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अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की वैश्विक सौर सुविधा को 35 मिलियन डॉलर का पूंजीगत योगदान मिल सकता है

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) ने घोषणा की कि सौर ऊर्जा फैसिलिटी (जीएसएफ) को 35 मिलियन डॉलर का पूंजीगत योगदान प्राप्त होने वाला है। जीएसएफ एक भुगतान गारंटी कोष है जिसे सौर ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए तैयार किया गया है।

वैश्विक सौर सुविधा (जीएसएफ) को अफ्रीका के वंचित एवं भौगोलिक क्षेत्रों में सौर निवेश को बढ़ाने के लिए डिजाइन किया गया है। इस प्रक्रिया में वाणिज्यिक पूंजी के लिए भी रास्ते खोले गए हैं। पिछले साल आईएसए असेंबली ने ग्लोबल सोलर फैसिलिटी (वैश्विक सौर सुविधा) को मंजूरी दी थी, जिसके ऑफ-ग्रिड सौर परियोजनाओं, रूफटॉप सौर परियोजनाओं और उत्पादक उपयोग वाली सौर परियोजनाओं में निजी पूंजी के प्रवाह को आकर्षित करने की उम्मीद है। भुगतान गारंटी, बीमा और निवेश फंडों से सशक्त इस वित्तपोषण पहल का उद्देश्य परियोजना के जोखिम को कम करना, नियामकीय अंतर को दूर करने के लिए तकनीकी सहायता, मुद्रा जोखिम को कम करना और सौर ऊर्जा क्षेत्र में अनुबंधात्मक एवं वित्तीय अनिश्चितताओं को दूर करना है।

आईएसए से मिल रहे 10 मिलियन डॉलर के अलावा भारत सरकार जीएसएफ में पूंजी योगदान के तौर पर 25 मिलियन डॉलर के निवेश पर विचार कर रही है। ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रोपीज और सीआईएफएफ ने भी जीएसएफ को सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई है।

भारत सरकार के केंद्रीय विद्युत और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन सभा के अध्यक्ष आरके सिंह ने कहा कि जीएसएफ का लक्ष्य 100 मिलियन डॉलर जुटाना है और आगे चलते हुए जीएसएफ का वैश्वीकरण करना होगा। उन्होंने कहा, ‘वैश्विक सौर सुविधा का लक्ष्य सौर ऊर्जा की तरफ संक्रमण तेज करने के लिए निवेश का लाभ उठाना है। जीएसएफ का लक्ष्य 100 मिलियन डॉलर जुटाना है। अफ्रीका में सौर ऊर्जा क्षमता के इस्तेमाल की अपार संभावनाएं हैं फिर भी निवेश में जोखिम के कारण यह क्षेत्र अपनी क्षमता का पूरा लाभ नहीं उठा पा रहा है। जीएसएफ का लक्ष्य इस चुनौती का समाधान करना और निवेश को सुरक्षित बनाना है। निजी क्षेत्र के निवेश के कारण भारत विकास का अच्छा उदाहरण है। कोई जोखिम नहीं है और विवाद निपटारे की व्यवस्था के साथ-साथ मजबूत कानूनी एवं सुरक्षा ढांचा और भुगतान की सुरक्षा होने से भारत निवेश को आकर्षित करने में सक्षम हुआ है। आने वाले वर्षों में हम जीएसएफ के वैश्वीकरण पर बढ़ेंगे। इस सुविधा को उस बदलाव के लिए उत्प्रेरक बनाने में, जिसके लिए हम सभी काम कर रहे हैं, मैं सभी सदस्य देशों और संगठनों को हमारे साथ साझेदारी करने के लिए आमंत्रित करता हूं।’

अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के महानिदेशक डॉ. अजय माथुर ने कहा कि जीएसएफ विभिन्न अंतरराष्ट्रीय दानदाताओं से क्राउडसोर्सिंग निवेश की दिशा में काम कर रहा है। हमें खुशी है कि भारत सरकार, सीआईएफएफ और ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रोपीज से सहयोग मिल रहा है। इससे अफ्रीका में विकेंद्रीकृत सोलर एप्लीकेशन में निवेश करने के लिए निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा और उनके निवेश पर रिटर्न मिलने में निश्चितता बढ़ेगी। इससे वैश्विक निवेश पैटर्न में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

आईएसए ने इस बात पर प्रकाश डाला कि जीएसएफ को अफ्रीका में परियोजनाओं के लिए निवेशकों के भीतर भरोसे का भाव पैदा करने और 10 अरब डॉलर के निवेश के लिए सक्षम बनाने के लिए डिजाइन किया गया है, जो 2030 तक 35-40 मिलियन अफ्रीकी घरों में स्वच्छ ऊर्जा की पहुंच सुनिश्चित करेगा। इससे क्षेत्र के करीब 200 मिलियन लोगों को फायदा होगा।

