सरकार ने विद्युत सहायक उपकरण, प्रयोगशाला कांच के बर्तन, कब्जे, तांबे के उत्पाद और दरवाजे की फिटिंग जैसे उपभोक्ता सुरक्षा को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण उत्पादों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश जारी किए

सरकार ने विद्युत सहायक उपकरण, प्रयोगशाला कांच के बर्तन, कब्जे, तांबे के उत्पाद और दरवाजे की फिटिंग जैसे उपभोक्ता सुरक्षा को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण उत्पादों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश जारी किए

सरकार देश में सुदृढ़ गुणवत्ता इकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) विकसित करने के लिए मिशन मोड में काम कर रही है। इसका उद्देश्य सुदृढ़ अर्थव्यवस्था और उच्च विकास के लिए बेहतर तथा सुरक्षा अनुरूप उत्पादों पर बल देना है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने इस प्रयास के हिस्से के रूप में, विद्युत सहायक उपकरण, प्रयोगशाला ग्लासवेयर, कब्जे, तांबे के उत्पाद और दरवाजे की फिटिंग जैसे उपभोक्ता सामग्रियां सुरक्षा को प्रभावित करने वाले महत्वपूर्ण उत्पादों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) जारी किए हैं। ये गुणवत्ता नियंत्रण आदेश भारतीय उपभोक्ताओं को उपलब्ध कराए जाने वाले सामान की रेंज से समझौता किए बिना, ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों के गुणवत्ता मानकों को सुदृढ़ करने के लिए हैं। यह दृष्टिकोण भारत को सर्वोत्तम गुणवत्ता वाले उत्पादों के पर्याय के रूप में विनिर्माण पावरहाउस के तौर पर स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

बेहतर गुणवत्ता और सुरक्षा अनुरूप उत्पाद प्रदान करने में भारत को विश्व में अग्रणी रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से, कई सुधार किए गए हैं। ‘मेड इन इंडिया’ ब्रांड अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त ब्रांडों के साथ मेल खाता है और प्रीमियम गुणवत्ता प्रदान करते हैं। यह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सुधार केंद्रित दृष्टिकोण पर आधारित है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि यदि दुनिया के किसी भी मंच पर “भारत में निर्मित” उत्पाद है, तो दुनिया को विश्वास होना चाहिए कि इससे बेहतर कुछ भी नहीं है, चाहे वह हमारी उपज हो, हमारी सेवाएँ हों, हमारे शब्द हों, हमारी संस्थाएँ हों, या हमारी निर्णय लेने की प्रक्रियाएँ हों, सब कुछ सर्वश्रेष्ठ होगा, तभी हम उत्कृष्टता के भाव को आगे बढ़ा सकते हैं।

प्रौद्योगिकी के साथ, सुरक्षा मानकों से संबंधित पहलुओं जैसे प्रदर्शन मापदंडों, स्थायित्व और सामान की निर्भरता के बारे में ग्राहक अधिक विशिष्ट हो रहे हैं। खरीदारी करने से पहले उत्पाद की गुणवत्ता की समीक्षा जांचना एक आम बात हो गई है। इसलिए, विनिर्माण रणनीति के संदर्भ में उत्पाद की गुणवत्ता, कीमत और नवाचार के बीच संतुलन बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है।

उपभोक्ता उत्पाद सुरक्षा को बढ़ाने के लिए मजबूत गुणवत्ता मानकों को लागू करने के लिए, गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (क्यूसीओ) के कार्यान्वयन पर अभूतपूर्व नीतिगत फोकस है। ये विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के व्यापार में तकनीकी बाधाओं (टीबीटी) समझौते के प्रावधानों के अनुरूप है।

गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों को लागू करने से भारत को उपभोक्ता उत्पाद सुरक्षा बढ़ाने, भारतीय बाजार में घटिया उत्पादों के प्रसार को रोकने, निवेश आकर्षित करने और जीवन की हानि या किसी भी दुर्घटना को रोकने के लिए गुणवत्ता मानकों से वैश्विक विनिर्माण बाजार में बड़ी हिस्सेदारी हासिल करने में मदद मिलेगी। इससे प्रारंभिक चरण में किसी भी प्रकार के उत्पाद दोष और खराबी का पता लगाने में मदद मिलेगी जो कि तर्कसंगत लागत के माध्यम से निर्माताओं और उपभोक्ताओं दोनों के लिए लाभकारी होगा।

