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केवल महाराष्ट्र ही नहीं, मध्य भारत के सभी सीमावर्ती राज्यों के रोगियों को सस्ती और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं मिलेंगी: नितिन गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री डॉ. भारती प्रवीण पवार की उपस्थिति में एम्स नागपुर के तीसरे स्थापना दिवस के अवसर पर एक डिजिटल कार्यक्रम की अध्यक्षता की। इस अवसर पर राज्यसभा से संसद सदस्य डॉ. विकास महात्मे और महाराष्ट्र के ऊर्जा एवं संरक्षक मंत्री (नागपुर) डॉ. नितिन राउत भी उपस्थित थे।

संस्थान के अध्यक्ष, निदेशक, कर्मचारियों और छात्रों को बधाई देते हुए, गडकरी ने कहा कि विदर्भ क्षेत्र की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए नागपुर एम्स जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की स्थापना के साथ, मध्य भारत के सभी सीमावर्ती राज्यों के रोगियों को यहां सस्ती और आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होंगी। उन्‍होंने कहा कि हालांकि, हमें यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इन सुविधाओं का लाभ न केवल शहरों बल्कि हमारे क्षेत्र के दूरदराज के गांवों के लोगों तक भी पहुंचे।

क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने के लिए हाल ही में निर्मित एम्‍स संस्‍थानों को आवश्‍यक बताते हुए नितिन गडकरी ने कहा कि वर्तमान एम्स की संख्या को दोगुना करने से भारत की आकांक्षाओं को बेहतर ढंग से पूरा किया जा सकेगा।

डॉ. पवार ने प्रसन्‍नता व्यक्त की कि सरकार के प्रयासों के कारण देश के वंचित क्षेत्रों को तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं मिल रही हैं। उन्‍होंने कहा कि हम सभी जानते हैं कि आजादी के इतने दशकों के बाद भी देश में केवल 6 एम्स बनाए गए थे। तत्पश्चात वर्ष 2014 में सरकार ने प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी जी के नेतृत्व में हर राज्य में एम्स का निर्माण करने की नीति तैयार की।

एम्स नागपुर से शैक्षिक और रोगी सेवाओं में सकारात्मक प्रभाव पर अपने विचार-व्‍यक्‍त करते हुए उन्होंने कहा कि इस संस्थान ने स्नातकोत्तर और पीएचडी-2020 में शैक्षिक पाठ्यक्रम का शुभारंभ किया था जो बेहद उल्लेखनीय है। उन्‍होंने कहा कि उन्‍हें जानकारी दी गई है कि संस्थान ने स्नातक और स्नातकोत्तर मेडिकल छात्रों के लिए प्रशिक्षण की विभिन्न पद्धतियां विकसित की हैं, जो राष्ट्रीय महत्व के इस संस्थान में उच्च गुणवत्ता मानकों को दर्शाता है।

उन्‍होंने कहा कि भारत के स्‍वास्‍थ्‍य देखभाल कार्मिकों की सहायता से कोविड के लिए मजबूत जन स्वास्थ्य प्रतिक्रिया तंत्र को स्थापित करने की दृष्टि से भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कोविड महामारी के दौरान संस्थान की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यह सुनिश्चित किया है। मंत्री महोदय ने कोविड महामारी की दूसरी लहर के दौरान कोविड मरीजों को वेंटिलेटर, अस्पताल के बिस्तर, ऑक्सीजन सिलेंडर, पीपीई किट, मास्क और जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता आदि को प्राथमिकता देते हुए डायलिसिस की भी सुविधा प्रदान करने के लिए संस्थान की सराहना की।

एक चिकित्‍सक के रूप में अपने समृद्ध अनुभव साझा करते हुए उन्‍होंने मेडिकल छात्रों और समुदाय को सलाह दी कि रोगी के लिए चिकित्सा उपचार, सहानुभूति और भावनात्मक देखभाल समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। डॉ. पवार ने कहा कि यह स्वास्थ्य सेवा प्रदाता और देखभाल टीम के प्रत्येक सदस्य की यह मुख्य जिम्मेदारी है, क्‍योंकि रोगी अपनी बीमारी के समय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा नर्सों, चिकित्सा सहायकों और रिसेप्शनिस्टों के साथ वार्तालाप करने में बिताते हैं। ये संवाद रोगियों के प्रति करुणा और सहानुभूति प्रदर्शित करने के कई अवसर प्रदान कर सकता है। इसलिए रोगी की देखभाल सुनिश्चित करने के लिए समग्र प्रशिक्षण के साथ-साथ सहानुभूतिपूर्वक रोगी की देखभाल के लिए कर्मचारियों को प्रोत्साहित करना चिकित्‍सा देखभाल को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करेगा।

उन्होंने गरीबों के इलाज की लागत को कम करने और डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ आधुनिक उपचार सुविधाओं को प्राथमिकता देते हुए निवारक देखभाल पर जोर देते हुए केंद्र सरकार के प्रयासों को रेखांकित किया। उन्होंने मिलकर कार्य करने के लिए एम्स नागपुर समुदाय का स्वागत किया ताकि देश के विकास कार्यों को समर्पण और दृढ़ता के साथ आगे बढ़ाया जा सके।

उन्होंने आशा व्यक्त की कि संस्थान भारत सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य पहलों के प्रभावी कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्‍होंने आशा व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि कई चुनौतियाँ के बावजूद वे सभी बाधाओं को दूर करते हुए अधिक से अधिक ऊंचाइयों को प्राप्त करेंगे और राज्य के अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के लिए एक आदर्श बनेंगे।

इस अवसर पर संस्थान की पत्रिका “अभिज्ञानम” के शुभारंभ अंक का भी विमोचन किया गया।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण, एम्स नागपुर के अध्यक्ष डॉ. पीके दवे, एम्स, नागपुर की निदेशक और मुख्‍य कार्यकारी अधिकारी मेजर जनरल डॉ. विभा दत्ता और अन्य वरिष्ठ चिकित्‍सक एवं प्रशासक भी इस उपस्थित थे।

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