किया गया।
एनसीसी को प्रोत्साहन देने के माननीय प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को ध्यान में रखते हुए सभी तटीय राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में 800 से अधिक एनसीसी कैडेट्स द्वारा उत्साहपूर्ण भागीदारी देखी गई । समूचे देश में चलाए गए वास्तविक अभ्यास में एनसीसी कैडेट्स की भागीदारी के परिणामस्वरूप कैडेट्स के बीच जागरूकता व भागीदारी में बढ़ोतरी हुई।
अभ्यास ने राष्ट्रीय कमान, नियंत्रण, संचार एवं खुफिया (NC3I) नेटवर्क नामक तकनीकी निगरानी अवसंरचना का सत्यापन भी किया गया । गुरुग्राम में सूचना प्रबंधन एवं विश्लेषण केंद्र (आई-मैक) और भारतीय नौसेना एवं कोस्टगार्ड स्टेशनों पर इसके विभिन्न नोड्स का निगरानी व सूचना प्रसार तंत्र के समन्वय के लिए प्रयोग किया गया।
अभ्यास के निर्धारित किए गए उद्देश्यों को सभी हितधारकों की पूरे दिल से भागीदारी के माध्यम से पूरा किया गया । अभ्यास में शामिल विभिन्न एजेंसियों के बीच सहयोग और समन्वय तटीय रक्षा के क्षेत्र में हुई प्रगति का सुनिश्चित संकेत है एवं यह अभ्यास समुद्री क्षेत्र में तटीय रक्षा तथा राष्ट्रीय सुरक्षा को आगे ले जाने में एक लंबा रास्ता तय करेगा।
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