भारत के राष्ट्रीय मानक निकाय के रूप में कार्य करने वाला भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (आईएसओ)/अंतर्राष्ट्रीय इलेक्ट्रोटेक्निकल कमीशन (आईईसी) द्वारा निर्धारित प्रासंगिक अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुकूल है। यह सुरक्षित, विश्वसनीय और गुणवत्ता वाला सामान प्रदान करने के अंतर्निहित उद्देश्य के साथ वस्तुओं के मानकीकरण, अंकन और गुणवत्ता प्रमाणन तथा अनुरूपता मूल्यांकन में शामिल है।

किसी भी उत्पाद या प्रक्रिया के लिए बीआईएस द्वारा जारी किए गए मानक स्वैच्छिक अनुपालन के लिए हैं, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा मुख्य रूप से योजना-I में गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (क्यूसीओ) के माध्यम से तकनीकी विनियमन, (टीआर) और योजना-II के अंतर्गत अनिवार्य पंजीकरण आदेश (सीआरओ) अनिवार्य प्रकृति के हैं।

सुरक्षा पहलू के महत्व को ध्यान में रखते हुए उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पाद प्रदान करने तथा भारतीय उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए अपने दायरे में आने वाले उत्पादों के लिए एक मजबूत गुणवत्ता पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया है। इससे लगभग 300 उत्पाद मानकों को कवर करने वाले 60 से अधिक नए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश जारी किए गए हैं, जिससे न केवल यह सुनिश्चित हुआ है कि उपभोक्ताओं को विश्वसनीय उत्पाद उपलब्ध कराए जा रहे हैं, बल्कि विनिर्माण गुणवत्ता मानकों में भी सुधार हुआ है, जिससे ‘मेड इन’ के ब्रांड और मूल्य में वृद्धि हुई है।

विभिन्न उत्पाद श्रेणियों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश को लागू करने का कार्य शुरू किया जा रहा है। उन उत्पादों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है, जिनके लिए मानकों का उल्लंघन, गंभीर नुकसान और चोट के कारण उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो सकता है क्योंकि ये आवासों में व्यापक रूप से प्रयोग होते हैं। इसलिए, गुणवत्ता नियंत्रण आदेश को हाल ही में ‘स्टील वायर्स/स्ट्रैंड्स, नायलॉन वायर रोप्स और वायर मेश’, ‘हिंग्स’, ‘तिजोरियां, सेफ डिपॉजिट लॉकर कैबिनेट्स और की लॉक्स’, ‘लैबोरेटरी ग्लासवेयर’ और ‘इलेक्ट्रिकल एक्सेसरीज’ समेत कई के अन्य वस्तुओं के लिए अधिसूचित किया गया है। किसी भी अप्रत्याशित दुर्घटनाओं से बचाव के लिए ये मानक बहुत महत्वपूर्ण हैं।

गुणवत्ता नियंत्रण आदेश का कार्यान्वयन एक व्यापक अभ्यास है जिसमें उन उत्पादों की पहचान के लिए हितधारकों के साथ डीपीआईआईटी की निरंतर भागीदारी शामिल है। पहचान के बाद, भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) से भारतीय मानकों, उपयुक्त अनुरूपता मूल्यांकन योजना, बीआईएस परीक्षण प्रयोगशालाओं की उपलब्धता या बीआईएस मान्यता प्राप्त परीक्षण प्रयोगशालाओं और उत्पाद मैनुअल सहित विभिन्न पहलुओं पर परामर्श किया जाता है। इसके बाद गुणवत्ता नियंत्रण आदेश का मसौदा तैयार किया जाता है, जिस पर उद्योग और संबंधित हितधारकों के साथ परामर्श किया जाता है।

