काशी तमिल संगमम कल वाराणसी में शुरू हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल इस समागम का औपचारिक उद्धाटन करेंगे। महीने भर चलने वाले इस आयोजन के दौरान तमिलनाडु से बारह विभिन्न श्रेणियों के प्रतिनिधि काशी आएंगे और अपने समकक्षों के साथ विचार विमर्श करेंगे। प्रतिनिधियों के भव्य स्वागत की तैयारियां जोरों पर हैं।
काशिल्लै उंगललैलार्युम वरवैगिरम। यानी काशी में आपका स्वागत है। और दो प्राचीन संस्कृतियों के समागम के इस अभूतपूर्व आयोजन के लिए काशीवासी पूरी तरह से तैयार हैं। आज रात पहुंचने वाले तमिलनाडु के प्रतिनिधियों का जोरदार स्वागत किया जाएगा और कल होने वाले उद्घाटन समारोह में वो हिस्सा लेंगे। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सभी तैयारियों का जायजा लेने के लिए कल रात ही वाराणसी पहुंच चुके हैं। काशी की मेयर मृदुला जायसवाल ने कहा कि यह आयोजन दो संस्कृतियों को करीब लाने और सदियों पुराने संबंधों को और विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
प्रधानमंत्री के विजन से निर्देशित, ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ के विचार को प्रोत्साहित करना सरकार के प्रमुख फोकस क्षेत्रों में एक रहा है। इस विजन को प्रतिबिंबित करने वाली एक अन्य पहल में काशी (वाराणसी) में एक महीने तक चलने वाले कार्यक्रम ‘काशी तमिल संगमम’ का आयोजन किया जा रहा है और इसका उद्घाटन 19 नवंबर को प्रधानमंत्री द्वारा किया जाएगा।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य तमिलनाडु और काशी के बीच सदियों पुराने संबंधों का उत्सव मनाना, पुन: पुष्टि करना और फिर से खोज करना है। तमिलनाडु और काशी देश के दो सबसे महत्वपूर्ण और प्राचीन शिक्षा केंद्र हैं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य दोनों क्षेत्रों के विद्वानों, विद्यार्थियों, दार्शनिकों, व्यापारियों, कारीगरों, कलाकारों आदि सहित जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों को एक साथ आने, अपने ज्ञान, संस्कृति और श्रेष्ठ प्रथाओं को साझा करने तथा एक दूसरे के अनुभव से सीखने का अवसर प्रदान करना है। इस कार्यक्रम में तमिलनाडु के 2500 से अधिक प्रतिनिधि काशी आएंगे। वे समान व्यापार, पेशे और रुचि के स्थानीय लोगों के साथ बातचीत करने के लिए संगोष्ठियों, साइट के दौरे आदि में भाग लेंगे। दोनों क्षेत्रों के हथकरघा, हस्तशिल्प, ओडीओपी उत्पादों, पुस्तकों, वृत्तचित्रों, व्यंजनों, कला रूपों, इतिहास, पर्यटन स्थलों आदि की एक महीने की प्रदर्शनी भी काशी में लगाई जाएगी।
यह प्रयास राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के ज्ञान की आधुनिक प्रणालियों के साथ भारतीय ज्ञान प्रणालियों के धन को एकीकृत करने पर बल देने के अनुरूप है। कार्यक्रम क्रियान्वयन के लिए आईआईटी मद्रास और बीएचयू दो एजेंसियां हैं।
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