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ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले नौ वर्षों में गरीबों के लिए 2.63 करोड़ घर निर्मित किये गए: आर्थिक सर्वेक्षण

केंद्रीय वित्त और कॉर्पोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में आर्थिक सर्वेक्षण 2024 पेश करते हुए कहा कि ग्रामीण भारत में एकीकृत और सतत विकास, सरकार की रणनीति के केंद्र में है। विकेंद्रीकृत योजना निर्माण, ऋण तक बेहतर पहुँच, महिलाओं का सशक्तिकरण, मूलभूत आवास सुविधा, शिक्षा आदि के माध्यम से समग्र आर्थिक खुशहाली पर ध्यान केंद्रित किया गया है।

ग्रामीण भारत में जीवन की गुणवत्ता में सुधार

आर्थिक सर्वेक्षण में उल्लेख किया गया है कि प्राथमिक सुविधाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और वित्तीय समावेश के मामले में ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता बेहतर हुई है। प्राथमिक सुविधाओं के मामले में, स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण के तहत 11.57 करोड़ शौचालयों का निर्माण किया गया और 10 जुलाई 2024 तक जल जीवन मिशन के तहत 11.7 करोड़ घरों को नल से पेयजल की आपूर्ति की सुविधा दी गयी है। सर्वेक्षण ने उल्लेख किया है कि पीएम-आवास-ग्रामीण के तहत पिछले नौ वर्षों में (10 जुलाई 2024 तक) गरीबों के लिए 2.63 करोड़ घरों का निर्माण किया गया है

इसके अलावा, 26 जून 2024 तक प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के तहत 35.7 करोड़ रुपे डेबिट कार्ड जारी किए गए हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेश का विस्तार हुआ है। स्वास्थ्य क्षेत्र में, 1.58 लाख उपकेंद्रों और 24,935 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के परिणामस्वरूप ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है।

मनरेगा के सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना और आधुनिक बनाना

आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 ने कहा है कि मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) में लीकेज को खत्म करने के लिए, काम से पहले, काम के दौरान और काम के बाद भू-टैगिंग की जा रही है और 99.9 प्रतिशत भुगतान राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक प्रबंधन प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है।

सर्वेक्षण में कहा गया है कि मनरेगा ने सृजित व्यक्ति-दिवस और महिला भागीदारी दर के संदर्भ में महत्वपूर्ण प्रगति की है। सृजित व्यक्ति-दिवस 2019-20 के 265.4 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 309.2 करोड़ (एमआईएस के अनुसार) हो गए हैं और महिला भागीदारी दर 2019-20 के 54.8 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 58.9 प्रतिशत हो गई है।

आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि मनरेगा स्थायी आजीविका विविधीकरण के लिए परिसंपत्ति निर्माण कार्यक्रम के रूप में विकसित हुआ है, जैसा ‘व्यक्तिगत भूमि पर काम’ से जुड़ी व्यक्तिगत लाभार्थी हिस्सेदारी में वृद्धि से देखा जा सकता है, जो वित्त वर्ष 14 में कुल पूर्ण किए गए कार्यों के 9.6 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 24 में 73.3 प्रतिशत हो गई है।

जमीनी स्तर पर ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देना

सरकार ने किफायती वित्त तक निर्बाध पहुँच और आकर्षक बाज़ार अवसर पैदा करने पर विशेष ध्यान देने के साथ जीवंत योजनाबद्ध कार्यक्रमों को लागू करके ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देना जारी रखा है। दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम), लखपति दीदी पहल और दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल्य योजना (डीडीयू-जीकेवाई) जैसी योजनाओं और कार्यक्रमों ने ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सृजन और वित्त तक आसान पहुँच में वृद्धि की है।

ग्रामीण शासन के लिए डिजिटलीकरण पहल

ई-ग्राम स्वराज, स्वामित्व योजना, भू-आधार जैसी डिजिटलीकरण पहलों ने ग्रामीण शासन में सुधार किया है। स्वामित्व योजना के तहत, 2.90 लाख गांवों का ड्रोन सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और 1.66 करोड़ संपत्ति कार्ड तैयार किए गए हैं। आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया है कि 2015 से 2021 के बीच ग्रामीण इंटरनेट उपयोगकर्ताओं में 200 प्रतिशत की वृद्धि से गांव और प्रशासनिक मुख्यालय के बीच की दूरी कम हो सकती है, जिससे क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।

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