केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज नई दिल्ली में कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग मुख्यालय में सरकारी कर्मचारियों के लिए क्षमता निर्माण योजना (सीबीपी) का शुभारंभ किया।
यह योजना कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के परामर्श से क्षमता निर्माण आयोग (सीबीसी) द्वारा शुरू की गई है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस अवसर पर कहा कि सीबीपी अधिकारियों को प्रशिक्षित करने और कौशल तथा अर्जित दक्षताओं के आधार पर अधिकारियों और कर्मचारियों की तैनाती को तर्कसंगत बनाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की एक नई पहल है। यह सरकारी कार्यालयों के परिवर्तन पर बल देता है।
उन्होंने कहा – “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ई-गवर्नेंस पर बल दिया है जिससे सरकार में कामकाज आसान, आर्थिक और पर्यावरण अनुकूल हो सके। आसान का अर्थ है विस्तृत, ई-ऑफिस अर्थव्यवस्था की ओर ले जाता है, जबकि फाइल वर्क से छुटकारा पाने से न केवल समय की बचत होती है बल्कि यह पर्यावरण अनुकूल भी है। पीएम मोदी द्वारा शुरू किए गए प्रशासनिक सुधारों का उद्देश्य एक कुशल, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन बनाना है”।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कर्मयोगी प्रारंभ मॉड्यूल को सभी सरकारी कर्मचारियों के इंडक्शन प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया है और इसे रोजगार मेले के तहत सरकारी सेवा में शामिल होने वाली नई भर्ती के लिए लागू किया गया है, जिसकी छठी अगली कड़ी कल आयोजित की गई थी, जिसमें 51,000 से युवाओं को पीएम मोदी द्वारा नियुक्ति पत्र सौंपे गए।
डॉ. जितेन्द्र सिंह ने सीबीसी से विभिन्न प्रशिक्षण मॉड्यूल को लगातार अद्यतन और संशोधित करने का आह्वान किया क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारी सीखने और कार्य संस्कृति को प्रभावित करने वाला है। उन्होंने कहा, “प्रौद्योगिकी के इस युग में दोगुना होने का समय पांच वर्ष से घटकर एक वर्ष से भी कम हो गया है।”
एएसओ स्तर से लेकर जेएस तक सभी स्तरों के सरकारी कर्मचारियों के लिए आईजीओटी प्रशिक्षण मॉड्यूल और यहां तक कि सचिवों के लिए कुछ चुनिंदा पाठ्यक्रमों के लिए सीबीपी की सराहना करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने सीबीसी अध्यक्ष श्री आदिल ज़ैनुलभाई से मंत्रियों के लिए एक समान प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार करने के लिए भी कहा।
सीबीसी अध्यक्ष ने मंत्री महोदय को बताया कि आईजीओटी प्लेटफॉर्म पर 700 पाठ्यक्रम प्रस्तुत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि लगभग 30 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारियों में से 10 लाख कर्मचारी रेलवे में हैं, अन्य 10 लाख सीएपीएफ में हैं और शेष 10 लाख शेष मंत्रालयों और विभागों में हैं। 80 प्रतिशत कौशल कार्यात्मक और व्यवहारिक कौशल से संबंधित सामान्य हैं जबकि केवल 20 प्रतिशत विशिष्ट कार्यों और भूमिकाओं से संबंधित डोमेन उन्मुख हैं। उन्होंने कहा कि मिशन कर्मयोगी और आईजीओटी का लक्ष्य ‘कर्मचारियों’ को ‘कर्मयोगियों’ में बदलना है।
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