केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन के लक्ष्यों को प्राप्त करने और देश के बिजली क्षेत्र में सतत विकास को सुनिश्चित करने के लिए नवाचारों को बढ़ावा देने और वैकल्पिक प्रौद्योगिकियों की खोज करने के लिए हाइड्रो श्रेणी के तहत सतह हाइड्रोकाइनेटिक टर्बाइन (एसएचकेटी) प्रौद्योगिकी को मान्यता दी है।
एसएचकेटी विद्युत ऊर्जा के उत्पादन के लिए व्यावहारिक रूप से शून्य खिंचाव हेड के साथ बहते पानी की गतिज ऊर्जा का उपयोग करता है, जबकि पारंपरिक इकाइयां आवश्यक ‘हेड’ के निर्माण के लिए बांध, डायवर्सन वियर और बैराज जैसे उपयुक्त सिविल संरचनाओं के निर्माण के माध्यम से पानी की संभावित ऊर्जा का उपयोग करती हैं।
यह तकनीक एक ऐसा समाधान है जो बिजली क्षेत्र को बेस-लोड, चौबीसों घंटे अक्षय ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करने में सहायता मिल सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां ग्रिड की पहुंच कम है। सरफेस हाइड्रोकाइनेटिक टर्बाइन को लगाना आसान है और यह लागत प्रभावी है, जिसकी उत्पादन लागत 2-3 रुपये प्रति यूनिट है। यह तकनीक अक्षय ऊर्जा के खरीदारों और निर्माताओं दोनों के लिए फायदा पहुंचाती है।
एसएचकेटी तकनीक को अपनाना, भारत की नहरों, जलविद्युत टेल्रेस चैनल के व्यापक जल अवसंरचना को स्थायी ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोग करने की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा। इस तकनीक में गीगावाट पैमाने पर अपार संभावनाएं हैं, जिसमें अक्षय ऊर्जा से लाभ लेने के बहुत से अवसर हैं, जिससे बिजली क्षेत्र का समग्र विकास होगा।
National Film Awards 2026: ‘आर्टिकल 370’ बनी सर्वश्रेष्ठ फिल्म, कार्तिक आर्यन और ममूटी को मिला… Read More
RBI ने पॉलिमर नोटों की दिशा में बढ़ाया कदम, ₹10 और ₹20 के नोटों से… Read More
AIBE 21 (XXI) 2026: बार काउंसिल जल्द जारी कर सकती है नोटिफिकेशन, जानें रजिस्ट्रेशन और… Read More
Skyroot Aerospace ने अंतरिक्ष मिशनों को दी नई रफ्तार, निजी स्पेस सेक्टर में भारत की… Read More
Kal Ka Rashifal 19 July 2026: चंद्रमा के राशि परिवर्तन से बदलेगा दिन, जानें मेष… Read More
भारत बनाम इंग्लैंड दूसरा वनडे: जो रूट की नाबाद 99 रन की पारी से इंग्लैंड… Read More
This website uses cookies.
Leave a Comment