वित्तवर्ष 2021-22 में 2013-14 की तुलना में शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह में 121 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2013-14 में यह छह लाख 38 हजार 596 करोड़ रुपये था जो 2021-22 में बढ़कर 14 लाख 12 हजार 422 करोड़ रुपये हो गया है। दूसरी ओर, वित्त वर्ष 2021-22 में सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह में 126 प्रतिशत की बढोतरी हुई है। वित्तीय वर्ष 2013-14 के सात लाख 21 हजार 604 करोड़ रुपये से बढ़कर 16 लाख 36 हजार 081 करोड़ रुपये हो गया है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने आज वित्त वर्ष 2021-22 तक के प्रत्यक्ष कर से जुडे आंकडे जारी किये हैं।
इनमें से कुछ आंकड़ों की मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
प्रत्यक्ष करों का शुद्ध संग्रह वित्त वर्ष 2013-14 के 6,38,596 करोड़ रुपये से 121.18 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 2021-22 में 14,12,422 करोड़ रुपये हो गया है।
प्रत्यक्ष करों का शुद्ध संग्रह वित्त वर्ष 2013-14 के 6,38,596 करोड़ रुपये से 160.17 प्रतिशत बढ़कर वित्त वर्ष 2022-23 में 16,61,428 करोड़ रुपये (अनंतिम) हो गया है।
प्रत्यक्ष करों का सकल संग्रह वित्त वर्ष 2021-22 में 126.73 प्रतिशत से भी अधिक बढ़कर 16,36,081 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि वित्त वर्ष 2013-14 में प्रत्यक्ष करों का सकल संग्रह 7,21,604 करोड़ रुपये का हुआ था।
प्रत्यक्ष करों का सकल संग्रह वित्त वर्ष 2022-23 में 172.83 प्रतिशत से भी अधिक बढ़कर 19,68,780 करोड़ रुपये (अनंतिम) के स्तर पर पहुंच गया है, जबकि वित्त वर्ष 2013-14 में प्रत्यक्ष करों का सकल संग्रह 7,21,604 करोड़ रुपये का हुआ था।
वित्त वर्ष 2021-22 में प्रत्यक्ष कर उछाल 2.52 आंकी गई, जो कि पिछले 15 वर्षों में दर्ज की गई सर्वाधिक प्रत्यक्ष कर उछाल है।
प्रत्यक्ष कर-जीडीपी अनुपात वित्त वर्ष 2013-14 के 5.62 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 2021-22 में 5.97 प्रतिशत हो गया है।
कर संग्रह की लागत वित्त वर्ष 2013-14 में कुल संग्रह के 0.57 प्रतिशत से घटकर वित्त वर्ष 2021-22 में कुल संग्रह का 0.53 प्रतिशत रह गई है।