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एशिया का सबसे बड़ा आहार और आतिथ्य सत्कार मेला आज से नई दिल्ली के प्रगति मैदान में शुरू

खाद्य तथा आवभगत क्षेत्र में छुपी असीम संभावना का दोहन करने के लिए, कृषि तथा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण ( एपीडा ) भारत व्यापार संवर्धन संगठन ( आईटीपीओे ) के सहयोग से 26 से 30 अप्रैल 2022 तक प्रगति मैदान में एशिया के सबसे बड़े बी2बी अंतरराष्ट्रीय खाद्य तथा आवभगत मेला आहार 2022 का आयोजन कर रहा है।

माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘ लोकल फॉर वोकल ‘ तथा आत्म निर्भर भारत ‘ की अपील को ध्यान में रखते हुए एपीडा ‘‘भौगोलिक संकेतक उत्पाद ‘ की थीम के साथ आहार के 36 वें संस्करण का आयोजन कर रहा है क्योंकि एपीडा जीआई प्रमाणित कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

आहार खाद्य एवं पेय पदार्थ उद्योग में वैश्विक कंपनियों को कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद प्रदर्शित करने के लिए एपीडा द्वारा निर्यात संवर्धन पहलों की श्रृंखला का एक हिस्सा है जो वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत कार्य करता है क्योंकि इस मेले में विश्व के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में आयातक भाग लेते हैं।

आहार के अतिरिक्त, एपीडा कृषि उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए जैविक विश्व कांग्रेस, बायोफैच इंडिया आदि जैसे राष्ट्रीय कार्यक्रमों का भी आयोजन करता है।

उल्लेखनीय है कि जी आई रजिस्ट्री द्वारा जीआई के रूप में 150 से अधिक खाद्य तथा कृषि उत्पादों को पंजीकृत किया गया है जिसमें से मार्च, 2022 तक 123 जीआई उत्पाद एपीडा के वर्ग के तहत आते हैं।

एपीडा ने आहार में भू तल पर सभा कक्ष संख्या 3 में 3,000 वर्ग मीटर के एक क्षेत्र में थीम पैवेलियन की स्थापना की है जहां जीआई के पंजीकृत स्वामियों को उनके उत्पादों को प्रदर्शित करने के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

कृषि उत्पादों की विभिन्न श्रेणियों, जिनमें जीआई उत्पाद, प्रसंस्कृत खाद्य, जैविक, फ्रोजेन खाद्य उत्पाद, मोटे अनाज आदि शामिल हैं] के 80 से अधिक निर्यातक एपीडा पैवेलियन के तहत भाग ले रहे हैं।

मेले में, खाने के लिए तैयार (रेडी टू इट यानी आरटीई), परोसने के लिए तैयार (आरटीएस) रेडी टू कंज्यूम (आरटीसी), पौध आधारित मांस उत्पाद, डिहाइड्रेटेड उत्पाद, चाकलेट, अनाज, फ्रोजेन खाद्य उत्पाद, हर्बल उत्पाद, जूस, शहद, डेयरी उत्पाद आदि के रेंज के उत्पादों को कई अग्रणी देशों के आयातकों के समक्ष भारतीय विनिर्माताओं द्वारा प्रदर्शित किया जाएगा।

इसके अतिरिक्त, एपीडा ने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र (एनईआर) तथा जम्मू एवं कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड एवं हिमाचल प्रदेश जैसे हिमालयी राज्यों के निर्यातकों, महिला उद्यमियों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), स्टार्ट अप्स और मोटे अनाज के निर्यातकों तथा मोटे अनाज उत्पादों के लिए समर्पित स्टालों का सृजन किया है। इन श्रेणियों के तहत 40 से अधिक भागीदार हिस्सा ले रहे हैं तथा प्रत्येक श्रेणी के पास एपीडा पैवेलियन में समर्पित स्टाल होगे।

एपीडा बास्केट के तहत उत्पादों में प्रसंस्कृत खाद्य, अल्कोहल युक्त तथा गैर अल्कोहल पेय पदार्थ, अनाज से संबंधित उत्पाद, ग्वार गम, बागवानी तथा फूलों से संबंधित उत्पाद, हर्बल तथा औषधीय उत्पाद, चावल एवं जैविक उत्पाद आदि शामिल हैं।

डीजीसीआईएंडएस डाटा के अनुसार, कृषि उत्पादों में वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान 19.92 प्रतिशत की बढोतरी हुई है और वह 50.21 बिलियन डॉलर तक पहुंच गए है। यह वृद्धि दर उल्लेखनीय है क्योंकि यह वित्त वर्ष 2020-21 में 17.66 प्रतिशत की वृद्धि के साथ अर्जित 41.87 बिलियन डॉलर के अतिरिक्त है और यह उच्च माल भाड़ा दरों, कंटेनरों की कमी आदि के रूप में अभूतपूर्व लॉजिस्ट्क्सि संबंधी चुनौतियों के बावजूद हासिल की गई है।

बहरहाल, एपीडा ने 25.6 बिलियन डॉलर के बराबर के कृषि तथा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों का निर्यात करने के जरिये एक नया इतिहास रच दिया है जो 50 बिलियन डॉलर के भारत के कुल कृषि निर्यातों का 51 प्रतिशत है।

पिछले दो वर्षों की ऐतिहासिक उपलब्धि किसानों की आय दोगुनी करने के माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

कृषि तथा प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के निर्यात में वृद्धि मुख्य रूप से एपीडा द्वारा की गई विभिन्न पहलों जिनमें विभिन्न देशों में बी2बी प्रदर्शनियों का आयोजन, भारतीय दूतावासों की सक्रिय भागीदारी द्वारा उत्पाद विशिष्ट एवं सामान्य विपणन अभियानों के माध्यम से नए संभावित बाजारों की खोज करने आदि शामिल है, के कारण हुई है।

एपीडा के अध्यक्ष डॉ. एम अंगमुथु ने कहा, ‘‘ एपीडा के दूरदर्शी, उत्साहवर्द्धक तथा निरंतर प्रयासों ने भारत को कृषि उत्पादों के सतत तथा गुणवत्तापूर्ण आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने में सक्षम बनाया है। ‘‘

एपीडा ने दुनिया भर में प्रमुख आयातक देशों के साथ कृषि एवं खाद्य उत्पादों पर वर्चुअल क्रेता विक्रेता बैठकों का आयोजन करने के द्वारा भारत में भौगोलिक संकेतक (जीआई) पंजीकृत कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए भी कई पहल की है।

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