केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज यहां दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन क्षेत्रीय समिति के 76वें सत्र को संबोधित किया। उनके साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनोम घेब्रेयेसस भी इस सत्र में वर्चुअली उपस्थित थे। डॉ. मांडविया को सर्वसम्मति से दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए क्षेत्रीय समिति के 76वें सत्र का अध्यक्ष भी चुना गया ।
डॉ. पूनम खेत्रपाल सिंह, निदेशक विश्व स्वास्थ्य संगठन, दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए क्षेत्रीय कार्यालय अहमद नसीम, स्वास्थ्य मंत्री मालदीव, डॉ. एलिया एंटोनियो डी अराउजो डॉस रीस अमरल, स्वास्थ्य मंत्री, तिमोर लेस्ते, डॉ. सीता अरामबेपोला, स्वास्थ्य मंत्री श्रीलंका, मोहन बहादुर बस्नेत, स्वास्थ्य मंत्री नेपाल, कोरिया गणराज्य के भारत में राजदूत चो हुई चोल, जाहिद मलेक बांग्लादेश के स्वास्थ्य मंत्री, डॉ . पोंगसाडहॉर्न पोकपर्मडी, डॉ. सिरिफ़ा लिज़ा मुनीरा इंडोनेशिया के स्वास्थ्य मंत्रालय में स्वास्थ्य महानिदेशक और पेम्बा वांगचुक भूटान के स्वास्थ्य मंत्रालय में कार्यवाहक सचिव भी इस सत्र में उपस्थित थे।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन को दोहराते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य ही सबसे बड़ा धन है और अच्छे स्वास्थ्य के साथ ही हर काम पूरा किया जा सकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि भारत में हम समग्र और समावेशी दृष्टिकोण अपना रहे हैं। हम स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रहे हैं और चिकित्सा की पारंपरिक प्रणालियों को बढ़ावा देकर ‘किसी को भी पीछे नहीं छोड़ने’ के दृढ़ संकल्प के साथ यूनिवर्सल हेल्थ कवरेज के विजन के अनुरूप सभी को किफायती स्वास्थ्य देखभाल सेवा प्रदान रहे हैं।
उपस्थितजनों को संबोधित करते हुए डॉ. मांडविया ने आयुष्मान भारत स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों (एबी-एचडब्ल्यूसी) की प्रगति की सराहना की, जिन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक श्रृंखला उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि 24 अक्टूबर, 2023 के अनुसार एबी-एचडब्ल्यूसी केंद्रों में कें 2,110 मिलियन से अधिक लोगों की संख्या दर्ज हुई। इसका प्रभाव शानदार रहा है, इनसे लोगों ने 1,830 मिलियन से अधिक बार नि:शुल्क दवाइयों और 873 मिलियन से अधिक बार नैदानिक सेवाओं का लाभ उठाया है। उन्होंने यह भी कहा कहा कि 306 मिलियन से अधिक लोगों को शामिल करते हुए 26 मिलियन कल्याण सत्रों का आयोजन किया गया है।
डॉ.मांडविया ने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन और पीएम-एबीएचआईएम जैसी पहलों ने डिजिटल स्वास्थ्य ढांचे और भौतिक बुनियादी ढांचे को काफी सीमा तक मजबूत बनाया है, जिससे देश में स्वास्थ्य देखभाल आपूर्ति में क्रांतिकारी विकास को प्रोत्साहन मिला है। डॉ.मांडविया ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि एबी-एचडब्ल्यूसी के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर लगातार ध्यान दिए जाने से व्यापक रूप से सकारात्मक स्वास्थ्य परिणाम आएंगे, जेब से होने वाले खर्च में कमी आएगी और स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार लाने में लगे अन्य देशों के लिए भी यह एक मॉडल बनेगा।
