इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी, उद्यमशीलता एवं कौशल विकास राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने पूर्वोत्तर के शिक्षित युवाओं में कौशल बढ़ाने के लिए क्षेत्र में पांच नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी (एनआईईएलआईटी) केंद्रों का उद्घाटन किया। एनआईईएलआईटी के ये पांच केंद्र डिब्रूगढ़, दीमापुर, जोरहाट, पासीघाट और सेनापति में हैं।
केंद्रीय मंत्री ने पूर्वोत्तर के अपने दौरे के तीसरे और अंतिम दिन आज दीमापुर में हुए कार्यक्रम में इन केंद्रों का शुभारम्भ करते हुए कहा, “यह हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी का पूर्वोत्तर को देश के दूसरे विकसित क्षेत्रों के समान बनाने से जुड़े दृढ़ विश्वास का ही परिणाम है।”
अपनी पिछली यात्रा का स्मरण करते हुए राज्य मंत्री ने कहा, “सात महीने पहले हुई मेरी यात्रा के समय सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क ऑफ इंडिया (एसटीपीआई), कोहिमा में सिर्फ एक उद्यमी था। अब एसटीपीआई कोहिमा में कई उद्यमी मौजूद हैं। यह नगालैंड के भविष्य और पूर्वोत्तर के भविष्य का प्रतीक या संकेत है।”
उन्होंने कहा, जब प्रधानमंत्री ने 2014 में डिजिटल इंडिया का शुभारम्भ किया था तो उनके पास तीन उद्देश्य थे। पहला प्रौद्योगिकी के उपयोग से सामान्य नागरिकों की जिंदगी में बदलाव लाना, फिर शासन और लोकतंत्र में सुधार लाना और दूसरा, हमारे युवाओं के लिए ज्यादा अवसर पैदा करना, हमारी डिजिटल अर्थव्यवस्था और निवेश को गति देना। तीसरा उद्देश्य, भारत में वैश्विक नेतृत्व की क्षमताएं विकसित करना था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि हमारी जिंदगियों और हमारे शासन में बदलाव के लिए प्रोद्योगिकी के इस्तेमाल में काफी प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि हमने दिखाया है कि प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल से सरकार और शासन कैसे “बिना किसी भ्रष्टाचार, बिना किसी लीकेज, बिना किसी देरी के” एक-एक रुपया सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंचाया जाता है।
ज्यादा अवसर पैदा करने के दूसरे उद्देश्य पर उन्होंने कहा कि बीते दो साल से यह स्पष्ट है कि अगर प्रौद्योगिकी नहीं होती तो हम विभिन्न प्रतिक्रिया देने से काफी दूर रहते तथा कहीं ज्यादा जिंदगियों और आजीविकाओं का उससे भी ज्यादा आर्थिक नुकसान हुआ होता।
सरकार की उपलब्धियों को याद करते हुए उन्होंने कहा, “आज हम दुनिया में सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था हैं। दुनिया में सबसे तेजी से उभरते स्टार्टअप और नवाचार इकोसिस्टम हैं। हमने 100 यूनिकॉर्न तैयार किए हैं। हमें दुनिया में सबसे ज्यादा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हासिल हुआ है।”
पिछले एक साल में हमने आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स में 10 लाख नए रोजगार सृजित किए हैं। छात्रों को डिजिटली कुशल बनाया गया है और डिजिटल प्रशिक्षण से रोजगार में बड़ी संख्या में नए मौके मिलेंगे। उन्होंने कहा, “हम वह देश हैं, जिसने 100 यूनिकॉर्न यानी 100 अरबपति तैयार किए हैं। वे सभी युवा हैं, जिन्होंने कड़ी मेहनत और पढ़ाई की है, नई खोज की हैं, अपने लिए संपत्ति और समृद्धि का सृजन किया है। यही नया भारत है।”
