डोनर, संस्कृति और पर्यटन मंत्री जी. किशन रेड्डी ने आज शिलांग में मुख्य अतिथि के रूप में असम राइफल्स के 188वें संस्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया। किशन रेड्डी ने कहा कि असम राइफल्स की 1835 से बहादुरी की अद्वितीय विरासत रही है और उसे सबसे अधिक संख्या में वीरता पुरस्कारों से सम्मानित होने का गौरव हासिल है। उन्होंने यह भी कहा कि यह अद्वितीय विशिष्टता कर्तव्य पालन में बल के बहादुर जवानों के सर्वोच्च बलिदान के माध्यम से संभव हो रही है।
किशन रेड्डी ने कहा कि भारत के प्रधानमंत्री ने लालकिले की प्राचीर से अपने भाषण के दौरान “अमृत काल” के युग का सूत्रपात किया और राष्ट्र की प्रगति की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रधानमंत्री का विजन है कि इस अमृत काल में, पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत के विकास इंजन के रूप में स्थापित होगा। उन्होंने कहा कि इस विजन के अनुरूप, पूर्वोत्तर क्षेत्र में एक नए युग का सूत्रपात हुआ है और सभी क्षेत्रों, चाहे वह अवसंरचना हो, कनेक्टिविटी हो, शांति और स्थिरता हो, में तेजी से विकास हुआ है। किशन रेड्डी ने कहा कि 8,000 से अधिक सशस्त्र कैडर ने आत्मसमर्पण किया और मुख्यधारा में शामिल हुए तथा प्रधानमंत्री के नेतृत्व में कई शांति समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं।
किशन रेड्डी ने क्षेत्र में सरकार की विभिन्न उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पिछले 9 वर्षों में 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक व्यय किए गए हैं जिससे कि यह सुनिश्चित किया जा सके कि क्षेत्र में विकास और 17 नए हवाई अड्डे, 1.05 लाख रुपये की चल रही सड़क परियोजनाएं और 77,930 करोड़ रुपये की वर्तमान में चल रही रेल परियोजनाओं जैसी कई मेगा कनेक्टिविटी परियोजनाएं आदि जारी रहें। आज लोगों के लिए विकास के अनगिनत अवसर खोलने के लिए पूर्वोत्तर में हर सेक्टर में तेजी लाई जा रही है।
उन्होंने कहा कि असम राइफल्स का पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए इस नए प्रतिमान को हासिल करने में बड़ा योगदान है। उन्होंने यह भी कहा कि शांति के इस युग ने हमने पूर्वोत्तर क्षेत्र को वास्तविक क्षमता अर्जित करने में सक्षम बनाया है और कहा कि अब हम पूर्वोत्तर राज्यों में आयोजित होने वाले विभिन्न जी20 शिखर सम्मेलनों के दौरान विश्व समुदाय के सामने विभिन्न सेक्टरों में अपनी शक्ति का आत्मविश्वासपूर्वक प्रदर्शन कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे क्षेत्र में आयोजित होने वाले ये जी20 सम्मेलन अष्टलक्ष्मी राज्यों को भारत के विकास केंद्रों के रूप में स्थापित करने में सहायता करेंगे।
किशन रेड्डी ने आपदा प्रबंधन कार्यों के दौरान बल के प्रयासों की सराहना की और इस तथ्य की प्रशंसा की कि बल को उनकी शक्ति और टीम वर्क के दुर्लभ प्रदर्शन के कारण ऐसे समय में एनडीआरएफ की एक इकाई के रूप में प्रतिनियुक्त किया गया है। जी. किशन रेड्डी ने क्षेत्र में नशीले पदार्थों और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी का मुकाबला करने के लिए असम राइफल के प्रयासों की भी सराहना की।
जी. किशन रेड्डी ने बल की राइफल महिलाओं को प्रोत्साहित किया और न केवल भारत में बल्कि विश्व भर में शांतिवाहिनी सेना में उनके योगदान तथा भारत की नारी शक्ति के प्रतीक बनने के लिए उनकी सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि असम राइफल्स ने कई अवसरों पर कर्तव्य पालन से भी आगे बढ़ कर चिकित्सा शिविर, महिला सशक्तिकरण योजनाओं, राष्ट्रीय समेकन पर्यटन आदि जैसे विभिन्न नागरिक कार्रवाई परियोजनाओं में उत्साहपूर्वक भाग लिया है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सहयोगों ने स्थानीय लोगों की व्यापक रूप से सहायता की है।
किशन रेड्डी ने कहा कि क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता के लिए किए गए समर्पण, उत्साह और बलिदान के लिए बल को सही अर्थों में ‘पूर्वोत्तर का प्रहरी’ और ‘पर्वतीय लोगों का मित्र’ कहा जाता है।
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