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केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आगामी 12वें इंडिया केम-2022 की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की

केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आगामी 12वें इंडिया केम -2022 के आयोजन की योजना के लिए बैठक की अध्यक्षता की। इस वर्ष के आयोजन का विषय “विजन 2030-केम एंड पेट्रोकेमिकल्स बिल्ड इंडिया” है। बैठक में रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री भगवंत खुबा, रसायन और पेट्रोरसायन मंत्रालय में सचिव आरती आहूजा भी फिक्की के सदस्यों और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उपस्थित थे।

इस अवसर पर अपने संबोधन में डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा, “यह आयोजन क्षेत्र में सतत विकास के लिए जबरदस्त क्षमता और सहायक सरकारी नीति का प्रदर्शन करेगा। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के ‘मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड’ मिशन को और मजबूत करने के लिए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों तथा अन्य हितधारकों के लिए बातचीत करने और गठबंधन बनाने में एक मंच प्रदान करेगा।” डॉ. मांडविया ने ‘विजन 2030 – केमिकल्स एंड पेट्रोकेमिकल्स बिल्ड इंडिया’ की थीम के साथ 12वें इंडिया केम-2022 के लिए ब्रोशर भी लॉन्च किया।

डॉ. मांडविया ने कहा, “यह आयोजन निवेशकों और अवसरों की पहचान करने का अवसर प्रदान करेगा। जबकि भारत सरकार अपनी “कारोबारी सुगमता” संबंधी नीतियों और प्रोत्साहनों के साथ वैश्विक निवेशकों के लिए एक अनुकूल इको-सिस्टम प्रदान कर रही है। आगामी वैश्विक कार्यक्रम भारत को रसायन क्षेत्र में निवेशकों और हितधारकों के लिए एक अनुकूल गंतव्य के रूप में प्रदर्शित करेगा।”

12वें इंडिया केम-2022 का आयोजन एशिया-प्रशांत क्षेत्र में रासायनिक और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र के सबसे बड़े आयोजनों में से एक है। रसायन और पेट्रोकेमिकल विभाग द्वारा फिक्की के सहयोग से 6- 8 अक्टूबर, 2022 के बीच इसे आयोजित किया जाएगा।

इंडिया केम प्रदर्शनी का उद्देश्य भारतीय रासायनिक उद्योग और विभिन्न उद्योग क्षेत्रों (जैसे रसायन, पेट्रोकेमिकल, कृषि रसायन उद्योग, प्रक्रिया और मशीनरी) की विशाल क्षमता को प्रदर्शित करना है, जो कि सरकार की सहायक नीति, निवेशकों के लिए प्रमुख निवेश के अवसरों के माध्यम से प्रदान किए गए अनुकूल इको-सिस्टम के संदर्भ में है। भारतीय रसायन और पेट्रोरसायन क्षेत्र के बाजार का आकार वर्तमान में 178 बिलियन अमरीकी डालर है। यह क्षेत्र प्रधानमंत्री की मेक इन इंडिया और मेक फॉर द वर्ल्ड की पहल का समर्थन करता है। रसायन और पेट्रोरसायन क्षेत्र भारत को एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र में बदल सकता है। भारत न केवल विश्व का छठा सबसे बड़ा रसायन उत्पादक देश है, बल्कि 175 से अधिक देशों को रसायनों का निर्यात भी करता है। यह भारत के कुल निर्यात का 13 प्रतिशत हिस्सा है।

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