लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि उन्होंने हमेशा यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि सदन की कार्यवाही निष्पक्षता, अनुशासन, संतुलन और नियमों के अनुसार संचालित हो। विपक्ष द्वारा उनके निष्कासन की मांग वाले प्रस्ताव पर बयान देते हुए ओम बिरला ने कहा कि उन्होंने सभी के साथ सहयोग और सद्भाव बनाए रखते हुए व्यवस्था और दक्षता कायम रखकर अपनी जिम्मेदारी पूरी की है।
मेरा हमेशा ये प्रयास रहता है कि सदन की गरिमा, मर्यादा और प्रतिष्ठा में उतरोत्तर वृद्धि होती रहे। हमारे संविधान द्वारा स्थापित संसदीय लोकतंत्र की व्यवस्था में मेरा हमेशा अटूट विश्वास रहा है। पिछले दो दिनों में इस सदन ने लोकतंत्र की महत्वपूर्ण संसदीय प्रणाली को पूरा किया। इस चर्चा के दौरान अनेक विचार, अनेक दृष्टिकोण अनेक भावनाएं इस सदन के सामने रखी गई। मैने सदन के प्रत्येक माननीय सदस्यों की बात को गम्भीरता और ध्यान से सुना।
ओम बिरला ने कहा कि चर्चा के दौरान, कुछ सदस्यों ने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता को बोलने से रोका जा रहा है और उन्हें बोलने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे सदन का नेता हो, विपक्ष का नेता हो या कोई अन्य सदस्य, सभी को सदन में केवल नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार बोलने का अधिकार है।
सदन में जब भी लोकमत के किसी भी विषय को, चाहे माननीय प्रधानमंत्री हो या माननीय मंत्रिगण हो उनको भी अगर वक्तव्य देना होता है, तो नियम 372 के तहत अध्यक्ष से पूर्व अनुमति प्राप्त करनी होती है। उसके नोटिस के बाद ही वह अपने वक्तव्य दे सकते हैं। किसी माननीय सदस्यों को नियमों से परे जाकर बोलने का विशेषाधिकार इस सदन में नहीं है।
