केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने स्विट्जरलैंड के दाबोस में विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) द्वारा आयोजित स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य सेवा सामुदायिक रात्रिभोज में भाग लेते हुए कहा कि हम स्वास्थ्य अवसंरचना को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं तथा हमने स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता, पहुंच तथा सामर्थ्य पर ध्यान देते हुए स्वास्थ्य सेवा डिलेविरी में सुधार के लिए कई योजनाएं प्रारंभ की हैं।
डॉ. मांडविया ने सेवा के रूप में स्वास्थ्य सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के भारत के विजन को दोहराया। उन्होंने कहा कि चाहे विश्व की सबसे बड़ी सरकारी वित्त पोषित स्वास्थ्य आश्वासन योजना का शुभारंभ हो या लगभग 5000 मिलियन लोगों को कवर करने वाली पीएम जन आरोग्य योजना हो या 150,000 हेल्थ और वेलनेस सेंटरो की स्थापना हो, हमने स्वास्थ्य सेवा में अंत्योदय का विजन रखा है यानी अंतिम व्यक्ति का उदय और सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण पक्ष है।
फार्मास्युटिकल क्षेत्र में भारत के योगदान की सराहना करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा कि जेनेरिक दवाओं में विश्व नेता होने के अतिरिक्त भारत में अमेरिका के बाद यूएसएफडीए मेन्युफेक्चरिंग संयंत्रों की संख्या सबसे अधिक है। यह अनुसंधान एवं विकास गतिविधियों के एक केंद्र के रूप में उभरा है और उच्च नैदानिक सेवाओं के लिए अग्रणी स्थानों में एक है। विश्व को बड़े स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए एक सक्षम ढांचा बनाने के लिए सरकार शीघ्र ही हिल इन इंडिया पहल के माध्यम से चिकित्सा पर्यटन को संस्थागत बना रही है।
डॉ. मांडविया ने अपने समापन भाषण में सभी हितधारकों को भारत को अवसरों की भूमि के रूप में देखने और भारत के साथ साझेदारी करके लाभ उठाने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि यह प्रयास भारत और विश्व को एक स्वस्थ स्थान बनाने की दिशा में ले जाएगा।
डॉ. मनसुख मांडविया दाबोस स्विट्जरलैंड में चल रही विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक में कांग्रेस सेंटर में कई प्रमुख सत्रों में भाग ले रहे हैं। इस तरह के सत्रों की श्रृंखला में उन्होंने जर्मनी के संघीय स्वास्थ्य मंत्री कार्ल विलहेम लॉटरबेक के साथ द्विपक्षीय बैठक की, जहां उन्होंने जर्मन समकक्षों द्वारा दिखाए गए सहयोग की सराहना की और भविष्य में भी इस सहयोग को बनाए रखने तथा मजबूत बनाने की आशा व्यक्त की।
भाग लेने वालों में जर्मनी के संघीय स्वास्थ्य मंत्री कार्ल विलहेम लॉटरबेक, वित्त मंत्री और जांबिया के राष्ट्रीय वित्त नियोजन और राष्ट्रीय नियोजन मंत्री सेतुम्बेको मुसुकोटवाने, अंगोला के वित्त मंत्री वेरा दावेस डी सोउसा, नेशनल एकेडमी ऑफ मेडिसन के अध्यक्ष विक्टर डिजाऊ, तेलंगाना सरकार के सूचना, प्रौद्योगिकी, उद्योग, नगर पालिका प्रशासन और शहरी विकास मंत्री के.टी. रामाराव, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस, विश्व आर्थिक मंच कार्यकारी समिति के सदस्य और स्वास्थ्य सेवा के भविष्य को आकार देने के प्रमुख श्याम बिशेन, संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) की कार्यकारी निदेशक नाटालिया कानेम, नोवो नोर्डिस्क फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मेडस क्रोगगार्ड थॉम्सन, हार्वड टीएचए चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के डीन फैकल्टी माइकल विलियम्स, वेलकम ट्रस्ट के निदेशक जेरेमी फरार, सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अदार सी. पूनावाला, डॉ. रेड्डीज लैब के सह-अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक प्रसाद जीवी, सनोफी के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी पॉल हडसन, गावी वेक्सिन अलायंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सेठ एफ बर्कले, अपोलो हॉस्पिटल इंटरप्राइज की कार्यकारी उपाध्यक्ष शोभना कामीनेनी, मॉडेरना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टीफन वेनसेल शामिल हैं।
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