मॉनसून की उत्तरी सीमा (एनएलएम) पिछले कई दिनों से 26° उत्तरी अक्षांश और 70° पूर्वी देशांतर तथा बाड़मेर, भीलवाड़ा, धौलपुर, अलीगढ़, मेरठ, अंबाला और अमृतसर पर बनी हुई है। इस समय भी इसमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।
वर्तमान मौसमी स्थितियाँ तथा वायुमंडलीय परिदृश्य और डाइनामिक मॉडल द्वारा दिखाये जा रहे हवाओं के पूर्वानुमान के आधार पर दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के बाकी हिस्सों तथा चंडीगढ़ और दिल्ली में कम से कम अगले 5 दिनों तक आगे बढ़ने की संभावना नहीं है। अतः उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत तथा प्रायद्वीपीय भारत के दक्षिणी भागों में अगले 5-6 दिनों तक कम वर्षा की स्थिति ही बनी रहेगी। हालांकि इन क्षेत्रों में इस दौरान एक-दो स्थानों पर कुछ स्थानों पर बादलों की गर्जना के साथ बारिश होने और बिजली गिरने की घटनाएँ संभावित हैं।
जैसा कि अनुमान लगाया गया था उत्तर-पश्चिम भारत के भागों से लू का प्रकोप समाप्त हो गया है। हालांकि हरियाणा में कल कुछ स्थानों पर लू का प्रभाव देखने को मिला था। उत्तर भारत के पर्वतीय क्षेत्रों पर बने पश्चिमी विक्षोभ के कारण 2 जुलाई को पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में अधिकांश स्थानों पर बारिश दर्ज की गई थी जिसके प्रभाव से इन भागों में लू से राहत मिल गई है।
उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में आज अधिकतम तापमान में 3-4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट होने की संभावना है और इसमें आने वाले दिनों में कोई बदलाव नहीं होगा। तापमान में इस कमी के कारण ही इन भागों में अगले 5 दिनों तक लू चलने की आशंका फिलहाल नहीं है।
पूर्वोत्तर भारत और इससे सटे पूर्वी राज्यों में इस समय निचले क्षोभमंडल पर बंगाल की खाड़ी से तेज़ दक्षिण-पश्चिमी हवाएँ आ रही हैं। इन हवाओं में आर्द्रता यानि नमी की पर्याप्त मात्रा मौजूद है। इसके अतिरिक्त उत्तर-पश्चिमी राजस्थान से नागालैंड के बीच एक ट्रफ भी बना हुआ है।
इन स्थितियों के कारण बिहार, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और असम तथा मेघालय में अगले 5 दिनों के दौरान अधिकांश स्थानों पर बारिश जारी रहने की संभावना है।
बिहार, असम तथा मेघालय, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में इस दौरान कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है।
बिहार, झारखंड, उत्तरी छत्तीसगढ़ और गंगीय पश्चिम बंगाल में अगले 24 घंटों के दौरान मध्यम से भीषण गर्जना होने और कहीं-कहीं पर बिजली गिरने की आशंका है। बिजली गिरने की घटनाएँ बाहर काम करने वालों और मवेशियों के लिए जान का जोखिम पैदा कर सकती हैं, इसलिए इन क्षेत्रों में सतर्क रहना चाहिए।
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