जीएसएफ की आवश्यकता क्यों पड़ी? इस पर बोलते हुए डॉ. माथुर ने कहा, ‘दुनिया को 2030 तक नवीकरणीय ऊर्जा में 12.5 ट्रिलियन डॉलर और ऑफ-ग्रिड सौर ऊर्जा में 23 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत है। मौजूदा समय में वैश्विक सौर निवेश काफी कम है, जो नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आवश्यक धनराशि का केवल 10% है। ऐसे में अपनी वैश्विक सौर सुविधा के माध्यम से आईएसए आगे बढ़ रहा है। इसके अलावा निवेश में काफी असमानताएं हैं- विकासशील देशों में वैश्विक आबादी का 50% से ज्यादा हिस्सा रहता है लेकिन इसे 2022 के नवीकरणीय ऊर्जा निवेशों का केवल 15% प्राप्त हुआ। उप-सहारा अफ्रीका का प्रति व्यक्ति नवीकरणीय ऊर्जा निवेश 2015 से 2021 तक 44% घट गया है। इसके उलट उत्तर अमेरिका में निवेश 41 गुना ज्यादा है और यूरोप में यह 57 गुना बढ़ा है। सार्वभौमिक ऊर्जा पहुंच और स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण की तत्काल जरूरत को पूरा करने के हमारे दृष्टिकोण को जीएसएफ आगे बढ़ाएगा।

सीआईएफएफ की मुख्य कार्यकारी अधिकारी केट हैंपटन ने कहा, ‘हम अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की वैश्विक सौर सुविधा की फंडिंग के लिए सीआईएफएफ की प्रतिबद्धता की घोषणा करते हुए रोमांचित हैं। यह फैसिलिटी आईएसए सदस्य देशों में सौर ऊर्जा के लिए कम लागत वाले संस्थागत एवं निजी क्षेत्र के निवेश के दरवाजे खोलेगी। यहां और हमारे सभी कार्यों में सीआईएफएफ स्वच्छ, किफायती ऊर्जा को बढ़ावा देने, वैश्विक ऊर्जा संक्रमण को आगे बढ़ाने और दुनियाभर के बच्चों और युवाओं के रहने योग्य धरती को सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।’

ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रोपीज में पर्यावरण कार्यक्रमों का नेतृत्व करने वाली ए. विलियम्स ने कहा, ‘अफ्रीकी देश सौर ऊर्जा में वैश्विक लीडर बन सकते हैं लेकिन अपनी इस क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए आवश्यक पूंजी की कमी का सामना कर रहे हैं। ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रोपीज वैश्विक सौर सुविधा के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के साथ अपनी साझेदारी जारी रखने के लिए तत्पर है, जिससे पूरे महाद्वीप में सौर ऊर्जा परियोजनाओं को व्यापक तरीके से शुरू करने में मदद की जा सके। साथ ही स्वच्छ ऊर्जा के वैश्विक लीडर के तौर पर महाद्वीप को सशक्त बनाने में मदद की जा सके और गरीबी व जलवायु संकट की दोहरी चुनौतियों का भी समाधान किया जा सके।’

जलवायु परिवर्तन से निपटने और संतुलित ऊर्जा संक्रमण के लिए अफ्रीका में सौर ऊर्जा निवेश में विविधता लाने की जरूरत पर आईएसए ने प्रकाश डाला। अपनी विशाल सौर क्षमता के बावजूद अफ्रीका के पास दुनिया की स्थापित सौर क्षमता का केवल 1.3% (2021 में 849 गीगावॉट में से 11.4 गीगावॉट) है। अफ्रीका में करीब 600 मिलियन लोगों के पास बिजली की पहुंच नहीं है, ऐसे में यहां के लिए सौर ऊर्जा परियोजनाएं बेहद जरूरी हैं। सीओपी27 में जीएसएफ पर सहमति और शुभारंभ के बाद, आईएसए सचिवालय सदस्य देशों, विकास वित्त संस्थानों, पेंशन फंडों और दुनियाभर के निवेश प्रबंधकों सहित संभावित निवेशकों के साथ विचार-विमर्श कर रहा है। आईएसए ने अफ्रीका में जीएसएफ के जरिए निवेश के लिए मल्टी-लेटरल इन्वेस्टमेंट गारंटी फंड (एमआईजीए), अफ्रीका 50, वेस्ट अफ्रीकन डेवलपमेंट बैंक (बीओएडी) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं।

अफ्रीका के बाद जीएसएफ का लक्ष्य एशिया, लैटिन अमेरिका और मध्य पूर्व जैसे क्षेत्रों में विस्तार करना है जहां विशिष्ट जरूरतों को पूरा करने के लिए क्षेत्रीय सुविधाएं तैयार की जाएंगी। जीएसएफ भविष्य में सौर ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, तेजी से सौर ऊर्जा कार्यान्वयन के लिए स्टार्टअप का सहयोग करने और उभरते सौर ऊर्जा क्षेत्रों के लिए नई प्रौद्योगिकियों में निवेश की योजना बना रहा है।

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