प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने आज विकेन्द्रीकृत घरेलू अपशिष्ट जल प्रबंधन के क्षेत्र में जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण विभाग (डीओडब्ल्यूआर, आरडी एंड जीआर), जल शक्ति मंत्रालय और जापान के पर्यावरण मंत्रालय के बीच हस्ताक्षरित एक सहयोग ज्ञापन (एमओसी) को कार्योत्तर मंजूरी दे दी है।
कार्यान्वयन की रणनीति और लक्ष्य: एक प्रबंधन परिषद (एमसी) का गठन किया जाएगा, जो सहयोग की विस्तृत गतिविधियों को निर्धारित करके और इन गतिविधियों की प्रगति की निगरानी के माध्यम से इस सहयोग ज्ञापन (एमओसी) के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार होगी।
मुख्य प्रभाव: इस सहयोग ज्ञापन (एमओसी) के माध्यम से विकेन्द्रीकृत घरेलू अपशिष्ट जल प्रबंधन और जोहकासौ प्रौद्योगिकी का उपयोग करके शोधित अपशिष्ट जल के प्रभावी दोबारा उपयोग जैसे क्षेत्रों में जापान के साथ सहयोग बेहद उपयोगी साबित होगा। अपशिष्ट जल के प्रबंधन से संबद्ध यह विकेन्द्रीकृत जोहकासौ प्रणाली जल जीवन मिशन के कवरेज के तहत आनेवाली बस्तियों से निकले अपशिष्ट/गंदे पानी के प्रबंधन साथ-साथ इस मिशन के तहत ताजे पानी के स्रोतों की निरंतरता के अलावा नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत इसी तरह की स्थितियों के लिए बेहद प्रभावकारी हो सकती है। जापान के साथ सहयोग का यह कदम शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) को अपशिष्ट जल के शोधन की जटिल समस्या से निपटने के लिए बेहतर योजना बनाने में मदद करेगा।
संलग्न व्यय: इस सहयोग ज्ञापन (एमओसी) के तहत दोनों पक्षों पर कोई वित्तीय दायित्व नहीं होगा। इस एमओसी के तहत विभिन्न गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के लिए, मामले– विशेष में अन्य बातों के अलावा संबंधित क्षेत्रों से जुड़े विस्तृत विनिर्देशों के साथ-साथ अन्य प्रासंगिक मुद्दों जैसे कि जरूरी होने पर ऐसे मामले-विशेष के कार्यक्रम एवं परियोजना की वित्तीय व्यवस्था को कवर करते हुए पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट, व्यवहार्यता रिपोर्ट और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट जैसे विस्तृत दस्तावेज तैयार किए जा सकते हैं।
बिंदुवार विवरण: विकेन्द्रीकृत घरेलू अपशिष्ट जल प्रबंधन के क्षेत्र में जल संसाधन, नदी विकास एवं एवं गंगा संरक्षण विभाग (डीओडब्ल्यूआर, आरडी एंड जीआर), जल शक्ति मंत्रालय (एमओजेएस) और जापान के पर्यावरण मंत्रालय के बीच एक सहयोग ज्ञापन (एमओसी) पर 19 मार्च 2022 को हस्ताक्षर किए गए। दोनों देशों के बीच समानता और पारस्परिक लाभ के सिद्धांतों के आधार पर सार्वजनिक जल क्षेत्रों में जलीय पर्यावरण के संरक्षण और सार्वजनिक स्वास्थ्य में सुधार के उद्देश्य से विकेन्द्रीकृत घरेलू अपशिष्ट जल प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देने के लिए इस सहयोग ज्ञापन (एमओसी) पर हस्ताक्षर किए गए थे।
विकेन्द्रीकृत घरेलू अपशिष्ट जल प्रबंधन की क्षमता को मजबूत करने, उसे सुगम बनाने और विकसित करने के उद्देश्य से भारत गणराज्य के जल संसाधन, नदी विकास एवं एवं गंगा संरक्षण विभाग (डीओडब्ल्यूआर, आरडी एंड जीआर), जल शक्ति मंत्रालय (एमओजेएस) और जापान के पर्यावरण मंत्रालय के बीच इस सहयोग ज्ञापन (एमओसी) पर हस्ताक्षर किए गए। सहयोग का दायरा ज्यादातर विकेन्द्रीकृत घरेलू अपशिष्ट जल प्रबंधन और शोधित अपशिष्ट जल का प्रभावी दोबारा उपयोग पर केंद्रित है। इस सहयोग ज्ञापन (एमओसी) के तहत सहयोग के विभिन्न स्वरूप पारस्परिक सहयोग, जिसमें संगोष्ठियों, सम्मेलनों और क्षमता निर्माण के माध्यम से विकेन्द्रीकृत घरेलू अपशिष्ट जल प्रबंधन से संबंधित सूचना और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान शामिल हो सकते हैं लेकिन पारस्परिक हित के क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं रहेंगे, को प्रोत्साहित करेंगे व उसे सुगम बनायेंगे।
इस सहयोग ज्ञापन (एमओसी) के तहत विभिन्न गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने के लिए, मामले – विशेष में अन्य बातों के अलावा संबंधित क्षेत्रों से जुड़े विस्तृत विनिर्देशों के साथ-साथ अन्य प्रासंगिक मुद्दों जैसे कि जरूरी होने पर ऐसे मामले-विशेष के कार्यक्रम एवं परियोजना की वित्तीय व्यवस्था को कवर करते हुए पूर्व-व्यवहार्यता रिपोर्ट, व्यवहार्यता रिपोर्ट और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट जैसे विस्तृत दस्तावेज तैयार किए सकते हैं। दोनों पक्ष एक प्रबंधन परिषद (एमसी) की स्थापना करेंगे, जो सहयोग की विस्तृत गतिविधियों को निर्धारित करके और इन गतिविधियों की प्रगति की निगरानी के माध्यम से इस सहयोग ज्ञापन (एमओसी) के कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार होगी।
पृष्ठभूमि: जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय नीतिगत एवं तकनीकी विशेषज्ञता साझा करने, प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों, कार्यशालाओं, वैज्ञानिक एवं तकनीकी संगोष्ठियों के संचालन, विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और शोध यात्राओं के माध्यम से जल संसाधनों के विकास तथा प्रबंधन के क्षेत्र में अन्य देशों के साथ द्विपक्षीय सहयोग की परिकल्पना कर रहा है। भारत और जापान के बीच वर्तमान में जारी सहयोग को ध्यान में रखते हुए, विकेन्द्रीकृत शोधन से संबंधित अनुभवों और विशेषज्ञता के आदान-प्रदान के उद्देश्य से जापान के साथ एक समझौता करने का निर्णय लिया गया है।
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