एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (आईआईटी मद्रास) के थायुर कैम्पस (जिसे डिस्कवरी कैम्पस कहा जाता है) में एक प्रयोगशाला स्थल तैयार करने के लिए सीएसआर फंडिंग उपलब्ध कराई है। एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड, नवरत्न श्रेणी में भारत सरकार का केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यम (सीपीएसई) है। प्रस्तावित भवन का निर्माण 1018 वर्ग मीटर क्षेत्र में होगा और इसमें कई सुविधाएं होंगी। इससे संस्थान की बढ़ती इन्फ्रास्ट्रक्चर जरूरतों को पूरा करने और शोधकर्ताओं को राष्ट्र व विश्व को समग्र रूप में लाभान्वित करने के लिए अत्याधुनिक अनुसंधान को करने में मदद मिलेगी।
19 जुलाई, 2021 को एनबीसीसी भवन में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के दौरान उपस्थित एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड, आईआईटी मद्रास (वर्चुअल माध्यम से) और प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार के कार्यालय के अधिकारी।
आईआईटी मद्रास को अपने विभिन्न विभागों और उन्नत अनुसंधान कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है। कई साल के दौरान, संस्थान ने नए अनुसंधान केंद्र, शैक्षणिक खंड और प्रयोगशालाओं का निर्माण किया है। एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड द्वारा वित्तपोषित नया प्रयोगशाला स्थल 10×5 वर्ग मीटर की 12 अतिरिक्त प्रयोगशालाओं की स्थापना में सक्षम होगा। आईआईटी मद्रास ने इस नई पहल के जमीन उपलब्ध कराई है और इनके लिए पानी, बिजली और स्वच्छता जैसे विभिन्न सुविधाएं भी सुनिश्चित करेगा। एक बार निर्माण पूरा होने के बाद वह इसे अपने नियंत्रण में ले लेगा और इसकी मरम्मत व रखरखाव के लिए जरूरी फंड भी उपलब्ध कराएगा।
इस साझेदारी को प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय, भारत सरकार के द्वारा सुगम बनाया गया था। एनबीसीसी और आईआईटी मद्रास के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर से पहले प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. के. विजय राघवन ने कहा, “आईआईटी मद्रास राष्ट्रीय और वैश्विक हित पर केंद्रित क्षेत्रों से जुड़े कई अनुसंधान कार्यक्रमों की अगुआई करता है। संस्थान के विभिन्न विभागों और उन्नत अनुसंधान केंद्रों ने कई विद्यार्थियों और विशेषज्ञों को प्रशिक्षण दिया है। हालांकि, इन कार्यक्रमों को इन्फ्रास्ट्रक्चर- उत्कृष्टता केंद्रों, शैक्षणिक खंडों, प्रयोगशाला सुविधाओं आदि की जरूरत है। एनबीसीसी (इंडिया) का आईआईटी मद्रास के थायुर कैम्पस में एक प्रयोगशाला स्थल के निर्माण में सहयोग स्वागत योग्य है।”
एनबीसीसी के सीएमडी पी के गुप्ता ने कहा कि एनबीसीसी (इंडिया) संस्थान की सीएसआर पहल के माध्यम से आईआईटी मद्रास में अनुसंधान एवं विकास में योगदान करके खुश है। उन्होंने कहा कि ये योगदान भारत में आरएंडडी पर कम व्यय के समाधान में लंबा सफर तय करेगा।
आईआईटी मद्रास के पूर्व छात्रों और कंपनी मामलों के डीन प्रो. महेश वी. पंचगनुला ने एनबीसीसी की तरफ से मिले समर्थन के लिए अपना आभार व्यक्त किया और इस भागीदारी की संभावनाओं के बारे में बात की, जो सीएसआर के साथ शुरू होती है और डिजाइन के लिए सहयोग को आगे बढ़ा सकते हैं। आईआईटी मद्रास में डीन (प्लानिंग) प्रो. लिगी फिलिप ने थायुर कैम्पस में होने वाले कार्य के बारे में विस्तार से बताया, जिसका मार्च 2021 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उद्घाटन किया था।
इस एमओयू पर एनबीसीसी (इंडिया) के जीएम एचआर देबाशिष सत्पथी और आईआईटी मद्रास के प्रो. महेश ने हस्ताक्षर किए थे।
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