ग्लासगो में चल रहे कॉप जलवायु शिखर सम्मेलन का आज समापन हो रहा है। सम्मेलन में जलवायु के लिए धन जुटाने, जलवायु अनुकूलन को मजबूत करने, प्रौद्योगिकी विकास और हस्तांतरण तथा वैश्विक तापमान में वृद्धि को कम करने से संबंधित पेरिस समझौते के लक्ष्यों तक पहुंचने के लिए चर्चा हुई। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारत 2030 तक अपनी गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता को 500 गीगावाट तक बढा लेगा और अक्षय ऊर्जा के माध्यम से अपनी ऊर्जा आवश्यकता का 50 प्रतिशत पूरा कर लेगा।
जलवायु वित्त के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जलवायु से निपटने के लिए आवश्यक धनराशि पूरी नहीं हुई है और जलवायु परिवर्तन के लिए विकसित देशों को जल्द से जल्द एक र्टिलियन डॉलर की व्यवस्था कर लेनी चाहिए।
क्लाइमेट फाइनेंस को लेकर आज तक किये गए वायदे खोखले साबित ही हुए हैं। जब हम सभी क्लामेट एक्शन पर अपने एंबीशन बढ़ा रहे हैं तब क्लाइमेट फाइनेंस पर विश्व के एंबीशन वहीं नहीं रह सकते जो पेरिस एग्रीमेंट के समय थे। आज जब भारत ने एक नये कमीटमेंट और एक नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया है। तो ऐसे समय में क्लाइमेंट फाइनेंस और लो कास्ट क्लामेंट टेक्नोलॉजी का ट्रांसफर और महत्वपूर्ण हो जाता है। भारत की अपेक्षा है कि विकसित देश जल्द से जल्द वन ट्रिलियन डॉलर का क्लामेट फाइनेंस उपलब्ध करायें।
प्रधानमंत्री मोदी ने ग्लासगो शिखर सम्मेलन में वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड का शुभारंभ किया था। इस पहल में एक वैश्विक ग्रिड स्थापित किया जायेगा जो सौर ऊर्जा को बढाने में सक्षम होगा। जलवायु वित्त पोषण पर अमीर राष्ट्र अपने वादे पूरे नहीं कर रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय सतत विकास संस्थान के महानिदेशक डॉक्टर श्रीकांत पाणिग्रही ने जलवायु वित्तपोषण के बारे में बात की।
अमरीका एक सदस्य देश के रूप में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन शामिल हो गया है।
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