उद्योग जगत की टिप्पणियों को शामिल करने के बाद, गुणवत्ता नियंत्रण आदेश के मसौदे को केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री द्वारा अनुमोदित किया जाता है इसके पश्चात विधायी विभाग द्वारा कानूनी जांच की जाती है। गुणवत्ता नियंत्रण आदेश को विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की वेबसाइट पर 60 दिनों के लिए अपलोड किया जाता है, जिसमें डब्ल्यूटीओ के सदस्य देशों से टिप्पणियां आमंत्रित की जाती हैं। सदस्य देशों की इन टिप्पणियों की जांच और समीक्षा की जाती है, जिसके बाद गुणवत्ता नियंत्रण आदेश को अधिसूचित करने के लिए संबंधित केंद्र सरकार प्राधिकरण से अंतिम मंजूरी मांगी जाती है। सूक्ष्म और लघु उद्योगों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश के सुचारू कार्यान्वयन की सुविधा के लिए समयसीमा में छूट के संदर्भ में कई बदलाव और छूट की परिकल्पना की गई है।

गुणवत्ता नियंत्रण आदेश को भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा लाइसेंस और/या अनुरूपता प्रमाणपत्र के माध्यम से लागू किया जाता है। इसकी अधिसूचना के साथ, गैर-बीआईएस प्रमाणित उत्पादों के निर्माण, भंडारण और बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। बीआईएस अधिनियम के प्रावधान का उल्लंघन करने पर पहले अपराध के लिए 2 साल तक की कैद या कम से कम 2 लाख रुपये का जुर्माना हो सकता है, जो दूसरे और बाद के अपराध के लिए बढ़कर न्यूनतम 5 लाख रुपये हो सकता है।

भारत में एक सुदृढ़ गुणवत्ता इकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) विकसित करने के लिए उद्योग-सरकारी की साझेदारी से, डीपीआईआईटी उद्योग के सदस्यों, क्षेत्रीय संघों और संबंधित हितधारकों के साथ नियमित परामर्श आयोजित करता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि जारी किए जा रहे गुणवत्ता नियंत्रण आदेश उनकी आवश्यकताओं के अनुरूप हैं। अधिसूचना के बाद, अखिल भारतीय स्तर पर उद्योग में जागरूकता और स्वामित्व की भावना विकसित करने के लिए नए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश के संबंध में कई पहल की गई हैं। ये व्यापक परामर्श यह सुनिश्चित करते हैं कि सुचारू कार्यान्वयन के लिए अधिकारियों के विचारों, फीडबैक और तकनीकी इनपुट पर विचार किया जाए।

उपभोक्ताओं की सुरक्षा और भलाई सर्वोपरि है, जिसके लिए उत्पादों के लिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश पेश करने के निरंतर प्रयास किए जाएंगे। सुरक्षा मानकों का पालन घटिया उत्पादों के उत्पादन और वितरण को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा जो ‘मेड इन इंडिया’ उत्पादों की मूल्य वृद्धि में एक बड़ा कदम होगा। दुर्घटनाओं से बचने के लिए गुणवत्ता पर फिर से ध्यान केंद्रित किया गया है, इसलिए गुणवत्ता नियंत्रण आदेश उपभोक्ता के विश्वास को बढ़ावा देने के लिए एक अभिन्न अंग बन गया है।

गुणवत्ता नियंत्रण आदेश घरेलू ब्रांडों को बढ़ावा देने और किसी भी प्रकृति की अक्षमता को कम करते हुए भारतीय उत्पादों की विश्वसनीयता और मूल्यवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगा। वैश्विक मानकों के अनुरूप परिणाम देने वाले ‘जीरो डिफेक्ट’ और ‘जीरो इफेक्ट’ के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है, क्योंकि यह सुनिश्चित करता है कि किसी नकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव या स्थिरता पर कोई समझौता न हो।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस विषय पर बल दिया है वर्तमान समय ‘जीरो इफेक्ट, जीरो डिफेक्ट’ के लोकाचार के साथ काम करने का उपयुक्त क्षण है और हर घर में ‘वोकल फॉर लोकल’ की गूंज के साथ, यह सुनिश्चित करने का समय है कि हमारे उत्पाद विशेष रूप से वैश्विक मानकों को पूरा करे। सुरक्षा की दृष्टि से गुणवत्ता नियंत्रण आदेश से भारत में बेहतर गुणवत्ता वाले विश्वस्तरीय उत्पाद विकसित करने में मदद मिलेगी, जिससे प्रधानमंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने के दृष्टिकोण को हासलि किया जा सकेगा।

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