डॉ. मांडविया ने विश्व स्वास्थ्य संगठन एसईएआरओ बिल्डिंग साइट, आईपी एस्टेट, नई दिल्ली में हो रहे पौधारोपण समारोह में उपस्थिजनों को संबोधित करते हुए कहा कि यह भवन वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए भारत और विश्व स्वास्थ्य संगठन के सहयोगात्मक प्रयास के प्रतीक के रूप में खड़ा है। इसका उद्देश्य दक्षिण-पूर्व क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का समावेशी और एक समान विकास सुनिश्चित करना है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय भवन निर्माण निगम (एनबीसीसी) को प्रदान की गई इस भव्य परियोजना के सफल समापन की सुविधा के लिए भारत ने 239.5 करोड़ रुपये योगदान निधि दी है। इसमें सहयोग के लिए क्षेत्रीय स्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान करने लिए स्वास्थ्य पेशेवरों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान, श्रेष्ठ प्रक्रियाओं को साझा करने और नवाचार समाधान विकसित करने वाले केंद्र की कल्पना की गई है।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव सुधांश पंत ने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (पीएचसी)-उन्मुख स्वास्थ्य प्रणालियों के लिए दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय फोरम की स्थापना, पीएचसी को मजबूत बनाने में बाधा डालने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए ज्ञान को साझा करने और सहयोगात्मक समर्थन को प्रोत्साहन देने की हमारी प्रतिबद्धता वाला एक महत्वपूर्ण क्षण है। पीएचसी-उन्मुख स्वास्थ्य प्रणालियों को अपनाने में सदस्य देशों की प्रगति की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि अब प्रगति ट्रैकिंग और जवाबदेही के लिए अपनी क्षमताओं को बढ़ाने, शहरी स्वास्थ्य देखभाल (यूएचसी)/पीएचसी शासन में भागीदारी तंत्र को संस्थागत बनाने के प्रमुख क्षेत्रों पर पूरा ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। इसके अलावा डब्ल्यूएचओ और राष्ट्रीय प्रणालियों तथा प्रासंगिक बारीकियों के अनुरूप भागीदारों से समन्वित समर्थन को बढ़ावा देने की भी जरूरत है।
डॉ. टेड्रोस एडनोम घेब्रेयेसस ने उपस्थितजनों को वर्चुअली संबोधित किया। उन्होंने कहा कि एसईएआरओ का 76वां सत्र विश्व और क्षेत्र दोनों के लिए ही एक महत्वपूर्ण समय पर आयोजित हो रहा है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र विश्व की एक चौथाई से अधिक जनसंख्या का घर है और इसके बीमारी के भारी बोझ को दूर करना है। तपेदिक से निपटने के लिए इस क्षेत्र के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने सभी के लिए स्वास्थ्य की प्रतिबद्धता के लिए डॉ. मांडविया के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने कहा कि दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र के 11 सदस्य देशों में से 7 ने कम से कम उपेक्षित उष्णकटिबंधीय बीमारियों को खत्म कर दिया है।
इस क्षेत्र के सदस्य देशों द्वारा हासिल की गई प्रगति और उपलब्ध्यिों की सराहना करते हुए, डॉ. पूनम ने 1,50,000 से अधिक आयुष्मान भारत स्वास्थ्य और कल्याण केंद्रों के संचालन में भारत की उपलब्धि की सराहना की और बताया कि पीएचसी पुरस्कार पर 2022 संयुक्त राष्ट्र इंटरएजेंसी टास्क फोर्स और डब्ल्यूएचओ विशेष कार्यक्रम भी आयोजित किया गया जो उच्च रक्तचाप नियंत्रण पहल पर प्राप्त हुआ है जिसमें अब 4 मिलियन से अधिक लोगों का इलाज हुआ है। इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के संयुक्त सचिव मनस्वी कुमार, वरिष्ठ सरकारी अधिकारी और विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
ICC क्या है? क्रिकेट जगत की सबसे बड़ी संस्था की पूरी जानकारी क्रिकेट की दुनिया… Read More
शशि थरूर फिर चर्चा में, बयान और राजनीतिक गतिविधियों पर सबकी नजर कांग्रेस के वरिष्ठ… Read More
RUHS CUET 2026 Result जारी, उम्मीदवारों का इंतजार खत्म राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (RUHS)… Read More
ऑस्ट्रेलिया बनाम पाकिस्तान मैच स्कोरकार्ड: 22 रन से जीता पाकिस्तान ऑस्ट्रेलिया और पाकिस्तान के बीच… Read More
1 जून को बदलेगा मौसम का मिजाज, उत्तर भारत में बारिश और तेज हवाओं का… Read More
Anthropic के Claude AI की खासियतें क्या हैं? Claude AI की सबसे बड़ी विशेषता इसका… Read More
This website uses cookies.
Leave a Comment