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जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तैयारियां जोरों पर

शनिवार और रविवार को जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी के लिए राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तैयारियां जोरों पर हैं। सरकारी एजेंसियों और नगर निकायों से लेकर सुरक्षा प्रतिष्ठानों तक इस वैश्विक आयोजन को ऐतिहासिक बनाने के लिए पुरा प्रयास कर रहे हैं। राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में दीवारों पर कलाकृतियां बनाई गई हैं, विभिन्‍न स्‍थानों पर मूर्तियां और फव्वारें लगाए गए हैं। इसके साथ ही एक समर्पित पार्क भी तैयार किया गया है जिसमें जी-20 सदस्‍यों देशों के राष्ट्रीय पशु-पक्षियों को दर्शाया गया है।

विभिन्‍न देशों के राष्‍ट्राध्‍यक्षों और प्रतिनिधिमंडलों के भव्‍य स्‍वागत के लिए दिल्‍ली के इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर खास तैयारियां की गई हैं। हवाई अड्डे के टर्मिनल-3 पर तीन विशेष लाउंज बनाए गए हैं जहां प्रतिनिधिमंडल के साथ आए अधिकारी आवश्‍यक कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद हवाई अड्उे से आसानी से बाहर निकल सकेंगे। मेहमानों का गर्मजोशी से स्‍वागत करने के लिए टर्मिनल पर कई होर्डिंग्‍स भी लगाए गए हैं।

दिल्‍ली मेट्रो के चुनिंदा स्‍टेशनों पर आज से दस दिन तक ‘टूरिस्‍ट स्‍मार्ट कार्ड’ लिए जा सकेंगे। यह सुविधा जी-20 प्रतिनिधियों और ऐसे अंतर्राष्‍ट्रीय पर्यटकों के लिए है, जो दिल्‍ली में प्रमुख पर्यटन स्‍थलों को देखने के इच्‍छुक हैं। एक दिन की मान्‍यता वाला कार्ड 200 रुपये का और तीन दिन की मान्‍यता वाला कार्ड 500 रुपये का मिलेगा।

अमेरिका के राष्‍ट्रपति जो बाइडेन, फ्रांस के राष्‍ट्रपति ईमेनुअल मैक्रो, ऑस्‍ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्‍बानीज़, जर्मनी के चांसलर ओलाफ स्‍कोल्‍ज़, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक, जापान के प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा और ब्राज़ील के राष्‍ट्रपति लुईज़ इनाकियो लुला डी सिल्‍वा, जी-20 नेताओं की बैठक में शामिल होंगे।

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने आज हैदराबाद के शमसाबाद में जलवायु अनुकूल कृषि पर तीन दिवसीय जी-20 तकनीकी कार्यशाला का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में जी-20 देशों तथा आमंत्रित देशों के 100 से अधिक प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने वैश्विक, जलवायु परिवर्तन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसकी वजह से विकास की राह में कई चुनौतियां उत्‍पन्‍न हो रही हैं। शोभा करंदलाजे ने कहा कि कृषि क्षेत्र के सबसे संवेदनशील होने से इस पर जलवायु परिवर्तन का काफी प्रभाव पडता है।

बैठक में कृषि अनुसंधान के विभिन्न मुद्दों, मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन और वैश्विक संदर्भ में कृषि के संधारणीय विकास के लिए अन्य तकनीकों और तरीकों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

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