केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत जल जीवन मिशन (जेजेएम) पर पूर्वोत्तर राज्यों के जन स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचईडी) मंत्रियों के एक दिवसीय सम्मेलन की 16 सितंबर 2021 को अध्यक्षता करेंगे। यह कार्यक्रम असम प्रशासनिक स्टाफ कॉलेज, गुवाहाटी में आयोजित किया जाएगा जिसमें सभी आठ उत्तर पूर्वी राज्यों के पीएचएडी प्रभारी मंत्री एवं वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा लेंगे।
इस सम्मेलन का आयोजन इस क्षेत्र में अब तक हासिल की गई प्रगति, क्रियान्वयन और नियोजन पर विचार विमर्श करने तथा भविष्य में इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए किया जा रहा है ताकि उत्तर पूर्वी राज्यों के शेष घरों को जल्द से जल्द नल का पानी मिल सकें। इस सम्मेलन में कोविड संबंधी सभी प्रोटोकॉल का पालन करते हुए लाइव स्ट्रीम किया जाएगा ताकि सभी हित धारक- राज्यों के पीएचईडी के मुख्य/सहायक/कनिष्ठ अभियंता इस विचार विमर्श से लाभांवित हो सकें।
जल जीवन मिशन केन्द्र सरकार की एक प्रायोगिक योजना है जिसे पेयजल और स्वच्छता विभाग (डीडीडब्ल्यूएस), जल शक्ति मंत्रालय द्वारा राज्यों के साथ साझेदारी में लागू किया जा रहा है, ताकि वर्ष 2024 तक देश के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर तक नल के पानी की आपूर्ति की जा सकें। केंद्र और पूर्व उत्तर राज्यों के बीच इसकी साझेदारी 90:10 है।
देश के उत्तर पूर्वी राज्यों के विकास पर केन्द्र सरकार का सबसे अधिक ध्यान है और इन राज्यों के सर्वांगीण विकास में तेजी लाने के लिए वित्त वर्ष 2021-22 के दौरान जल जीवन मिशन के तहत उत्तर पूर्वी राज्यों को केन्द्रीय अनुदान के रूप में 9,262 करोड़ रूपए आवंटित किये गए है।
उत्तर पूर्वी राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में नल के पानी की आपूर्ति इस चुनौती पूर्ण समय में करते हुए बढ़ी हुई धनराशि का आवंटन करने से इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
इस सम्मेलन का केन्द्र बिन्दु कार्यक्रम के क्रियान्वयन से संबंधित विभिन्न मुद्दों, रणनीति, योजना अब तक की गई प्रगति, समयबद्ध तरीके लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए क्रियान्वयन की गति आगे बढ़ाने के तरीकों पर होगा।
केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री जेजेएम के क्रियान्वयन तथा इसे आगे बढ़ाने के लिए पीएचईडी मंत्रियों के साथ बातचीत करेंगे ताकि उत्तर पूर्वी राज्यों के सभी गांव में प्रत्येक घरों में नल के पानी का कनेक्शन जल्द से जल्द उपलब्ध हो सकें।
जल जीवन मिशन की घोषणा के समय उत्तर पूर्वी राज्यों के कुल 90.14 लाख ग्रामीण घरों में से केवल 2.83 लाख (3.13 प्रतिशत) घरों के पास ही नल के पानी का कनेक्शन था जो अब बढ़कर 22 लाख (24.45 प्रतिशत) घरों तक हो गया है। पिछले 24 महीनों में कोविड, महामारी और अन्य बाधाओं के बावजूद लगभग 20 लाख घरों नल के पानी के कनेक्शन दिए गए है। मणिपुर, मेघालय और सिक्किम का लक्ष्य वर्ष 2022 तक “हर घर जल” को हासिल करने का है जबकि अरुणाचल प्रदेश मिजोरम, नगालैण्ड और त्रिपुरा ने यह लक्ष्य 2023 तथा असम ने 2024 में निर्धारित किया है।
आंगनवाड़ी केन्द्र, आश्रमशालाओं और स्कूलों में पाईप के जरिए पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 2 अक्टूबर 2020 को एक अभियान शुरु किया गया था। जिसका मकसद सुरक्षित पीने योग्य पानी, मध्याह्न भोजन को बनाने, हाथ धोने और शौचालयों में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। उत्तर पूर्वी राज्यों में 72 हजार स्कूलों में से इस समय 40 हजार (56 प्रतिशत) नल के पानी की आपूर्ति की जा रही है। इसी प्रकार 70 हजार आंगनवाड़ी केन्द्र में से 27,474 (39 प्रतिशत) आंगनवाड़ी केन्द्रों में नल के पानी की आपूर्ति की जा चुकी है। सिक्किम के सभी स्कूलों और आंगनवाडी केन्द्रों में नल के पानी की आपूर्ति की जा चुकी है।
