राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि ऊर्जा संरक्षण अब सिर्फ एक विकल्प नहीं, बल्कि वर्तमान समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बचत की गई ऊर्जा की हर इकाई प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना को दर्शाती है। आज ऊर्जा संरक्षण दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार और ऊर्जा संरक्षण पर राष्ट्रीय चित्रकारी प्रतिस्पर्धा के विजेताओं को सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि निर्धारित समय सीमा के पहले भारत ने अपनी स्वच्छ ऊर्जा वचनबद्धताओं को पूरा किया है। यह उन्नत ऊर्जा दक्षता और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि को दर्शाता है।
भारत ने क्लीन एनर्जी की प्रतिबद्धताएं समय सीमा से पहले ही पूरी कर ली है। यह हमारी ऊर्जा दक्षता और डी-कार्बोनाइजेशन की दिशा में बड़ी उपलब्धि है। राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना शुरू की गई है जिसके तहत घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए जा रहे हैं। इसमें उन घरों को मुफ्त बिजली मिलेगी और फोसिल फॉइल पर निर्भरता कम होगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था में से एक है। विकास की इस यात्रा में सभी नागरिकों तक बिजली की पहुंच, शहरीकरण, औद्योगिकरण विस्तार और जीवन स्तर पर सुधार के कारण ऊर्जा की आवश्यकता भी तेजी से बढ़ रही है। ऊर्जा की बचत, ऊर्जा का सबसे पर्यावरण अनुरूप और विश्वसनीय स्रोत है।
इस अवसर पर केन्द्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार-2025 के विजेताओं को बधाई दी। उन्होंने इस कार्यक्रम को विकास और पर्यावरण संरक्षण को प्रतिबिम्बित करने वाला बताया। उन्होंने ऊर्जा संरक्षण-2025 पर राष्ट्रीय चित्रकारी प्रतियोगिता के विजेताओं को भी बधाई दी।
मैं आज के सभी पुरस्कार विजेताओं को हार्दिक बधाई देता हूं कि आपने इनोवेशन को अपनाकर ऑफिशियल टेक्नोलॉजी की दिशा में कदम बढ़ाया है। आज का यह सम्मान समारोह इस बात का प्रतीक है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।