ठोस अपशिष्ट और प्रयुक्त जल प्रबंधन में तेज़ी लाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव मनोज जोशी और संयुक्त सचिव रूपा मिश्रा; अर्बन इंफ्रा के कार्यकारी निदेशक आर.के. दयाल और RITES के सीएमडी राहुल मित्तल की उपस्थिति में RITES के साथ एसबीएम-यू 2.0 के तहत एसडब्ल्यूएम और यूडब्ल्यूएम के लिए तकनीकी सहायता संबंधी समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
RITES की तकनीकी सहायता इकाई (टीएसयू) तीन साल की अवधि के लिए एसबीएम-यू की सहायता करेगी। समझौता ज्ञापन का उद्देश्य ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में तकनीकी सहायता को सक्षम बनाना है। एसडब्ल्यूएम के तहत, मिलकर काम करने के क्षेत्र में अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाओं की प्रक्रिया के मानकीकरण और इंजीनियरिंग डिज़ाइन शामिल होंगे जैसे मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी, लिगेसी वेस्ट आदि। इस्तेमाल हो चुके जल के प्रबंधन के तहत राइट्स, सीवेज और कीचड़ प्रबंधन और पुन: उपयोग, इंजीनियरिंग डिज़ाइन और अपशिष्ट जल उपचार इकाइयों की प्रक्रिया के क्षेत्र में मानकों और विशिष्टताओं के लिए तकनीकी सहायता प्रदान करेगा। इसके अलावा राइट्स आगे सीवेज, अपशिष्ट जल प्रबंधन और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में मॉडल टेंडर डॉक्यूमेंट और खरीद की तैयारी में सहायता करेगा।
मंत्रालय और RITES के बीच एमओयू राज्यों/यूएलबी को मिशन की पहल प्रभावी ढंग से लागू करने में सक्षम बनाएगा जिससे सभी तक सुरक्षित नियंत्रण संग्रह और परिवहन उपचार और अधिक सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रभाव के लिए पुन: उपयोग के माध्यम से सुरक्षित और टिकाऊ स्वच्छता पहुंच प्रदान की जा सके। स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के अंतर्गत पूरी तरह कचरा मुक्त शहर बनाने के विज़न में स्थायी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर ज़ोर दिया गया है।
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