अपने प्रेरक भाषण में मंत्री ने कहा, “जब आज हम नया भारत कहते हैं तो इसका मतलब नए अवसर और नई समृद्धि है, इसका मतलब है कि नया यूनिकॉर्न नगालैंड, कोहिमा, जोरहाट या ऐसे ही किसी स्थान से होगा। यह सब आपकी क्षमताएं हैं। इसके केंद्र में ”डिजिटल इंडिया का डिजिटल नॉर्थ ईस्ट” का वादा है।”
प्रधानमंत्री ने कहा है कि “भारत का भविष्य प्रौद्योगिकी है और उन्होंने अगले 10 साल को भारत का टेकेड यानी भारत की तकनीक का दशक करार दिया है।” भारत के टेकेड को हकीकत बनाने के लिए, नगालैंड, असम या पूर्वोत्तर के किसी अन्य क्षेत्र को इस डिजिटल इंडिया क्रांति से जोड़ने की जरूरत होगी।
दुनिया भारत को डिजिटल उत्पादों और सेवाओं के एक भरोसेमंद भागीदार के रूप में देख रही है। हम आज ऐसे देश हैं जो 400 अरब डॉलर का विनिर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स पर वैश्विक मूल्य श्रृंखला में लगभग 12 प्रतिशत के स्तर तक पहुंचने जा रहा है। हमारी प्रौद्योगिकी सेवाएं पिछले साल के 200 अरब डॉलर के आधार पर 16 प्रतिशत बढ़ी हैं। यह क्रांति का हिस्सा बनने और अवसरों को हासिल करने का समय है। राज्य मंत्री ने कहा, “अवसरों की दुनिया आपके सामने खड़ी है, इसका लाभ उठाने के लिए तैयार और दृढ़ रहें।”
राजीव चंद्रशेखर ने पूर्वोत्तर के राज्यों में समाज के विभिन्न तबकों के लिए डिजिटल कौशल और उद्योग की मांग वाली प्रौद्योगिकियों में क्षमता निर्माण तथा प्रशिक्षण के लिए एनईसीबी2.0 परियोजना का शुभारम्भ भी किया। इस परियोजना के लिए इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (माइटी), भारत सरकार द्वारा वित्तपोषण किया गया है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी (एनआईईएलआईटी) अपने अगरतला, आइजोल, गंगटोक, गुवाहाटी, इंफाल, इटानगर, कोहिमा और शिलांग के माध्यम से इसकी क्रियान्वयन एजेंसी है।
इससे पहले, केंद्रीय मंत्री ने दीमापुर स्थित नगालैंड टूल रूम एंड ट्रेनिंग सेंटर (एनटीटीसी) का भ्रमण किया। उन्होंने वहां की सुविधाओं और संचालित परियोजनाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रस्तावित विस्तार केंद्रों के माध्यम से दूरदराज स्थित मोन और किफाइर जिलों के युवा उद्यमियों को प्रोत्साहन देने के लिए माइटी और कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय के हर संभव समर्थन और सहायता का भरोसा दिलाया।
केंद्रीय मंत्री ने दीमापुर स्थित आईआईएससी प्रशिक्षण केंद्र का भी दौरा किया और प्रशिक्षुओं के साथ संवाद किया। केंद्र ने 7,500 छात्रों को आतिथ्य सेवा, विमानन सहित कई क्षेत्रों में सफलतापूर्वक रोजगार दिलाया है।
5 मई की शाम को केंद्रीय मंत्री ने जिला प्रशासन किफाइर के प्रमुख अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। किफायर एक आकांक्षी जिला है। उन्होंने विकास और कल्याणकारी कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विजन साझा किया जिससे इन जिलों में विकास को बढ़ावा मिलेगा और दूसरों के अनुकरण के लिए इन्हें मॉडल के तौर पर पेश किया जाएगा। उन्होंने परिवहन और डाटा हाईवे दोनों के मामले में कनेक्टिविटी की समस्या दूर करने में सहायता का भी आश्वासन दिया।
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