इस कार्यक्रम की मूल भावना “सामुदायिक भागीदारी है जो जल आपूर्ति योजना के नियोजन, उसके क्रियान्वयन, नियमित संचालन और जल आपूर्ति की सुनिश्चित सप्लाई से शुरु होती है। इसीलिए जेजेएम में ग्राम जल और स्वच्छता समितियों, जल समितियों को मजबूत बनाने, ग्राम कार्य योजनाओं की तैयारी और उनके अनुमोदन जैसी अन्य गतिविधियों पर ध्यान दिया जाता है, जो पेयजल स्त्रोत को मजबूत करने, जल आपूर्ति बुनियादी ढांचे, जल शोधन और इसके इस्तेमाल संचालन एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति और इसके रख रखाव के लिए अहम साबित होगी। इसे देखते हुए राज्य सघन प्रशिक्षण एवं कार्यक्रम आयोजित कर रहे है खासकर प्रत्येक गांव में जल गुणवत्ता पर नजर रखने के लिए महिलाओं समित पांच व्यक्तियों को ऐसा प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा पलम्बर, इलेक्ट्रिशियन मोटर मैकेनिक, फिटर और पंप ऑपरेटर के लिए कौशल कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे है।
जल आपूर्ति और बेहतर स्वच्छता पर सरकार के अधिक ध्यान देने की दिशा में 15 वित्त आयोग में 29,940 करोड़ रुपए 2021-21 में आरएलबी और पीआरआई को पेयजल, वर्षा के पानी के संग्रहण और जल पुनचक्रण स्वच्छता और ओडीएफ दर्जा बरकरार रखने के लिए आवंटित किए। वर्ष 2021-22 से 2025-26 की पांच वर्षों की अवधि के लिए 1.42 लाख करोड़ रुपए का सुनिश्चित कोष है, जो जेजेएम के तहत जारी प्रयासों को सहायता प्रदान करेगा। ग्रामीण क्षेत्रीय निकायों द्वारा इस धनराशि के बेहतर इस्तेमाल के लिए प्रयास किए जा रहे है जो जल के पानी के संग्रहण, विभिन्न पेयजल स्त्रोतों को मजबूत करने, जल आपूर्ति में सुधार लाने, ग्रे वाटर प्रबंधन और नियमित संचलान एवं रखरखाव पर ध्यान देंगे।
ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति की मात्रा गुणवत्ता दवाब और इसकी नियमित्ता को मापने के लिए सेंसर आधारित आईओटी प्रणाली लगाई जा रही है। जल जीवन मिशन डेशबोर्ड ग्राम स्तर पर सूचना प्रधान करता है। इस मिशन के तहत पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर ध्यान केन्द्रित किया गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सकें कि शेष ग्रामीण परिवारों के साथ प्रत्येक स्कूल, आंगनवाड़ी केन्द्रों, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, सामुदायिक केन्द्रों आदि को नल के पानी की आपूर्ति की जा सकें और कोई भी इस मुहिम में न छूट पाए। इन कठिन और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में गुरुत्वाकर्षण आधारित जल प्रणाली सबसे पसंददीदा विकल्प है क्योंकि यह लागत प्रभावी है और संचालन एवं रखरखाव में आसान है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन गुणवत्ता में सुधार लाने और रहन सहन को आसान बनाने की दिशा में प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी ने 15 अगस्त 2019 को स्वतंत्रता दिवस के अपने भाषण में जल जीवन मिशन की घोषणा की थी। ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू नल कनेक्शन का प्रावधान महिलाओं और बालिकाओं की दुर्दशा को कम करने में मदद करेगा क्योंकि पानी लाने की जिम्मेदारी उन्हीं की रहती है। मिशन का उद्देश्य सार्वभौमिक कवरेज है और इसके तहत, बस्ती/गांव के प्रत्येक परिवार को नल के पानी का कनेक्शन उपलब्ध कराना है तथा इस मुहिम का उद्देश्य यही है ‘कोई भी पीछे नहीं छूटे’। इससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अंतर को पाटने में मदद मिलेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के विजन को आगे बढ़ाते हुए, जल जीवन मिशन हर घर में नल के पानी की आपूर्ति के साथ पहुंचने के सपने को साकार करने के लिए आगे बढ़ रहा है जिससे पानी ढोने में महिलाओं और बालिकाओं को होने वाली परेशानियों को समाप्त करने में मदद मिलेगी।
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