केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए महत्वपूर्ण सहायक हो सकते हैं। नई दिल्ली में आज ‘नवाचार और उद्यमिता का पोषण: लघु व्यवसाय की सफलता का मार्ग प्रशस्त करना’ विषय पर चौथे अमेज़न संभव शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम इस क्षेत्र में सहायक इकाइयाँ हैं, जो देश के समग्र औद्योगिक विकास में बहुत बड़ा योगदान देती हैं। ये उद्यम वस्तुओं और माल के उत्पादन, विनिर्माण और प्रसंस्करण में लगे हुए हैं।
केंद्रीय मंत्री महोदय ने कहा, “यह सब अंततः हमें व्यापार करने में सुगमता की दिशा में एक कदम आगे ले जाएगा, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम के लिए, जो सबसे बड़े हितधारक और संभावित लाभार्थी हैं।”
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जो भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान देता है और 11 करोड़ भारतीयों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “जैसा कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सबसे तेजी से बढ़ती नवाचार-आधारित अर्थव्यवस्थाओं में से एक के रूप में उभरा है, ई-कॉमर्स मंचों के साथ सहयोग की निजी और सार्वजनिक क्षेत्र, सरकार और उद्योग, और “सबसे महत्वपूर्ण रूप से क्षमता संसाधनों और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम के बीच के बीच एक सेतु के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका है।”
उन्होंने कहा, “आप बड़े पैमाने पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम का समर्थन कर रहे हैं, लेकिन आप युवा उद्यमियों के साथ एमएसएमई, युवा एमएसएमई, लघु और मध्यम उद्यम बनाने के लिए भी तत्पर हो सकते हैं।”
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और हमारे ‘आत्मनिर्भर भारत’ दृष्टिकोण को पूरा करने में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मुख्य कुंजी है। उन्होंने कहा कि नवप्रवर्तन और उद्यमिता पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मजबूत वकालत के कारण युवा आज “सर्वश्रेष्ठ समय” में हैं और भारत को विकसित अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी में ले जाने के लिए तैयार हैं।
उन्होंने कहा, “आज हम दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं और हम वैश्विक नवाचार सूचकांक में 40 स्थानों की छलांग लगाकर 40वें स्थान पर पहुंच गए हैं। हमने क्वांटम प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और प्रौद्योगिकी के अन्य उभरते क्षेत्रों जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति देखी है। भारत पहले से ही प्रगति पर है और प्रौद्योगिकी, नवाचार और उद्यमिता अमृतकाल के दौरान अगले 25 वर्षों में जब हम भारत की आजादी के 100 साल मनाएंगे, इस रूपरेखा के प्रमुख निर्धारक बनने जा रहे हैं।”
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने एग्रीटेक और बायोटेक्नोलॉजी से लेकर समुद्र विज्ञान और अंतरिक्ष तक विभिन्न क्षेत्रों में स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के फलने-फूलने के लिए सही इको-सिस्टम बनाया है।
उन्होंने कहा, “भारत में हमारे पास विशाल जैव संसाधन हैं- हिमालय में, जड़ी-बूटियां, अरोमा मिशन नए अवसर पैदा कर रहा है, जबकि 7,500 किलोमीटर से अधिक के समुद्र तट के साथ भारत की विशाल समुद्री संपदा का उपयोग करने के लिए गहराई में समुद्र मिशन शुरू किया गया है।”
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को निजी क्षेत्र और आम आदमी के लिए पूर्ववर्ती “निषिद्ध” क्षेत्रों को खोलने के लिए धन्यवाद, जैसा कि हाल ही में चंद्रयान-3 के चंद्रमा पर लैंडिंग में भारत के प्रत्येक नागरिक के अभूतपूर्व हित के दौरान देखा गया, “अब पूरा देश प्रत्येक अंतरिक्ष मिशन का मालिक है।”
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