क्वाड सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों ने मुक्त और खुले भारत-प्रशांत क्षेत्र, जो कि समावेशी और लचीला है, उसे समर्थन देने की प्रतिबद्धता दोहराई है। संयुक्त वक्तव्य में नेताओं ने स्वतंत्रता, कानून के शासन, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता, विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और भारत-प्रशांत क्षेत्र की समृद्धि के सिद्धांतों को समर्थन देने की बात दोहराई। विदेश मंत्री डॉक्टर एस जयशंकर ने आज नई दिल्ली में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में अमरीका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिकेन, जापान के विदेश मंत्री योशीमासा हायाशी और ऑस्ट्रेलिया के विदेश मंत्री पेनी वोंग शामिल हुए। वक्तव्य में कहा गया है कि क्वाड, क्षेत्रीय और वैश्विक बेहतरी के लिए एक शक्ति के रूप में काम करेगा और भारत-प्रशांत क्षेत्र की प्राथमिकताओं से अपनी सकारात्मक और रचनात्मक कार्यसूची के माध्यम से मार्गदर्शन प्राप्त करेगा। नेताओं ने स्वास्थ्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा अंतरण, महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकी, बुनियादी ढांचा, कनेक्टिविटी, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद का मुकाबला जैसी सामयिक चुनौतियों पर व्यावहारिक सहयोग के माध्यम से क्षेत्र के समर्थन की बात दोहराई।
यूक्रेन-रूस युद्ध पर वक्तव्य में कहा गया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर सहित अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुरूप यूक्रेन में व्यापक, उचित और स्थाई शांति की आवश्यकता है। नेताओं ने जोर देकर कहा कि नियम आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था को संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता, पारदर्शिता और विवादों के शांतिपूर्वक समाधान का सम्मान करना चाहिए। क्वाड के विदेश मंत्रियों ने 16 फरवरी 2023 को एक और इंटरकांटिनेंटल बैलेस्टिक मिसाइल छोड़े जाने की निंदा की और कहा कि यह संयुक्त राष्ट्र परिषद् के प्रस्तावों का उल्लंघन है। नेताओं ने कहा कि क्वाड के सदस्य देश, कोरिया प्रायद्वीप के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण के प्रति वचनबद्ध हैं और उन्होंने उत्तर कोरिया से अपील की कि वह संयुक्त राष्ट्र परिषद् प्रस्तावों के अंतर्गत अपने दायित्वों का पालन करे।
विदेश मंत्रियों ने आतंकी गतिविधियों में मानव रहित हवाई प्रणालियों जैसी उभरती और विकसित हो रही प्रौद्योगिकियों के उपयोग को लेकर भी चिंता व्यक्त की। नेताओं ने आतंकवाद और हिंसक उग्रवाद के सभी स्वरूप और आकार की निंदा की। उन्होंने आतंकवाद की परोक्षी के इस्तेमाल की निंदा की और आतंकी संगठनों के लिए किसी प्रकार के लॉजेस्टिक, वित्तीय और सैन्य समर्थन से इंकार करने के महत्व पर बल दिया। म्यांमा की स्थिति पर नेताओं ने शांति, स्थिरता और समृद्धि बनाए रखने के महत्व पर बल दिया और म्यांमा में बिगड़ती स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। नेताओं ने कहा कि हिंसा पर पूर्ण रोक और मनमाने ढंग से हिरासत में लिए गए लोगों की रिहाई की आवश्यकता है।
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