प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि वर्तमान में जब देश, आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है ऐसे में आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के सपने को साकार करने का दायित्व उद्योग जगत पर है। आज वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से भारतीय उद्योग परिसंघ-सीआईआई की वार्षिक बैठक को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कोविड महामारी के दौरान देश ने देखा की किस प्रकार सरकार और उद्योग जगत मिलकर काम किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि चाहे मास्क हो, पीपीई किट या वेंटिलेटर हो, उद्योग जगत ने इन वस्तुओं की जरूरतों की आपूर्ति में हरसंभव सहायता की। उन्होंने कहा कि भारतीय उद्योग के नये लक्ष्यों के लिए यह नये संकल्प का एक बड़ा अवसर है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज का भारत विश्व के साथ चलने को तत्पर है। उन्होंने कहा कि एक समय भारत, विदेशी निवेश को लेकर सशंकित था लेकिन अब यह हर प्रकार के निवेश का स्वागत कर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में किए गए आर्थिक सुधारों के कारण भारत में रिकॉर्ड प्रत्यक्ष विदेशी निवेश हो रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज देश का विदेशी मुद्रा भंडार सर्वाधिक हो गया है और इसने कारोबार सुगमता में एक बड़ी छलांग लगाई है। उन्होंने कहा कि संसद के मॉनसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए गए हैं। इनमें से एक फैक्ट्रिंग विनियामक संशोधन विधेयक है। इस कानून के बनने से छोटे कारोबारियों को ऋण की सुविधा मिल सकेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज लोग स्थानीय उत्पादों को स्वीकार करने और उन्हें बढ़ावा देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए यह बहुत महत्वपूर्ण होगा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि एक समय था जब विदेशी उत्पादों को बेहतर समझा जाता था, यहां तक कि वर्षों की मेहनत के बाद बनाए गए भारतीय ब्रॉन्ड को भी विदेशी नाम से बढ़ावा दिया जाता था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि अब देश में साठ यूनीकॉर्न हैं। जबकि छह-सात वर्ष पहले इनकी संख्या सम्भवत: तीन-चार थी। इन साठ यूनीकॉर्न ने 21 की स्थापना पिछले कुछ महीनों में हुई है। उन्होंने कहा कि इन के प्रति निवेशकों की प्रतिक्रिया बहुत अच्छी रही है जो यह बताती है कि भारत में विकास के असाधारण अवसर हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि तोक्यो ऑलम्पिक्स में सबने देखा कि युवा विश्वास से भरे हैं और वे बड़े लक्ष्य निर्धारित करने तथा उन्हें पाने की दिशा में काम करने को तत्पर हैं। उन्होंने कहा कि कारोबार सुगमता को बढ़ावा देने के लिए हाल में किए गए आर्थिक सुधार आसान फैसला नहीं था लेकिन उद्योग जगत के सहयोग से ऐसा किया जा सका।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कृषि क्षेत्र एक समय केवल आजीविका का माध्यम माना जाता था लेकिन अब इस क्षेत्र में किए गए एतिहासिक सुधारों के जरिए भारतीय किसानों को स्वदेशी और वैश्विक बाजारों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने महामारी के दौरान भी साहसिक फैसले लिए और नए सुधार करना जारी रखा। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि देश ने इन सुधारों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक कोयला खनन की शुरूआत की गई, रक्षा क्षेत्र में नए सुधार किए गए और अंतरिक्ष तथा परमाणु क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिए खोल दिया गया। प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक तथा निजि क्षेत्र के बीच भागीदारी को और मजबूत करने पर बल दिया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि न केवल जीएसटी व्यवस्था को लागू किया गया है बल्कि जीएसटी संग्रह भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वे उद्योगों के समक्ष चुनौतियों के समाधान के लिए तैयार हैं तथा हमेशा तैयार रहेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि अतीत की गलती सुधारते हुए पूर्व प्रभावी कराधान को समाप्त करने का विधेयक पारित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस पहल से सरकार और उद्योगों के बीच विश्वास बढ़ेगा।
इस बैठक का विषय था–इंडिया @ 75: आत्मनिर्भर भारत के लिए सरकार और व्यापार जगत के संयुक्त प्रयास। सिंगापुर के उप-प्रधानमंत्री और आर्थिक नीतियों के समन्वय मंत्री हेंग स्वी कीट ने विशेष अतिथि के रूप में बैठक को संबोधित किया। बैठक में कई मंत्री, वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद और भारतीय उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधि भी शामिल हुए।
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