इन कामों को करने से देवी लक्ष्मी रूठ जाती हैं दीवाली पर माँ लक्ष्मी पाने तथा धन कैसे प्राप्त करे के सरल उपाय

हिन्दू शास्त्र और धर्मग्रंथ आज के समय में भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं जितने पहले कभी हुआ करते थे। हां, आज की पीढ़ी इन्हें अपने जीवन में स्थान देना, इनमें लिखे आदर्शों और सिद्धांतों को अपने जीवन में ढालना भूल गई है लेकिन इसका ये अर्थ कदापि नहीं है कि ये वैदिक धर्म की धरोहर माने जाने वाले ये शास्त्र अपना औचित्य गवां चुके हैं। शास्त्रों में ऐसा वर्णन है की रात का समय इन्द्र पत्नी रति को समर्पित है। रति का उद्गमन रात्रि शब्द से हुआ है। चराचर जगत में देवी महालक्ष्मी को रात की देवी कहा गया है। देवी महालक्ष्मी के आठ स्वरूप बताए गए हैं। आठवीं देवी ऐश्वर्य लक्ष्मी अर्थात गृह लक्ष्मी कहलाती हैं। दिन के आठ पहरों पर इन्हीं आठों लक्ष्मीयों का वास होता है। रात के पहर में सर्वाधिक प्रभावशाली ऐश्वर्य लक्ष्मी हो जाती हैं। वह किसी भी व्यक्ति की जीवन संगिनी अर्थात उसकी पत्नी होती हैं।

आपने अक्सर अपने घर के बड़ों को यह कहते सुना होगा कि दिन ढलने के बाद ऐसा नहीं करते, वैसा नहीं करते। निश्चित तौर पर इसके पीछे वे हिन्दू धर्मग्रंथों और धर्मशास्त्रों का ही हवाला देते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुण्डली में लक्ष्मी के तीन भाव कहे गए हैं। पहला लग्न दूसरा पंचम और तीसरा नवम। इसके साथ-साथ कुण्डली में लक्ष्मी का विशेष स्थान सातवां कहा गया है। यही सप्तम स्थान पत्नी को संबोधित करता है।

पौराणिक व तंत्र शास्त्रों में धन की देवी को स्थिर रखने के लिए अनेक यतन, प्रयास व अनुष्ठान बताए गए हैं परंतु यह अनुष्ठान व प्रयास अत्यंत कठिन व ख़र्चीले हैं जिसे आज के बिज़ी मॉडर्न टाइम में आम व्यक्ति के लिए करना लगभग असंभव जैसा है।शास्त्रों में ऐसे कुछ काम भी बताएं गए हैं जो रात को करने पर ऐश्वर्य लक्ष्मी कोे नाराज कर देते हैं-

सोने से पहले तो भूलकर भी न करें ये काम

* जीवन संगीनी से कलेश न करें।

* जीवनसाथी को बाल खोल कर न सोने दें।

* रात को नाखुन न काटें।

* शाम के समय तुलसी छूना: हिन्दू शास्त्रों के अनुसार दिन ढलने के बाद तुलसी को ना तो जल चढ़ाना चाहिए और ना ही उसके पत्तों को छूना चाहिए।

* शेव न करें।

* तुलसी के आगे दीपक: जल चढ़ाने के लिए दिन का समय शुभ माना गया है, परंतु शाम के समय आप तुलसी के आगे दीपक जरूर जला सकते हैं।

* बाल न कटवाएं।

* झाड़ू लगाना: सूरज छिपने के बाद अगर घर में झाड़ू लगाई जाए तो घर में दरिद्रता और बदहाली का वास होता है। ऐसा करने से घर की सारी सकारात्मकता घर से बाहर निकल जाती है।

* चाबीयों का छल्ला न हिलाएं।

* किसी की बुराई करना: वैसे तो दिन के किसी भी समय किसी की बुराई नहीं करनी चाहिए लेकिन विशेष रूप से दिन ढलने के बाद तो ऐसा कोई काम शास्त्रों में पूरी तरह वर्जित है।

* बर्तनों को एक-दूसरे से न टकराने दें।

* संभोग : विवाहित दंपत्ति को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कभी शाम के समय शारीरिक संबंध स्थापित ना करें। यह समय धार्मिक और पवित्र कार्यों के लिए होता है।

* कपड़े न धोएं।

* सोने से बचें: जिस समय दिन के दो पहर आपस में मिल रहे होते हैं, उस समय सोना नहीं चाहिए। ना तो यह स्वास्थ्य के लिए अच्छा है और ना ही धार्मिक दृष्टि से उचित माना गया है।

* चावल न खाएं।

* मोटापा : शाम के समय सोने वाले लोग मोटापे से ग्रस्त हो जाते हैं और उनका आलस्य भी बढ़ता है।

* सफेद दूध न पीएं।

* क्रोध करने से बचें : शाम का वक्त धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होता है। यह पूरा समय ईश्वर की उपासना के लिए निश्चित होता है, इस समय क्रोध या फिर किसी के साथ झगड़ा करना सही नहीं होता। घर में अशांति होने से लक्ष्मी की कृपा नहीं मिल पाती।

* पढ़ाई: शाम के समय पढ़ाई भी नहीं करनी चाहिए, पढ़ाई करने के लिए उपयुक्त समय सुबह का होता है।

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